टीकमगढ़ में भारी बारिश से बिगड़े हालात, पुलों पर 2 फीट तक पानी; कई रास्ते बंद, बांध के 3 गेट खोले
टीकमगढ़: मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले में लगातार हो रही मूसलधार बारिश से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। पिछले कई दिनों से जारी बारिश के चलते नदी-नाले उफान पर हैं और कई पुलों के ऊपर पानी बह रहा है। जिले के कई प्रमुख मार्गों पर आवागमन रोकना पड़ा है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलभराव और तेज बहाव के कारण लोगों की परेशानी बढ़ गई है।
हालात की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और पुलिस अधीक्षक सुधीर अग्रवाल ने धसान नदी क्षेत्र और दिगौड़ा के पास पूनोल नाला सहित संवेदनशील स्थानों का मौके पर पहुंचकर निरीक्षण किया। अधिकारियों ने संबंधित विभागों को लगातार निगरानी रखने और लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं।
टीकमगढ़-झांसी मार्ग पर पुल के ऊपर बह रहा पानी
लगातार बारिश के कारण टीकमगढ़-झांसी मार्ग पर दिगौड़ा के पास पूनौल नाला और दिगौड़ा बस्ती के सरपट नाला पर बने पुल के ऊपर करीब दो फीट पानी बह रहा है।
पानी के तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने यहां विशेष सावधानी बरती है। किसी वाहन या व्यक्ति के बहाव में आने की आशंका को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया है और लोगों को पानी के बीच से निकलने से रोका जा रहा है।
प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की जा रही है कि वे जलमग्न पुलों और नदी-नालों को पार करने का जोखिम न उठाएं।
इन रास्तों पर आवागमन पूरी तरह बंद
पानी का स्तर बढ़ने और तेज बहाव के चलते जिले के कई अन्य मार्गों पर भी आवागमन रोक दिया गया है। देहात थाना क्षेत्र के हीरानगर बावरी पुल, अस्तोन चौकी क्षेत्र के नचनवारा, लिधोराखास और इकबालपुरा-मड़ियांव घाट पुल पर पानी अधिक होने के कारण यातायात पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है।
इसके अलावा खरों-महेवा चक्र रोड और कटेरा रोड स्थित सुखनई नदी पुल पर भी पानी तेज बहाव के साथ गुजर रहा है। इन स्थानों पर भी लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन का कहना है कि जब तक जलस्तर सुरक्षित स्तर पर नहीं आता, तब तक बंद किए गए मार्गों पर आवागमन शुरू नहीं किया जाएगा।
धसान नदी और नालों पर प्रशासन की नजर
लगातार बारिश के कारण धसान नदी सहित जिले के कई छोटे-बड़े नदी-नाले उफान पर हैं। प्रशासन की टीमें संवेदनशील स्थानों पर नजर बनाए हुए हैं।
कलेक्टर और एसपी ने मौके पर पहुंचकर जलस्तर और रास्तों की स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्थानीय अमले को निर्देश दिए हैं कि किसी भी इलाके में पानी बढ़ने या मार्ग अवरुद्ध होने की सूचना तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई जाए।
बानसुजारा बांध में तेजी से बढ़ी पानी की आवक
लगातार बारिश का असर जिले के बानसुजारा बांध पर भी दिखाई दे रहा है। बांध में पानी की आवक बढ़ने के कारण जलस्तर लगातार ऊपर जा रहा है।
जानकारी के अनुसार बांध का वर्तमान जलस्तर 315.10 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि इसकी पूर्ण भराव क्षमता 316.50 मीटर है। यानी बांध का जलस्तर अपनी अधिकतम क्षमता के काफी करीब पहुंच गया है।
बांध में इस समय करीब 180 घन मीटर प्रति सेकंड पानी की आवक बनी हुई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से बांध के तीन गेट खोल दिए गए हैं।
इन गेटों से करीब 198 घन मीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ा जा रहा है। बांध से पानी छोड़े जाने के बाद प्रशासन निचले इलाकों में भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
24 घंटे में 2.6 इंच बारिश
मौसम विभाग और भू-अभिलेख से प्राप्त जानकारी के अनुसार टीकमगढ़ जिले में पिछले 24 घंटे में औसतन 67.3 मिलीमीटर यानी करीब 2.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई है।
वहीं, 1 जून से अब तक जिले में औसत 700.1 मिलीमीटर बारिश दर्ज हो चुकी है। यह जिले के सामान्य वर्षा कोटे का करीब 70 प्रतिशत बताया गया है।
लगातार बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने के साथ-साथ नदी-नालों और जलाशयों में भी पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी बढ़ी परेशानी
बारिश का असर केवल शहर और मुख्य मार्गों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी कई स्थानों पर जलभराव और नदी-नालों के उफान के कारण आवागमन प्रभावित हुआ है।
कई गांवों को जोड़ने वाले छोटे पुल और रपटे पानी में डूब गए हैं। ऐसे में ग्रामीणों को दूसरे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है। प्रशासन की ओर से संवेदनशील मार्गों पर विशेष निगरानी की जा रही है।
बारिश के दौरान नदी या नाले के पानी का बहाव अचानक बढ़ने की आशंका रहती है। ऐसे में प्रशासन ने लोगों को जलमग्न रास्तों से दूर रहने की सलाह दी है।
राजस्व और निर्माण विभागों को अलर्ट
जिले में बिगड़ते मौसम और जलभराव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रखा है। राजस्व अधिकारियों, पटवारियों और पंचायत अमले को अपने-अपने क्षेत्रों में स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी, एनएच और पीएमजीएसवाई की टीमों को भी सक्रिय रहने को कहा गया है, ताकि बारिश के कारण सड़क या पुल को नुकसान होने पर तत्काल कार्रवाई की जा सके।
SDRF और NDRF की टीमें भी तैयार
किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमों को भी सक्रिय रखा है। एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ मध्य प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रशिक्षित आपदा मित्र भी जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव कार्य के लिए तैयार हैं।
प्रशासन का फोकस फिलहाल संवेदनशील स्थानों पर निगरानी रखने, लोगों को सुरक्षित रखने और जलमग्न मार्गों पर दुर्घटनाएं रोकने पर है।
पुल पार करने की कोशिश न करें
बारिश के दौरान कई बार लोग पानी का बहाव कम समझकर पुल या रपटे को पार करने की कोशिश करते हैं। लेकिन तेज बहाव में वाहन या व्यक्ति के संतुलन बिगड़ने का खतरा रहता है।
टीकमगढ़ में कई पुलों पर करीब दो फीट तक पानी बहने की स्थिति को देखते हुए लोगों के लिए यह बेहद जरूरी है कि वे प्रशासन द्वारा बंद किए गए मार्गों पर जाने से बचें।
टीकमगढ़ में बारिश के हालात की बड़ी बातें
जिले में लगातार मूसलधार बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं।
कई पुलों के ऊपर करीब 2 फीट तक पानी बह रहा है।
टीकमगढ़-झांसी मार्ग पर दिगौड़ा क्षेत्र में पानी का तेज बहाव।
हीरानगर बावरी पुल, नचनवारा, लिधोराखास और इकबालपुरा-मड़ियांव घाट पुल पर आवागमन बंद।
खरों-महेवा चक्र रोड और कटेरा रोड के सुखनई नदी पुल पर भी तेज बहाव।
कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय और एसपी सुधीर अग्रवाल ने संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण किया।
बानसुजारा बांध का जलस्तर 315.10 मीटर पहुंचा।
बांध की पूर्ण भराव क्षमता 316.50 मीटर है।
पानी की आवक करीब 180 घन मीटर प्रति सेकंड।
सुरक्षा के लिए बांध के 3 गेट खोले गए।
करीब 198 घन मीटर प्रति सेकंड पानी छोड़ा जा रहा है।
पिछले 24 घंटे में जिले में औसतन 67.3 मिमी यानी 2.6 इंच बारिश हुई।
1 जून से अब तक औसत वर्षा 700.1 मिमी दर्ज हुई।
SDRF, NDRF और प्रशिक्षित आपदा मित्रों को भी अलर्ट रखा गया है।
प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की
लगातार बारिश और बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे नदी, नाले और जलमग्न पुलों के पास जाने से बचें। खासकर उन रास्तों पर वाहन लेकर न जाएं, जहां पानी का बहाव सड़क या पुल के ऊपर से हो रहा है।
फिलहाल प्रशासन की टीमें स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं। बारिश और जलस्तर में कमी आने के बाद ही बंद किए गए मार्गों को दोबारा यातायात के लिए खोला जाएगा।
news desk MPcg