सतना-चित्रकूट में आफत की बारिश: शरभंग नदी उफनी, मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग पर आया पानी; 12 ट्रेनें प्रभावित
चितहरा-खुटहा के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी भरने से करीब चार घंटे थमा रेल संचालन, कई ट्रेनों को अलग-अलग स्टेशनों पर रोका गया; पानी घटने के बाद कॉशन ऑर्डर के साथ 10 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से गुजर रहीं ट्रेनें
सतना/चित्रकूट। मध्य प्रदेश के सतना और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनती जा रही है। शनिवार को भारी बारिश के चलते क्षेत्र की शरभंग नदी उफान पर आ गई। नदी का पानी बढ़ने और तेज बहाव के कारण मुंबई-हावड़ा रेलमार्ग के चितहरा से खुटहा स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर पानी पहुंच गया। ट्रैक पर पानी भरने की सूचना मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए इस हिस्से में ट्रेनों की आवाजाही रोक दी गई।
बारिश और नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब चार घंटे तक इस रेलखंड पर रेल यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान कई यात्री ट्रेनें रास्ते में अलग-अलग स्टेशनों पर खड़ी रहीं। ट्रेनों के अचानक रुकने से यात्रियों को काफी समय तक इंतजार करना पड़ा। कुछ यात्रियों को यह भी चिंता रही कि बारिश के कारण उनका सफर और कितना लंबा हो सकता है।
शरभंग नदी के बढ़े जलस्तर से बिगड़े हालात
लगातार बारिश के कारण सतना और चित्रकूट क्षेत्र में नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। शरभंग नदी में भी पानी का बहाव अचानक तेज हो गया। नदी के उफान का असर आसपास के क्षेत्रों के साथ रेलवे ट्रैक पर भी दिखाई दिया।
चितहरा और खुटहा स्टेशन के बीच रेल पटरी पर पानी जमा होने के साथ ही कुछ हिस्सों में पानी का बहाव भी तेज रहा। रेलवे के लिए यह स्थिति इसलिए गंभीर थी क्योंकि ट्रैक के ऊपर या आसपास तेज बहाव होने की स्थिति में ट्रेन संचालन जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे में रेलवे ने जल्दबाजी के बजाय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए परिचालन को रोकने का फैसला किया।
रेलवे कर्मचारियों ने मौके की स्थिति का जायजा लिया और पानी के बहाव पर नजर रखी। जब जलस्तर और बहाव में कमी आने लगी, तब ट्रेनों को दोबारा चलाने की प्रक्रिया शुरू की गई।
चार घंटे तक प्रभावित रहा रेल परिचालन
ट्रैक पर पानी आने के कारण इस महत्वपूर्ण रेलमार्ग पर करीब चार घंटे तक यातायात प्रभावित रहा। इस दौरान मुंबई, जबलपुर, सतना, मानिकपुर और प्रयागराज की दिशा में जाने वाली कई ट्रेनों पर असर पड़ा।
कुछ ट्रेनों को रास्ते में ही रोक दिया गया, जबकि कुछ ट्रेनों को सगमा, जैतवारा और मझगवां जैसे स्टेशनों पर खड़ा रखा गया। ट्रेनें रुकी होने के कारण यात्रियों को लंबे समय तक स्टेशन या ट्रेन के अंदर इंतजार करना पड़ा।
लंबी दूरी की ट्रेनों में सफर कर रहे यात्रियों के लिए यह स्थिति और मुश्किल रही। कई यात्रियों की आगे की यात्रा की योजना प्रभावित हुई। खासकर उन यात्रियों को परेशानी हुई जिन्हें निर्धारित समय पर दूसरे शहर पहुंचना था या आगे कनेक्टिंग ट्रेन पकड़नी थी।
पानी कम हुआ तो सावधानी के साथ शुरू हुआ संचालन
हालात में सुधार आने और पानी का बहाव कम होने के बाद रेलवे ने प्रभावित रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन दोबारा शुरू कर दिया। हालांकि, रेलवे ने पूरी तरह सामान्य गति से ट्रेनें चलाने के बजाय सुरक्षा के लिए विशेष सावधानी बरती।
प्रभावित हिस्से में कॉशन ऑर्डर लागू किया गया है। इसके तहत ट्रेनों को महज 10 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से निकाला जा रहा है। इसका मकसद ट्रैक की स्थिति को देखते हुए किसी भी तरह के जोखिम को टालना है।
रेलवे कर्मचारी लगातार ट्रैक की निगरानी कर रहे हैं। पानी के स्तर में दोबारा बढ़ोतरी या बहाव तेज होने की स्थिति में ट्रेनों की आवाजाही पर फिर से रोक लगाई जा सकती है।
जीआरपी और आरपीएफ की बढ़ाई गई निगरानी
बारिश और ट्रैक पर पानी की स्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई। यात्रियों की सुरक्षा तथा रेलखंड की निगरानी के लिए जीआरपी और आरपीएफ का अतिरिक्त स्टाफ सतना से मौके की ओर भेजा गया।
रेलवे प्रशासन के लिए इस दौरान सबसे बड़ी प्राथमिकता ट्रैक की सुरक्षा सुनिश्चित करना रही। क्योंकि पानी के तेज बहाव के दौरान केवल ट्रैक के ऊपर दिखाई देने वाला पानी ही खतरा नहीं होता, बल्कि मिट्टी के कटाव और ट्रैक के नीचे की संरचना पर पड़ने वाले प्रभाव की भी जांच जरूरी होती है।
इसी वजह से रेलवे की टीम स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जांच के बाद ही ट्रेनों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
करीब एक दर्जन महत्वपूर्ण ट्रेनें प्रभावित
रेल परिचालन बाधित होने का असर कई महत्वपूर्ण ट्रेनों पर पड़ा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 12 ट्रेनें इस स्थिति से प्रभावित हुईं। इनमें लंबी दूरी की कई प्रमुख ट्रेनें शामिल हैं।
प्रभावित ट्रेनों में 12428 रीवा एक्सप्रेस, 13201 राजेंद्रनगर-लोकमान्य तिलक एक्सप्रेस, 15017 काशी एक्सप्रेस, 11061 लोकमान्य तिलक-जयनगर एक्सप्रेस, 11015 लोकमान्य तिलक-सहरसा अमृत भारत, 11274 प्रयागराज छिवकी-इटारसी एक्सप्रेस और 15160 सारनाथ एक्सप्रेस सहित अन्य ट्रेनें शामिल हैं।
इन ट्रेनों का संचालन प्रभावित होने से बड़ी संख्या में यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में देरी का सामना करना पड़ा।
यात्रियों को करना पड़ा घंटों इंतजार
रेल परिचालन अचानक प्रभावित होने से यात्रियों में असमंजस की स्थिति बनी रही। कुछ यात्रियों को ट्रेनों के अंदर ही कई घंटे तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कुछ ट्रेनें स्टेशनों पर रोक दी गईं।
बारिश के बीच यात्रियों को यह चिंता भी रही कि यदि नदी का जलस्तर फिर बढ़ा तो कहीं ट्रेनों का संचालन दोबारा न रोकना पड़े। रेलवे की ओर से ट्रैक की स्थिति सामान्य होने के बाद ही धीरे-धीरे परिचालन आगे बढ़ाया गया।
यात्रियों की परेशानी इसलिए भी बढ़ी क्योंकि मुंबई, जबलपुर, सतना, मानिकपुर और प्रयागराज जैसे प्रमुख रूटों पर चलने वाली ट्रेनों में बड़ी संख्या में यात्री सफर करते हैं।
सतना और चित्रकूट में बारिश ने बढ़ाई चिंता
सतना और चित्रकूट क्षेत्र में बारिश का असर केवल रेलवे तक सीमित नहीं है। लगातार बारिश के कारण कई नदी-नाले उफान पर हैं। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति भी सामने आ रही है।
शरभंग नदी का जलस्तर बढ़ना इस बात का संकेत है कि आने वाले घंटों में भी प्रशासन और स्थानीय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को जलस्तर बढ़ने की स्थिति में सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की सलाह दी जा सकती है।
बारिश के दौरान रेलवे ट्रैक के आसपास पानी भरने की घटनाएं रेल संचालन के लिए बड़ी चुनौती बन जाती हैं। ऐसे में रेलवे द्वारा ट्रेनों की रफ्तार कम करना और जरूरत पड़ने पर परिचालन रोकना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से अहम कदम माना जा रहा है।
रेलवे की नजर जलस्तर और ट्रैक की स्थिति पर
फिलहाल पानी का बहाव कम होने के बाद ट्रेनें प्रभावित रेलखंड से सावधानी के साथ गुजर रही हैं। रेलवे की टीम ट्रैक और आसपास की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
जब तक ट्रैक को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता, तब तक प्रभावित हिस्से में ट्रेनों को नियंत्रित गति से चलाया जाएगा। मौसम और बारिश की स्थिति के आधार पर रेल परिचालन में आगे भी बदलाव संभव है।
यात्रियों के लिए सलाह है कि वे सफर से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति और संभावित देरी की जानकारी रेलवे के आधिकारिक माध्यमों से जरूर जांच लें।
news desk MPcg