सूरजपुर जिला पंचायत CEO को हाई कोर्ट से राहत, अवमानना का शो-कॉज नोटिस वापस; बीमारी के मेडिकल दस्तावेज स्वीकार

सूरजपुर जिला पंचायत CEO को हाई कोर्ट से राहत, अवमानना का शो-कॉज नोटिस वापस; बीमारी के मेडिकल दस्तावेज स्वीकार

कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश नहीं होने पर सूरजपुर जिला पंचायत CEO के खिलाफ अवमानना कार्रवाई का नोटिस जारी हुआ था। वायरल फीवर और पेचिश से पीड़ित होने के दस्तावेज पेश करने के बाद हाई कोर्ट ने नोटिस वापस ले लिया।

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने सूरजपुर जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी अवमानना कार्रवाई से संबंधित शो-कॉज नोटिस वापस ले लिया है। CEO की ओर से अदालत में मेडिकल दस्तावेज पेश कर बताया गया कि निर्धारित अवधि के दौरान वे वायरल फीवर और पेचिश से पीड़ित थे और डॉक्टर की सलाह पर बेड रेस्ट पर थे। इसी वजह से वह व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित नहीं हो सके।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राकेश मोहन पांडेय की अदालत में हुई। कोर्ट ने बीमारी से संबंधित दस्तावेजों को स्वीकार करते हुए अवमानना संबंधी नोटिस वापस लेने का आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई अब दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

व्यक्तिगत पेशी नहीं होने पर हुई थी नाराजगी

यह मामला आरती दुबे मिश्रा बनाम छत्तीसगढ़ शासन से संबंधित है। मामले की सुनवाई के दौरान सूरजपुर जिला पंचायत CEO की व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर स्थिति बनी थी।

कोर्ट के पूर्व निर्देशों के बावजूद CEO की ओर से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर कोई प्रतिनिधित्व नहीं किया गया था। इसके बाद अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई से संबंधित शो-कॉज नोटिस जारी किया था।

अदालत की ओर से जारी नोटिस का उद्देश्य CEO से यह जानना था कि न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं होने के मामले में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न की जाए।

12 से 18 अगस्त के बीच थे बीमार

सुनवाई के दौरान CEO की ओर से अदालत को बताया गया कि 12 अगस्त से 18 अगस्त 2026 के बीच वह वायरल फीवर और पेचिश से पीड़ित थे।

बीमारी के कारण डॉक्टर ने उन्हें आराम की सलाह दी थी और इसी वजह से वह अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सके। अपनी अनुपस्थिति के समर्थन में CEO की ओर से संबंधित मेडिकल दस्तावेज अदालत में पेश किए गए।

हाई कोर्ट ने इन दस्तावेजों को रिकॉर्ड पर लिया और CEO की ओर से दी गई बीमारी संबंधी वजह को स्वीकार किया।

मेडिकल दस्तावेजों के बाद कोर्ट ने वापस लिया नोटिस

अदालत के समक्ष मेडिकल रिकॉर्ड प्रस्तुत होने के बाद मामले की स्थिति बदल गई। कोर्ट ने माना कि व्यक्तिगत उपस्थिति नहीं होने के पीछे CEO की ओर से स्वास्थ्य संबंधी कारण बताया गया है और उसके समर्थन में दस्तावेज भी पेश किए गए हैं।

इन दस्तावेजों को स्वीकार करने के बाद हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ जारी अवमानना संबंधी शो-कॉज नोटिस वापस ले लिया।

इससे CEO को फिलहाल इस मामले में राहत मिल गई है। हालांकि, मूल प्रकरण की सुनवाई अभी जारी रहेगी और मामले पर अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।

2022 में जारी हुआ था नोटिस

मामले में हाई कोर्ट ने 30 नवंबर 2022 को जिला पंचायत CEO और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उस समय CEO की ओर से मामले में कोई प्रतिनिधित्व नहीं हुआ था।

इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी और कोर्ट ने अधिकारियों की स्थिति स्पष्ट कराने की दिशा में कार्रवाई की।

28 अप्रैल 2026 को भी कोर्ट ने दिए थे निर्देश

मामले में 28 अप्रैल 2026 को हाई कोर्ट ने राज्य की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता को जिला पंचायत CEO से आवश्यक निर्देश लेने को कहा था।

इसके बावजूद व्यक्तिगत उपस्थिति को लेकर स्थिति बनी रही। इसी क्रम में अदालत की ओर से अवमानना कार्रवाई का शो-कॉज नोटिस जारी किया गया।

अब CEO की ओर से बीमारी के मेडिकल दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद कोर्ट ने इस नोटिस को वापस ले लिया है।

अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद तय की है। इसका मतलब यह है कि अवमानना संबंधी शो-कॉज नोटिस वापस लिए जाने के बावजूद मूल याचिका पर न्यायिक प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है।

अगली सुनवाई में मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर कोर्ट के समक्ष सुनवाई आगे बढ़ेगी।

क्या है मामले का महत्व?

हाई कोर्ट का यह आदेश इस बात को रेखांकित करता है कि न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत उपस्थिति से संबंधित स्थिति में यदि कोई अधिकारी स्वास्थ्य कारणों से उपस्थित नहीं हो पाता है, तो उसके द्वारा प्रस्तुत किए गए उचित मेडिकल दस्तावेजों पर अदालत विचार कर सकती है।

इस मामले में भी CEO ने अपनी अनुपस्थिति का कारण बीमारी बताया और उसके समर्थन में मेडिकल रिकॉर्ड पेश किए। अदालत ने दस्तावेजों को स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी शो-कॉज नोटिस वापस ले लिया।

फिलहाल सूरजपुर जिला पंचायत CEO को इस अवमानना कार्रवाई से राहत मिली है, जबकि मूल प्रकरण में सुनवाई आगे जारी रहेगी।