मध्य प्रदेश में फिर तेज हुआ मानसून, 9 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट; नर्मदा-मंदाकिनी उफान पर

मध्य प्रदेश में फिर तेज हुआ मानसून, 9 जिलों में अति भारी बारिश का अलर्ट; नर्मदा-मंदाकिनी उफान पर

28 जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी, बरगी और कुटनी बांधों के गेट खुले; कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात

मध्य प्रदेश में सितंबर की शुरुआत के साथ मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण नर्मदा और मंदाकिनी समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है। कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे के दौरान प्रदेश के कई हिस्सों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। 4 और 5 सितंबर को बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन को भी अलर्ट मोड पर रखा गया है।

9 जिलों में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट

मौसम विभाग ने शुक्रवार को शिवपुरी, गुना, राजगढ़, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सागर, दमोह और नर्मदापुरम में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। इन जिलों में तेज बारिश के साथ जलभराव और निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने की आशंका है। प्रशासन को मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है।

इसके अलावा भोपाल, उज्जैन, ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, दतिया, पन्ना, सतना, रीवा, अशोकनगर, विदिशा, रायसेन, छिंदवाड़ा, बैतूल, सीहोर, शाजापुर, देवास, आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश की चेतावनी है।

28 जिलों में भारी बारिश, कई इलाकों में बारिश का दौर जारी

प्रदेश के इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, नीमच, रतलाम, हरदा, मुरैना, जबलपुर, कटनी, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडोरी, पांढुर्णा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौसम प्रणाली के सक्रिय रहने से अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का असर दिखाई दे सकता है।

मंदाकिनी खतरे के निशान के करीब, चित्रकूट में बढ़ी चिंता

लगातार बारिश के कारण चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़कर 138.52 मीटर तक पहुंच गया है। नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए एसडीईआरएफ की टीम ने करीब 100 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

छतरपुर में स्कूल बंद, मैहर में पुलों के ऊपर से बहा पानी

भारी बारिश का असर छतरपुर में भी देखने को मिला है। जलभराव और बिगड़ते हालात को देखते हुए जिले के सभी स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। वहीं मैहर जिले में कई स्थानों पर पुलों के ऊपर से पानी बहने लगा, जिसके कारण मुकुंदपुर मार्ग प्रभावित रहा। लगातार बारिश के कारण ग्रामीण और निचले इलाकों में आवाजाही पर भी असर पड़ा है।

मंडला में बढ़ा नर्मदा का जलस्तर, बरगी बांध भी लगभग भर चुका

मंडला में नर्मदा नदी का जलस्तर 436.1 मीटर दर्ज किया गया है। जबलपुर स्थित बरगी बांध में भी पानी तेजी से बढ़ा है और बांध करीब 93.33 प्रतिशत भर चुका है। पानी की आवक को नियंत्रित करने के लिए बरगी बांध के पांच गेट करीब एक मीटर तक खोले गए हैं। गेट खुलने के बाद नर्मदा नदी के घाटों पर जलस्तर करीब चार फीट तक बढ़ने की संभावना जताई गई है। नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

बरगी और कुटनी बांधों से छोड़ा जा रहा पानी

प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच बरगी और कुटनी बांधों के गेट खोलकर पानी छोड़ा जा रहा है। बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण संबंधित नदियों और जलाशयों का जलस्तर और बढ़ सकता है। प्रशासन और स्थानीय अधिकारियों की ओर से नदी-नालों तथा बांधों के आसपास के इलाकों में निगरानी रखी जा रही है।

अब तक 29.2 इंच बारिश, सामान्य से 8 प्रतिशत कम

मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के दौरान अब तक 741.2 मिलीमीटर यानी करीब 29.2 इंच बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा करीब 31.8 इंच है। इस हिसाब से अब तक करीब 2.6 इंच बारिश कम हुई है और प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से लगभग 8 प्रतिशत नीचे है।

हालांकि, बारिश की कमी का अंतर सभी क्षेत्रों में एक जैसा नहीं है। पूर्वी मध्य प्रदेश में अब सामान्य से महज 1 प्रतिशत कम बारिश रह गई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में औसत से करीब 17 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

34 जिलों में बारिश की कमी, पश्चिमी MP में ज्यादा असर

बारिश के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के कई जिलों में अब भी सामान्य से कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बालाघाट, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी और टीकमगढ़ समेत कई जिलों में 1 से 23 प्रतिशत तक बारिश की कमी दर्ज की गई है।

पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में कमी का आंकड़ा ज्यादा है। आगर-मालवा, आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, दतिया, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा में 6 से 54 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

21 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

प्रदेश के कुछ जिलों में इस मानसून सामान्य से ज्यादा बारिश भी हुई है। अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, उमरिया, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़ और शिवपुरी में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

जून की कमी जुलाई-अगस्त की बारिश से भी पूरी नहीं हुई

इस मानसून सीजन में जून के दौरान मध्य प्रदेश में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया, लेकिन जून में हुई बारिश की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। मानसून के दो बार कमजोर पड़ने के कारण प्रदेश के कई हिस्सों में कुछ दिनों तक बारिश का दौर थमा रहा। अब सितंबर की शुरुआत में सक्रिय मौसम प्रणाली के कारण एक बार फिर बारिश ने जोर पकड़ लिया है।

4-5 सितंबर अहम, 6-7 सितंबर को ग्वालियर-चंबल में बढ़ेगी बारिश

मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिन मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। 4 और 5 सितंबर को प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके बाद 6 और 7 सितंबर को ग्वालियर-चंबल संभाग में भी तेज बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। ऐसे में नदी, नाले और बांधों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

प्रशासन अलर्ट, नदी और निचले इलाकों में रहने वालों को सावधानी की जरूरत

लगातार बारिश और बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ सकता है। चित्रकूट, छतरपुर, मैहर, मंडला और जबलपुर समेत प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन की निगरानी बढ़ाई गई है। लोगों को उफनती नदियों, पुलों और तेज बहाव वाले नालों को पार नहीं करने की सलाह दी जाती है।

फिलहाल मध्य प्रदेश में मानसून सक्रिय बना हुआ है और अगले 48 घंटे बारिश के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। एक ओर जहां बारिश से जलस्रोतों और बांधों को राहत मिल रही है, वहीं लगातार तेज बारिश से बाढ़ और जलभराव का खतरा भी बढ़ गया है। ऐसे में मौसम विभाग के अलर्ट और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।