चंबल और वैनगंगा के कछुए तस्करों के निशाने पर, 500 रुपए का कछुआ 10 हजार तक में बिक रहा
स्थानीय इलाकों से कछुओं की खरीद के बाद बड़े शहरों और दूसरे राज्यों तक सप्लाई, STSF की जांच में सामने आया तस्करी के नेटवर्क का पूरा तरीका
चंबल और बालाघाट की वैनगंगा नदी से निकलने वाले कछुए अब वन्यजीव तस्करों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बनते जा रहे हैं। वन विभाग की स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स यानी STSF की जांच में सामने आया है कि तस्करी से जुड़े लोग स्थानीय स्तर पर कछुओं को बेहद कम कीमत में खरीदते हैं और बाद में इन्हें कई गुना ज्यादा दाम पर बेच देते हैं। स्थानीय स्तर पर एक कछुए के लिए 500 से 900 रुपए तक दिए जाते हैं, जबकि प्रजाति, आकार और ग्राहक की मांग के आधार पर यही कछुआ इंदौर समेत मध्य प्रदेश के बड़े शहरों और राजस्थान, महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश तक पहुंचने के बाद 3 हजार से 10 हजार रुपए तक में बेचा जाता है। जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क में शामिल लोगों और इसकी सप्लाई चेन की जानकारी जुटा रही है।
पहले स्थानीय लोगों से खरीद, फिर ग्राहक की तलाश
गिरफ्तार किए गए तस्करों से पूछताछ में कछुओं की तस्करी का तरीका सामने आया है। जानकारी के मुताबिक गिरोह सीधे नदी और प्राकृतिक जलस्रोतों से कछुए पकड़ने के बजाय कई बार स्थानीय लोगों के जरिए उनकी खरीद करता था। कछुओं को खरीदने के बाद कुछ दिनों तक सुरक्षित स्थान पर रखा जाता था। इस दौरान गिरोह के सदस्य संभावित ग्राहकों की तलाश करते थे। ग्राहक को किस प्रजाति का कछुआ चाहिए और वह इसके लिए कितनी कीमत देने को तैयार है, इसी आधार पर आगे सौदा तय किया जाता था। इसके बाद कछुओं को अलग-अलग माध्यमों से दूसरे शहरों और राज्यों तक पहुंचाया जाता था।
मध्य प्रदेश से बाहर तक फैली सप्लाई चेन
जांच में यह भी पता चला है कि कछुओं की तस्करी केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। इंदौर समेत मध्य प्रदेश के दूसरे बड़े शहरों के अलावा इनकी सप्लाई राजस्थान, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश तक किए जाने की जानकारी सामने आई है। तस्कर स्थानीय स्तर पर कम कीमत में कछुए हासिल करने के बाद मांग वाले बाजार में इन्हें कई गुना ज्यादा कीमत पर बेचते थे। अलग-अलग प्रजातियों और ग्राहकों की मांग के कारण कीमत में बड़ा अंतर देखा जाता है। STSF अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग जुड़े हैं और कछुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किन माध्यमों का इस्तेमाल किया जाता था।
बिलाल की रिमांड पूरी होने के बाद जेल भेजा गया
इस मामले में शिवाजी मार्केट स्थित फ्रिश टाउन के कर्मचारी बिलाल से भी पूछताछ की गई थी। उसकी पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद उसे जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के दौरान सामने आई जानकारियों को अब STSF अपनी जांच में जोड़ रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर तस्करी के नेटवर्क में शामिल दूसरे लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है। साथ ही कछुओं को खरीदने वाले और उन्हें दूसरे राज्यों तक पहुंचाने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
चंबल में अलग नेटवर्क की मिली जानकारी
बिलाल से पूछताछ के दौरान STSF को चंबल क्षेत्र में सक्रिय एक ऐसे व्यक्ति के बारे में जानकारी मिली है, जिसने कछुआ तस्करी के लिए अलग नेटवर्क तैयार कर रखा था। अब जांच टीम इस व्यक्ति की पहचान, उसके संपर्कों और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों के बारे में जानकारी जुटा रही है। जांच एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चंबल क्षेत्र से कछुओं को कहां-कहां भेजा जाता था और इस नेटवर्क का दूसरे शहरों में सक्रिय तस्करों से किस तरह संपर्क था। जांच आगे बढ़ने के साथ तस्करी के इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।
news desk MPcg