सुरों की मल्लिका आशा भोसले की जयंती आज, 8 दशक के करियर में बनाई अलग पहचान; आवाज से लेकर अदाकारी तक रहीं बेमिसाल

सुरों की मल्लिका आशा भोसले की जयंती आज, 8 दशक के करियर में बनाई अलग पहचान; आवाज से लेकर अदाकारी तक रहीं बेमिसाल

8 सितंबर 1933 को जन्मीं आशा भोसले ने 1940 के दशक में शुरू किया सफर, हजारों गीतों को दी आवाज; दादा साहेब फाल्के और पद्म विभूषण समेत कई बड़े सम्मान मिले
हिंदी सिनेमा की महान गायिकाओं में शामिल आशा भोसले की आज जयंती है। 8 सितंबर 1933 को महाराष्ट्र के सांगली क्षेत्र में जन्मीं आशा भोसले ने बेहद कम उम्र में संगीत की दुनिया में कदम रखा और करीब आठ दशकों तक अपनी आवाज से भारतीय सिनेमा को समृद्ध किया। उनका जन्म आशा मंगेशकर के नाम से हुआ था और वह महान गायिका लता मंगेशकर की छोटी बहन थीं। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर शास्त्रीय संगीत और रंगमंच से जुड़े हुए थे। इसी संगीतपूर्ण माहौल में आशा भोसले की गायकी की नींव पड़ी। उन्होंने फिल्मों के लिए प्लेबैक सिंगिंग के साथ-साथ अलग-अलग भारतीय भाषाओं में भी गीत रिकॉर्ड किए। उनकी आवाज की सबसे बड़ी खासियत उनकी बहुमुखी प्रतिभा रही। उन्होंने फिल्मी गीतों के अलावा गजल, भजन, लोकगीत, कव्वाली, पॉप और शास्त्रीय संगीत जैसी कई शैलियों में अपनी पहचान बनाई। उनके करियर में कई ऐसे दौर आए जब उन्होंने अपनी गायकी के अंदाज को बदलते हुए नई पीढ़ी के संगीत के साथ खुद को जोड़ा। यही वजह रही कि उनकी आवाज कई दशकों तक श्रोताओं के बीच लोकप्रिय बनी रही। आशा भोसले को उनके शानदार योगदान के लिए दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कई फिल्मफेयर पुरस्कार और अन्य प्रतिष्ठित सम्मान मिले। उन्हें 2000 में दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जो भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान माना जाता है। 2008 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया। सरकारी रिकॉर्ड में भी उन्हें कला के क्षेत्र में पद्म विभूषण दिए जाने की पुष्टि होती है। उनकी उपलब्धियों में रिकॉर्डिंग की संख्या और संगीत की विविधता भी खास रही। 2011 में Guinness World Records ने उन्हें संगीत इतिहास की सबसे अधिक रिकॉर्ड की गई कलाकार के रूप में मान्यता दी थी। आशा भोसले ने सिर्फ गायकी ही नहीं, बल्कि अभिनय और अन्य रचनात्मक क्षेत्रों में भी काम किया। उनकी आवाज ने हिंदी सिनेमा के कई दौर देखे और बदलते संगीत के साथ उनकी गायकी भी नए रंगों में सामने आती रही। 12 अप्रैल 2026 को मुंबई में 92 वर्ष की उम्र में उनके निधन के बाद भारतीय संगीत जगत ने अपनी सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक को खो दिया। हालांकि, उनके गाए गीत, उनकी शैली और संगीत के प्रति उनका योगदान आने वाली पीढ़ियों तक उनकी याद को जिंदा रखेगा।