जबलपुर के सरकारी स्कूल में एक कमरे में चल रहीं 3 कक्षाएं, 3 में से 2 शिक्षक नहीं मिले; निरीक्षण में खुली व्यवस्था की पोल
नुनसर के स्कूल में एक शिक्षिका के भरोसे तीन कक्षाओं की पढ़ाई, एक शिक्षक साक्षरता अभियान में और दूसरी मातृत्व अवकाश पर
जबलपुर के नुनसर क्षेत्र स्थित एक सरकारी स्कूल में शिक्षा व्यवस्था की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। निरीक्षण के दौरान स्कूल में एक ही कमरे में तीन अलग-अलग कक्षाओं के विद्यार्थियों को बैठाकर पढ़ाया जाता मिला। खास बात यह रही कि स्कूल में पदस्थ तीन शिक्षकों में से दो मौके पर मौजूद नहीं थे।
निरीक्षण में एक कमरे में मिलीं तीन कक्षाएं
स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे अधिकारियों को एक ही कमरे में तीन कक्षाओं के विद्यार्थियों के बैठने की स्थिति दिखाई दी। बच्चों की अलग-अलग कक्षाओं के बावजूद उन्हें एक साथ बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही थी। इस दौरान एक शिक्षिका ही बच्चों को संभालते हुए पढ़ाती मिलीं।
एक ही कमरे में कई कक्षाओं के संचालन से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने की स्थिति बन रही थी। अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों के लिए अलग-अलग पाठ्यक्रम और शैक्षणिक जरूरतें होने के बावजूद एक ही शिक्षक के जिम्मे पूरी व्यवस्था थी।
तीन में से दो शिक्षक क्यों नहीं थे स्कूल में?
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जब स्कूल में शिक्षकों की संख्या और उनकी अनुपस्थिति को लेकर जानकारी ली तो स्थिति कुछ हद तक स्पष्ट हुई। स्कूल में पदस्थ तीन शिक्षकों में से एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर बताई गईं।
वहीं, दूसरे शिक्षक की ड्यूटी साक्षरता अभियान में लगाई गई थी। इसके चलते स्कूल में नियमित रूप से मौजूद शिक्षिका के ऊपर एक साथ कई कक्षाओं को पढ़ाने की जिम्मेदारी आ गई।
एक शिक्षिका पर तीन कक्षाओं की जिम्मेदारी
स्कूल में शिक्षकों की उपलब्धता कम होने का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर दिखाई दिया। एक शिक्षिका को एक साथ तीन कक्षाओं के बच्चों को संभालना पड़ रहा था। ऐसी स्थिति में प्रत्येक कक्षा के विद्यार्थियों को पर्याप्त समय देना चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
निरीक्षण के दौरान सामने आई यह स्थिति इस बात की ओर भी इशारा करती है कि किसी शिक्षक की छुट्टी या दूसरी सरकारी ड्यूटी लगने की स्थिति में वैकल्पिक व्यवस्था कितनी जरूरी है।
मातृत्व अवकाश और अभियान की ड्यूटी से बनी स्थिति
मिली जानकारी के अनुसार, स्कूल की एक शिक्षिका मातृत्व अवकाश पर हैं। वहीं दूसरे शिक्षक को साक्षरता अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। यानी स्कूल में शिक्षकों की कमी का कारण केवल अनुपस्थिति नहीं, बल्कि अलग-अलग सरकारी जिम्मेदारियों के कारण उपलब्ध स्टाफ का कम होना भी है।
हालांकि, इससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए विभागीय स्तर पर वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत सामने आती है।
सरकारी स्कूलों में संसाधन और स्टाफ व्यवस्था पर सवाल
सरकारी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा बेहतर बनाने के लिए लगातार योजनाएं संचालित की जाती हैं। इसके बावजूद यदि किसी स्कूल में एक शिक्षक को तीन कक्षाओं की जिम्मेदारी संभालनी पड़े तो यह व्यवस्था की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, शिक्षक अवकाश या गैर-शैक्षणिक सरकारी कार्य में लगाए जाने की स्थिति में स्कूलों में वैकल्पिक शिक्षक व्यवस्था होना जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित न हो।
निरीक्षण से सामने आई जमीनी तस्वीर
नुनसर के इस स्कूल का मामला यह भी बताता है कि कागजों पर दर्ज शिक्षक संख्या और कक्षा में वास्तव में उपलब्ध शिक्षकों की संख्या अलग हो सकती है। किसी शिक्षक के अवकाश या दूसरी सरकारी ड्यूटी में होने से यदि पूरी शिक्षण व्यवस्था एक व्यक्ति पर आ जाए तो इसका असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ना स्वाभाविक है।
अब देखने वाली बात होगी कि शिक्षा विभाग इस स्थिति को दूर करने के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था करता है और विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई को सुचारु रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
व्यवस्था सुधारने की जरूरत
स्कूल में सामने आई स्थिति को केवल शिक्षकों की अनुपस्थिति के तौर पर देखने के बजाय इसे स्टाफ प्रबंधन और वैकल्पिक व्यवस्था से जोड़कर भी देखा जाना जरूरी है। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की छुट्टी, प्रशिक्षण या दूसरी सरकारी ड्यूटी के दौरान पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए पहले से व्यवस्था होना जरूरी है।
नुनसर के स्कूल में निरीक्षण के दौरान सामने आई तस्वीर इसी जरूरत को रेखांकित करती है।
निष्कर्ष
नुनसर के सरकारी स्कूल में एक कमरे में तीन कक्षाओं का संचालन और तीन में से दो शिक्षकों की अनुपस्थिति ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी चुनौतियों को सामने ला दिया है। हालांकि, दोनों शिक्षकों की गैरमौजूदगी के पीछे मातृत्व अवकाश और साक्षरता अभियान की ड्यूटी बताई गई है, लेकिन विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था करना शिक्षा विभाग की बड़ी जिम्मेदारी बन जाती है।
news desk MPcg