21 साल का इंतजार खत्म: भोपाल के नए मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी, 2047 की जरूरतों के हिसाब से बदलेगा शहर का विकास
# 21 साल का इंतजार खत्म: भोपाल के नए मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट जारी, 2047 की जरूरतों के हिसाब से बदलेगा शहर का विकास 2005 के बाद पहली बड़ी पहल, आबादी, ट्रांसपोर्ट, आवास, कारोबार और पर्यावरण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया खाका; जनता से दावे-आपत्तियां लिए जाएंगे
**भोपाल।** मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के नियोजित विकास के लिए करीब 21 साल से लंबित नए मास्टर प्लान की प्रक्रिया अब आगे बढ़ गई है। राज्य सरकार ने **मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट** को सार्वजनिक कर दिया है। नया ड्राफ्ट शहर के अगले दो दशकों के विकास को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसमें बढ़ती आबादी के साथ आवास, परिवहन, सड़क नेटवर्क, व्यावसायिक गतिविधियों, औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसी जरूरतों को शामिल किया गया है।
हालांकि, ड्राफ्ट जारी होने का मतलब यह नहीं है कि नया मास्टर प्लान तत्काल लागू हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी है, जबकि अंतिम मास्टर प्लान के प्रकाशन और उसके लागू होने से संबंधित न्यायिक प्रक्रिया की शर्तें अभी महत्वपूर्ण रहेंगी।
### 2005 के बाद से अटका था नया मास्टर प्लान
भोपाल के नियोजित विकास को लेकर लंबे समय से नए मास्टर प्लान की जरूरत महसूस की जा रही थी। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के मुताबिक शहर का मौजूदा मास्टर प्लान 1995 का है और इसकी अवधि दिसंबर 2005 में समाप्त हो गई थी। इसके बाद नए प्लान की प्रक्रिया कई बार शुरू हुई, लेकिन अंतिम रूप नहीं ले सकी।
इस दौरान भोपाल का शहरी क्षेत्र लगातार फैलता गया। नई कॉलोनियां, आवासीय क्षेत्र, सड़कें, बाजार और दूसरी गतिविधियां बढ़ती गईं। मास्टर प्लान के अभाव में जमीन के उपयोग और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़े कई मामले विवाद का विषय बने रहे।
### 2021 और 2031 के ड्राफ्ट भी आगे नहीं बढ़ सके
नए मास्टर प्लान को लेकर इससे पहले भी प्रयास किए गए थे। रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2010 में मास्टर प्लान-2021 का प्रारूप तैयार किया गया था, जिसमें करीब 813 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र और 196 गांव शामिल किए गए थे। हालांकि आपत्तियों और अन्य कारणों के चलते यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में 2031 से संबंधित प्रक्रिया भी हुई, लेकिन वह भी अंतिम मास्टर प्लान में तब्दील नहीं हो सकी।
अब सरकार ने शहर के भविष्य को 2047 तक ध्यान में रखकर नया खाका तैयार किया है। इस बार आबादी बढ़ने के साथ शहर के विस्तार, परिवहन और आधारभूत ढांचे को एक साथ देखने की कोशिश की गई है।
### सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बाद खुला रास्ता
भोपाल के मास्टर प्लान को लेकर चल रहे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर 2026 को राज्य सरकार को नए मास्टर प्लान का ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी थी। यह मामला खास तौर पर रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों और सीलिंग कार्रवाई से जुड़ा हुआ है।
कोर्ट के आदेश के बाद ड्राफ्ट को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया तेज हुई। इससे करीब दो दशक से अटकी मास्टर प्लान प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का रास्ता खुला।
### विजन-2047 के आधार पर होगा शहर का विकास
नए ड्राफ्ट में **विजन-2047** को आधार बनाया गया है। इसका उद्देश्य भोपाल के वर्तमान विस्तार के साथ आने वाले वर्षों में बढ़ने वाली आबादी और उसकी जरूरतों के लिए जमीन और बुनियादी ढांचे की योजना तैयार करना है।
इसमें आवासीय क्षेत्रों के साथ-साथ परिवहन, उद्योग, व्यावसायिक गतिविधियों और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि उपयोग को व्यवस्थित करने पर जोर दिया गया है। शहर के विस्तार के दौरान पर्यावरण और जलस्रोतों को ध्यान में रखने की जरूरत भी इस पूरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
### करीब 1017 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का प्रस्ताव
मास्टर प्लान-2047 से जुड़ी पूर्व रिपोर्टों के अनुसार प्रस्तावित योजना में करीब **1,017 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र** को शामिल किया गया है। इसके दायरे में लगभग **254 गांव** आने की बात सामने आई है। इससे भोपाल के वर्तमान शहरी क्षेत्र के साथ आसपास के ग्रामीण और तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों को भी भविष्य की योजना से जोड़ने का प्रयास किया गया है।
शहर के विस्तार के साथ अलग-अलग दिशाओं में औद्योगिक और अन्य विकास गतिविधियों के लिए क्षेत्र निर्धारित करने के प्रस्ताव भी सामने आए हैं।
### मेट्रो कॉरिडोर के आसपास ऊंची इमारतों का प्रस्ताव
भोपाल में मेट्रो रेल नेटवर्क के विकास को भी मास्टर प्लान में महत्वपूर्ण आधार माना गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार मेट्रो कॉरिडोर के आसपास अधिक ऊंचाई वाली इमारतों के निर्माण की अनुमति से संबंधित प्रावधान रखे जा सकते हैं। पूर्व रिपोर्टों में मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर **15 मंजिल तक भवन निर्माण** की अनुमति का प्रस्ताव बताया गया है।
इस तरह के प्रावधानों का उद्देश्य मेट्रो जैसे सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के आसपास आवासीय और व्यावसायिक विकास को व्यवस्थित तरीके से बढ़ावा देना है।
### रिहायशी इलाकों में कारोबार के लिए नए नियम
मास्टर प्लान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रिहायशी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ा है। प्रस्तावित नियमों के अनुसार कम चौड़ी सड़कों वाले रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर अधिक सख्ती का प्रावधान हो सकता है।
रिपोर्टों में 18 मीटर से कम चौड़ी सड़कों वाले क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देने और 18 से 24 मीटर चौड़ी सड़कों पर निर्धारित शर्तों के साथ मिश्रित भूमि उपयोग की अनुमति का प्रस्ताव बताया गया है।
हालांकि इन प्रावधानों को अंतिम नियम मानने से पहले ड्राफ्ट की आधिकारिक अधिसूचना और आपत्तियों के बाद होने वाले बदलावों को देखना जरूरी होगा।
### मौजूदा जमीन उपयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख भी महत्वपूर्ण
मास्टर प्लान के ड्राफ्ट के बीच सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि किसी संपत्ति या निर्माण की वैधता फिलहाल **मौजूदा मास्टर प्लान और लागू भवन उपविधियों** के आधार पर जांची जाएगी। इसका मतलब है कि केवल नए ड्राफ्ट के आने से मौजूदा जमीन उपयोग या व्यावसायिक गतिविधियों की वैधता अपने आप नहीं बदल जाएगी।
इसलिए रिहायशी इलाकों में चल रही सीलिंग और वैधानिकता से जुड़े मामलों पर नए मास्टर प्लान के अंतिम रूप लेने तक अलग से कानूनी स्थिति बनी रहेगी।
### कृषि क्षेत्र में भी कुछ गतिविधियों का प्रस्ताव
मास्टर प्लान-2047 के प्रस्तावित प्रावधानों में कृषि क्षेत्र के उपयोग को लेकर भी बदलाव की दिशा दिखाई गई है। निर्धारित प्रक्रिया और अनुमति के बाद कुछ स्थानों पर स्कूल, कॉलेज, अस्पताल और गोदाम जैसी गतिविधियों की अनुमति से जुड़े प्रावधान प्रस्तावित किए गए हैं।
इसका उद्देश्य शहर के बाहरी हिस्सों में बढ़ती आबादी और नई बस्तियों के साथ जरूरी सामाजिक और सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भूमि की उपलब्धता को व्यवस्थित करना बताया गया है।
### सड़क, ट्रांसपोर्ट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
भोपाल के अगले दो दशकों के विकास में सड़क और सार्वजनिक परिवहन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बढ़ती आबादी के साथ ट्रैफिक दबाव, नए आवासीय क्षेत्रों को मुख्य शहर से जोड़ना और मेट्रो सहित सार्वजनिक परिवहन को विस्तार देना मास्टर प्लान की प्रमुख जरूरतों में शामिल है।
विजन-2047 के तहत परिवहन व्यवस्था को भविष्य की आबादी और शहर के विस्तार के अनुरूप तैयार करने पर जोर है। इसके साथ ही नए विकास क्षेत्रों में सड़क, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए भूमि नियोजन भी महत्वपूर्ण रहेगा।
### पर्यावरण और जलस्रोतों को लेकर भी चुनौती
भोपाल की पहचान झीलों और हरित क्षेत्रों वाले शहर के रूप में रही है। इसलिए शहर के विस्तार के साथ जलस्रोतों, निचले इलाकों, वन क्षेत्रों और पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का संरक्षण मास्टर प्लान की बड़ी चुनौती है।
मास्टर प्लान से जुड़े विशेषज्ञों और पूर्व रिपोर्टों में भी तालाब, जलस्रोत, वन क्षेत्र, नालों से निर्माण की दूरी और अन्य पर्यावरणीय पहलुओं को लेकर स्पष्ट प्रावधानों की जरूरत बताई गई है।
### अब जनता दे सकेगी दावे और आपत्तियां
ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद अगला महत्वपूर्ण चरण आम लोगों से **दावे और आपत्तियां** लेना है। नागरिक, जमीन मालिक, व्यापारी और अन्य संबंधित पक्ष प्रस्तावित भूमि उपयोग या विकास प्रावधानों को लेकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी आपत्ति या सुझाव दर्ज करा सकेंगे।
इसके बाद प्राप्त दावों-आपत्तियों पर विभागीय स्तर पर विचार किया जाएगा। इसलिए वर्तमान ड्राफ्ट को अंतिम दस्तावेज के बजाय प्रस्तावित योजना के रूप में देखना महत्वपूर्ण है।
### 21 साल बाद भोपाल के लिए नया शहरी खाका
भोपाल में नए मास्टर प्लान की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित रही है। अब ड्राफ्ट सार्वजनिक होने के बाद शहर के नियोजित विकास को लेकर एक नया चरण शुरू हुआ है। 2047 तक की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार इस ड्राफ्ट में शहर के विस्तार, परिवहन, आवास, उद्योग, कारोबार और पर्यावरण जैसे कई क्षेत्रों को एक साथ शामिल किया गया है।
हालांकि अंतिम तस्वीर दावे-आपत्तियों, विभागीय प्रक्रिया और न्यायिक निर्देशों के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल ड्राफ्ट के सार्वजनिक होने से भोपाल के अगले दो दशकों के विकास की दिशा को लेकर प्रस्ताव सामने आ गया है।
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