भोपाल के बड़ा तालाब में सिंगाड़े की खेती:NGT ने कमेटी बनाकर जांच करवाई; पीसीबी को पानी की नियमित पड़ताल के आदेश

भोपाल के बड़ा तालाब में सिंगाड़े की खेती:NGT ने कमेटी बनाकर जांच करवाई; पीसीबी को पानी की नियमित पड़ताल के आदेश

बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती पर NGT सख्त, पानी की नियमित जांच के आदेश

भोपाल के अपर लेक में कीटनाशकों के इस्तेमाल की आशंका पर कार्रवाई, IARI तीन महीने में करेगा सिंघाड़े की जांच

भोपाल के बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती के दौरान कथित तौर पर रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने निर्देश जारी किए हैं। अधिकरण ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तालाब के पानी की नियमित जांच करने और भोपाल नगर निगम व कृषि विभाग को सिंघाड़े की खेती का नियमन सुनिश्चित करने को कहा है।

जांच में नहीं मिले कीटनाशक अवशेष

NGT द्वारा गठित संयुक्त समिति ने 1 अक्टूबर 2026 को तालाब का निरीक्षण किया था। इस दौरान बैरागढ़ स्थित बोर वन पार्क के पास सिंघाड़े और कमल की खेती मिली, लेकिन कीटनाशकों का छिड़काव करते हुए कोई व्यक्ति नहीं मिला। निरीक्षण के समय मृत मछलियां भी नहीं देखी गईं। पानी के नमूनों में कीटनाशक अवशेष और फीकल कोलीफॉर्म नहीं पाए गए।

पानी की गुणवत्ता की भी हुई जांच

जांच रिपोर्ट के अनुसार, पानी में घुलित ऑक्सीजन 6.1 मिलीग्राम प्रति लीटर, BOD 2.4 मिलीग्राम प्रति लीटर और COD 9.6 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया। हालांकि, NGT ने स्पष्ट किया कि एक स्थान और समय पर लिए गए नमूने के आधार पर पूरे तालाब में कीटनाशकों की मौजूदगी या अनुपस्थिति का निर्णायक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

तीन महीने में सिंघाड़े की जांच करेगा IARI

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI) को सिंघाड़े में संभावित कीटनाशक अवशेषों और हानिकारक रसायनों की जांच तीन महीने के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इसका उद्देश्य सिंघाड़े की खाद्य सुरक्षा पर संभावित प्रभावों का आकलन करना है।

जैविक खेती को बढ़ावा देने के निर्देश

NGT ने मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और भोपाल नगर निगम को जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए जैविक खेती को बढ़ावा देने, रासायनिक कीटनाशकों के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने और जलीय जीवों पर उनके संभावित प्रभावों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, बड़े तालाब में सिंघाड़े की खेती को लागू अनुमति और पर्यावरणीय नियमों के अनुरूप सुनिश्चित करने को कहा गया है।