श्रेया सरन ने ऑडिशन के लिए बीच में छोड़ी कजिन की शादी, ‘दृश्यम’ से मिली हिंदी दर्शकों में पहचान

श्रेया सरन ने ऑडिशन के लिए बीच में छोड़ी कजिन की शादी, ‘दृश्यम’ से मिली हिंदी दर्शकों में पहचान

श्रेया सरन ने ऑडिशन के लिए बीच में छोड़ी कजिन की शादी, ‘दृश्यम’ से मिली हिंदी दर्शकों में पहचान

साउथ में बनीं स्टार, बॉलीवुड में किया संघर्ष; बोलीं- नॉमिनेशन मिला, लेकिन अवॉर्ड शो में नहीं बुलाया

मुंबई: अभिनेत्री श्रेया सरन ने अपने करीब 25 साल के फिल्मी करियर में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों में पहचान बनाने के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में अपनी जगह बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा। ‘तुझे मेरी कसम’, ‘शुक्रिया’ और ‘मिशन इस्तांबुल’ जैसी फिल्मों से उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। हालांकि, रजनीकांत की ‘शिवाजी: द बॉस’, अजय देवगन की ‘दृश्यम’ फ्रेंचाइजी और एसएस राजामौली की ‘आरआरआर’ ने उनके करियर को नई पहचान दी। श्रेया ने एक इंटरव्यू में यह भी बताया था कि ‘आरआरआर’ के ऑडिशन के लिए उन्हें अपने कजिन की शादी बीच में छोड़कर हैदराबाद जाना पड़ा था।

डांस टीचर की सलाह से शुरू हुआ फिल्मी सफर

श्रेया सरन का जन्म 11 सितंबर 1982 को हुआ था। उन्होंने दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से अंग्रेजी साहित्य की पढ़ाई की और कथक का प्रशिक्षण भी लिया। उनके परिवार का फिल्म इंडस्ट्री से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने अभिनेत्री बनने की योजना भी पहले से नहीं बनाई थी। कॉलेज के दिनों में उनकी डांस टीचर ने एक म्यूजिक वीडियो के लिए उनका नाम सुझाया। इसके बाद श्रेया को ‘थिरकती क्यों हवा’ म्यूजिक वीडियो में काम करने का मौका मिला। इसी अनुभव ने उनके लिए फिल्मों के रास्ते खोले और उन्हें तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ में काम मिला।

माता-पिता चाहते थे कि पहले पढ़ाई पूरी करें

श्रेया के माता-पिता चाहते थे कि वह अभिनय में करियर बनाने से पहले अपनी पढ़ाई पूरी करें। उनके पिता इंजीनियर और मां केमिस्ट्री की शिक्षिका थीं। फिल्मों में काम शुरू करने के बाद भी श्रेया ने पढ़ाई जारी रखी। तेलुगु फिल्म ‘इष्टम’ की शूटिंग के दौरान उन्हें भाषा की चुनौती का सामना करना पड़ा। शुरुआती दिनों में डायलॉग बोलने में परेशानी हुई, लेकिन उन्होंने मेहनत से इसे सीखा। वर्ष 2002 में आई फिल्म ‘संतोषम’ से उन्हें दक्षिण भारतीय सिनेमा में अच्छी पहचान मिलने लगी।

साउथ में सफलता, बॉलीवुड में करना पड़ा संघर्ष

तेलुगु और तमिल फिल्मों में लगातार काम करने के बाद श्रेया ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी किस्मत आजमाई। ‘तुझे मेरी कसम’, ‘शुक्रिया: टिल डेथ डू अस अपार्ट’ और ‘मिशन इस्तांबुल’ जैसी फिल्मों से उन्हें वह सफलता नहीं मिली, जिसकी उम्मीद थी। हालांकि, उन्होंने अपने करियर की असफलताओं के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराने के बजाय अपनी गलतियों को स्वीकार किया। श्रेया ने एक पुराने इंटरव्यू में माना था कि हिंदी फिल्मों के चुनाव में उनसे कुछ गलतियां हुई होंगी। उनके मुताबिक, किसी फिल्म के सफल या असफल होने के पीछे हमेशा एक ही वजह नहीं होती।

‘आवारापन’ से तारीफ मिली, लेकिन नहीं मिला बड़ा मौका

इमरान हाशमी के साथ फिल्म ‘आवारापन’ में श्रेया के अभिनय को सराहना मिली। हालांकि, फिल्म को रिलीज के समय बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली। श्रेया ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया था कि उन्हें नॉमिनेशन मिलने के बावजूद कुछ अवॉर्ड समारोहों में नहीं बुलाया गया। उस दौर में दक्षिण भारतीय फिल्मों की पहुंच हिंदी दर्शकों तक सीमित थी। ऐसे में साउथ में लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद उन्हें बॉलीवुड में लगातार बड़े अवसर नहीं मिल पाए। बाद के वर्षों में ‘आवारापन’ को दर्शकों के बीच नई पहचान मिली और फिल्म के संगीत को भी पसंद किया गया।

रजनीकांत की ‘शिवाजी’ से बदली करियर की तस्वीर

वर्ष 2007 में रिलीज हुई तमिल फिल्म ‘शिवाजी: द बॉस’ श्रेया के करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई। एस. शंकर के निर्देशन में बनी इस फिल्म में उन्होंने रजनीकांत के साथ मुख्य महिला किरदार निभाया। फिल्म की सफलता के बाद दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनकी लोकप्रियता और बढ़ी। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग भाषाओं की फिल्मों में काम जारी रखा। श्रेया के लिए यह फिल्म न सिर्फ बड़ी सफलता थी, बल्कि बड़े सितारों के साथ काम करने का एक अहम अनुभव भी बनी।

‘दृश्यम’ में नंदिनी के किरदार से मिली नई पहचान

वर्ष 2015 में रिलीज हुई फिल्म ‘दृश्यम’ में श्रेया ने अजय देवगन की पत्नी नंदिनी सालगांवकर का किरदार निभाया। फिल्म में एक ऐसे परिवार की कहानी दिखाई गई, जो मुश्किल परिस्थितियों में फंस जाता है। नंदिनी अपने परिवार को बचाने के लिए संघर्ष करती है। इस भूमिका में श्रेया को भावनात्मक अभिनय का मौका मिला। फिल्म की सफलता के बाद 2022 में ‘दृश्यम 2’ रिलीज हुई, जिसमें उन्होंने फिर नंदिनी का किरदार निभाया। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी दर्शकों के बीच मजबूत पहचान दिलाई।

‘आरआरआर’ के ऑडिशन के लिए बीच में छोड़ी शादी

एसएस राजामौली की फिल्म ‘आरआरआर’ से जुड़ा श्रेया का एक दिलचस्प किस्सा भी चर्चा में रहा। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म के ऑडिशन के लिए उन्हें अपने कजिन की शादी बीच में छोड़कर हैदराबाद जाना पड़ा था। राजामौली के साथ काम करने का अवसर मिलने पर उन्होंने तुरंत जाने का फैसला किया। फिल्म में श्रेया ने अजय देवगन के किरदार की पत्नी का रोल निभाया था। भले ही उनका स्क्रीन टाइम सीमित था, लेकिन कहानी में उनका किरदार महत्वपूर्ण था। फिल्म की अंतरराष्ट्रीय सफलता ने भारतीय सिनेमा को दुनिया भर में नई पहचान दिलाई।

शादी और मां बनने के बाद भी जारी रखा काम

श्रेया ने 2018 में रूसी उद्यमी आंद्रेई कोशचीव से शादी की। बाद में उनकी बेटी राधा का जन्म हुआ। मां बनने के बाद उन्हें परिवार और काम के बीच संतुलन बनाना पड़ा। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि ‘दृश्यम 2’ की शूटिंग के दौरान उनकी बेटी आठ महीने की थी। उन्होंने शूटिंग और परिवार के समय को व्यवस्थित करके दोनों जिम्मेदारियां निभाईं। मां बनने के बाद मातृत्व से जुड़े किरदारों को समझने का उनका नजरिया भी बदला।

25 साल के करियर में कई उतार-चढ़ाव

श्रेया सरन का फिल्मी सफर बताता है कि सफलता हमेशा एक जैसी नहीं रहती। दक्षिण भारतीय फिल्मों में लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद उन्हें हिंदी सिनेमा में अपनी जगह बनाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। उन्होंने कई भाषाओं में काम किया और अलग-अलग तरह के किरदार निभाए। ‘शिवाजी’, ‘दृश्यम’ और ‘आरआरआर’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को नई दिशा दी। असफलताओं के बावजूद काम जारी रखना और नए अवसरों को अपनाना उनकी लंबी फिल्मी यात्रा का अहम हिस्सा रहा।