हेमा मालिनी@78: पाकिस्तानी फैन चाकू लेकर घर में घुसा, पिता की हार्ट अटैक से मौत; ऐसे बनीं ‘ड्रीम गर्ल’

हेमा मालिनी@78: पाकिस्तानी फैन चाकू लेकर घर में घुसा, पिता की हार्ट अटैक से मौत; ऐसे बनीं ‘ड्रीम गर्ल’

हेमा मालिनी@78: पाकिस्तानी फैन चाकू लेकर घर में घुसा, पिता की हार्ट अटैक से मौत; ऐसे बनीं ‘ड्रीम गर्ल’

जन्म से पहले मां ने रखा था नाम, 13 साल की उम्र में फिल्म से निकाली गईं; ‘सीता और गीता’ से मिली पहचान, धर्मेंद्र से शादी और शाहरुख खान को लॉन्च करने तक दिलचस्प रहा सफर

16 अक्टूबर 1948 को जन्मीं हेमा मालिनी हिंदी सिनेमा की उन अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और शास्त्रीय नृत्य से अलग पहचान बनाई। उन्हें दुनिया ‘ड्रीम गर्ल’ के नाम से जानती है। हालांकि, इस मुकाम तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था। बचपन में मां ने उन्हें नृत्य की शिक्षा दिलाई, शुरुआती दौर में फिल्म से बाहर कर दिया गया और करियर के बीच एक ऐसी घटना हुई, जिसमें उन्होंने अपने पिता को खो दिया। फिल्मों में सफलता, धर्मेंद्र के साथ प्रेम कहानी और राजनीति तक उनका सफर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा।

जन्म से पहले मां ने रख दिया था नाम

हेमा मालिनी की मां जया लक्ष्मी चाहती थीं कि उनकी बेटी शास्त्रीय नृत्य में नाम कमाए। बताया जाता है कि हेमा के जन्म से पहले ही उन्होंने बेटी का नाम ‘हेमा मालिनी’ रखने और उसे क्लासिकल डांसर बनाने की इच्छा जाहिर कर दी थी। जन्म के बाद मां ने अपनी बात के मुताबिक उनकी नृत्य शिक्षा शुरू करवा दी। स्कूल से लौटने के बाद हेमा कभी डांस तो कभी संगीत की कक्षाओं में जाती थीं। मां उनकी ट्रेनिंग को लेकर काफी गंभीर रहती थीं और उन्हें बचपन से ही अनुशासन में रखा।

13 साल की उम्र में फिल्म से कर दिया गया बाहर

हेमा मालिनी ने कम उम्र में मंच पर नृत्य प्रस्तुतियां देना शुरू कर दिया था। एक कार्यक्रम में तमिल निर्देशक सीवी श्रीधर की नजर उन पर पड़ी और उन्हें फिल्म में काम करने का मौका मिला। शुरुआती दो दिन शूटिंग करने के बाद उन्हें यह कहकर फिल्म से बाहर कर दिया गया कि वह बहुत दुबली-पतली हैं और हीरोइन नहीं बन पाएंगी। इस रिजेक्शन से हेमा को दुख हुआ, लेकिन उनकी मां ने उन्हें हिम्मत दी और इसे चुनौती की तरह लेने के लिए कहा। इसके बाद हेमा ने नृत्य और अभिनय का सफर जारी रखा और धीरे-धीरे फिल्मों में काम मिलने लगा।

राज कपूर की नजर में आईं, ऐसे पड़ा ‘ड्रीम गर्ल’ नाम

हिंदी सिनेमा में हेमा मालिनी को बड़ा मौका फिल्म ‘सपनों का सौदागर’ से मिला, जो 1968 में रिलीज हुई थी। फिल्म में राज कपूर उनके हीरो थे। स्क्रीन टेस्ट के दौरान राज कपूर ने हेमा की प्रतिभा को पहचाना और उनके भविष्य को लेकर भरोसा जताया। फिल्म के प्रचार के लिए उनकी तस्वीरों के साथ ‘राज कपूर की ड्रीम गर्ल’ टैगलाइन इस्तेमाल की गई। फिल्म को बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली, लेकिन ‘ड्रीम गर्ल’ नाम हेमा मालिनी की पहचान बन गया। बाद में इसी नाम से उनकी फिल्म भी आई।

‘सीता और गीता’ ने दिलाया बड़ा स्टारडम

हेमा मालिनी के करियर को सबसे बड़ी पहचान फिल्म ‘सीता और गीता’ से मिली। फिल्म में उन्होंने दो अलग-अलग स्वभाव वाली जुड़वां बहनों की भूमिका निभाई। उनके अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया और उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला। इसके बाद ‘शोले’, ‘ड्रीम गर्ल’, ‘क्रांति’, ‘नसीब’ और ‘सत्ते पे सत्ता’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। उस दौर में पुरुष कलाकारों के दबदबे वाले हिंदी सिनेमा में हेमा ने अपने दम पर मजबूत स्टारडम हासिल किया।

धर्मेंद्र से प्रेम, परिवार की नाराजगी और शादी

हेमा मालिनी और धर्मेंद्र की नजदीकियां फिल्मों में साथ काम करने के दौरान बढ़ीं। दोनों ने ‘तुम हसीन मैं जवां’ सहित कई फिल्मों में साथ काम किया। उस समय हेमा की उम्र करीब 20 साल और धर्मेंद्र की 34 साल थी। धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे, इसलिए इस रिश्ते को लेकर हेमा के परिवार की चिंता और नाराजगी भी सामने आई। परिवार की ओर से हेमा को धर्मेंद्र से दूर रखने की कोशिशें हुईं, लेकिन दोनों का रिश्ता जारी रहा। 1980 में हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने शादी की। उनकी दो बेटियां ईशा और अहाना हैं।

पाकिस्तानी प्रशंसक के घर में घुसने की घटना, पिता की मौत

हेमा मालिनी की जिंदगी का सबसे दर्दनाक अध्याय उनके पिता वीएसआर चक्रवर्ती की मौत से जुड़ा है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 19 जुलाई 1978 को एक व्यक्ति ने उनके पिता से मुलाकात कर खुद को हेमा का पाकिस्तानी प्रशंसक बताया था। बताया गया कि वह पहले भी उनके घर के आसपास घूमता रहा था और घर में घुसने की कोशिश कर चुका था।

अगली रात वह व्यक्ति घर के किचन तक पहुंच गया और एक नौकरानी को चाकू की नोक पर पकड़ लिया। परिवार के लोग आवाज सुनकर नीचे पहुंचे। हेमा मालिनी के सामने आते ही वह व्यक्ति उन्हें देखने लगा और उसके हाथ से चाकू छूट गया। घर के कर्मचारियों ने उसे पकड़ने की कोशिश की, लेकिन अफरातफरी के बीच वह भाग निकला। इसी दौरान हेमा के पिता पुलिस को सूचना देने के लिए आगे बढ़े और कुछ कदम चलने के बाद गिर पड़े। डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। बताया गया कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इस घटना ने हेमा और उनके परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया।

‘सत्यम शिवम सुंदरम’ ठुकराई, शाहरुख खान को दिया मौका

पिता की मौत के बाद भी हेमा मालिनी ने अपने करियर को जारी रखा। राज कपूर ने उन्हें फिल्म ‘सत्यम शिवम सुंदरम’ में काम करने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन कहानी और बोल्ड दृश्यों को लेकर उन्होंने यह भूमिका स्वीकार नहीं की। बाद में यह रोल जीनत अमान ने निभाया।

1990 के दशक में हेमा मालिनी ने फिल्म निर्माण की ओर कदम बढ़ाया। उनकी फिल्म ‘दिल आशना है’ से शाहरुख खान को हिंदी फिल्मों में शुरुआती बड़ा मौका मिला। बताया जाता है कि हेमा ने टीवी शो ‘फौजी’ में शाहरुख को देखकर उन्हें फिल्म के लिए चुना था। शुरुआत में शाहरुख को उनका फोन मजाक लगा, लेकिन बाद में मुलाकात हुई और उन्हें फिल्म में कास्ट कर लिया गया। शाहरुख कई मौकों पर अपने फिल्मी सफर में हेमा मालिनी के योगदान का जिक्र कर चुके हैं।

फिल्मों से राजनीति तक जारी रहा सफर

हेमा मालिनी ने अभिनय के साथ-साथ निर्देशन और निर्माण में भी काम किया। ‘बागबान’ में अमिताभ बच्चन के साथ उनकी जोड़ी को दर्शकों ने पसंद किया। फिल्मों के अलावा उन्होंने राजनीति में भी सक्रिय भूमिका निभाई। वह 2004 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं। वर्ष 2010 में उन्हें पार्टी का महासचिव बनाया गया और 2014 में उन्होंने मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 2019 और 2024 में भी वह मथुरा से सांसद चुनी गईं। इस तरह हेमा मालिनी ने सिनेमा से लेकर राजनीति तक अपनी पहचान कायम रखी।

शास्त्रीय नृत्य से शुरुआत कर हिंदी सिनेमा की ‘ड्रीम गर्ल’ बनने और फिर राजनीति में सक्रिय रहने तक हेमा मालिनी का सफर कई उपलब्धियों और निजी संघर्षों से भरा रहा है। उनका करियर इस बात की मिसाल है कि शुरुआती असफलताओं और मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद लगातार काम करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई जा सकती है।