मूवी रिव्यू: ‘नई नवेली’ में बहू को समझा डायन, रामायण काल के रावण से जुड़ा है रहस्य

मूवी रिव्यू: ‘नई नवेली’ में बहू को समझा डायन, रामायण काल के रावण से जुड़ा है रहस्य

मूवी रिव्यू: ‘नई नवेली’ में बहू को समझा डायन, रामायण काल के रावण से जुड़ा है रहस्य

यामी गौतम की हॉरर-कॉमेडी में परिवार, शक और पौराणिक रहस्य का मेल; पहला हाफ मनोरंजक, लेकिन दूसरे हाफ में कहानी की पकड़ होती है कमजोर

कहानी: खुशियां लाने वाली बहू पर क्यों हुआ शक?

यामी गौतम धर की फिल्म ‘नई नवेली’ 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हुई है। करीब 2 घंटे 18 मिनट की इस फिल्म की कहानी मोहिनी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शादी के बाद मेरठ के एक परिवार में आती है। अपने व्यवहार और समझदारी से वह घर के लोगों का दिल जीतने लगती है, लेकिन उसकी यही अच्छाई परिवार के कुछ सदस्यों के मन में शक पैदा कर देती है।

परिवार का देवर बंटू, जिसका किरदार अनुराग ठाकुर ने निभाया है, अपनी भाभी मोहिनी को लेकर अजीबोगरीब आशंकाएं पालने लगता है। उसे लगता है कि मोहिनी के सीधे-सादे चेहरे के पीछे कोई रहस्य छिपा है और कहीं वह डायन तो नहीं। इसी शक से कहानी में कॉमेडी और सस्पेंस की शुरुआत होती है। धीरे-धीरे मामला घर की खटपट से आगे बढ़कर एक ऐसे रहस्य तक पहुंचता है, जिसका संबंध रामायण काल से बताया जाता है।

रावण और मंदोदरी से क्या है कनेक्शन?

फिल्म की कहानी में रावण, मंदोदरी और भगवान राम से जुड़े पौराणिक संदर्भ शामिल किए गए हैं। काल शील पत्थर, राजा के जन्म नक्षत्र से जुड़ी मान्यताएं और रावण की वापसी चाहने वाली अंधेरी शक्तियां कहानी को रहस्यमयी बनाती हैं। फिल्म का प्रयास पौराणिक कथाओं को आधुनिक पारिवारिक कहानी के साथ जोड़ने का है।

शुरुआत में जहां दर्शकों को मोहिनी की असलियत जानने की उत्सुकता रहती है, वहीं आगे चलकर कहानी का दायरा काफी बड़ा हो जाता है। हालांकि, इन पौराणिक घटनाओं को पारिवारिक कहानी के साथ जोड़ने में पटकथा हर जगह सफल नहीं हो पाती। यही वजह है कि दिलचस्प विचार होने के बावजूद कुछ हिस्सों में कहानी उलझी हुई लगती है।

एक्टिंग: यामी के रहस्य और अनुराग की कॉमेडी ने संभाला मोर्चा

यामी गौतम धर ने मोहिनी के किरदार में गंभीरता और रहस्य बनाए रखने की कोशिश की है। उनके हाव-भाव और खामोशी किरदार को दिलचस्प बनाते हैं। वह कहानी की केंद्रीय भूमिका में हैं, लेकिन पटकथा उन्हें अपनी अभिनय क्षमता दिखाने के लिए हर जगह पर्याप्त अवसर नहीं देती।

अनुराग ठाकुर फिल्म में बंटू के किरदार से कॉमेडी का रंग भरते हैं। भाभी को लेकर उनका शक और उसे सही साबित करने की कोशिश कई दृश्यों में हंसाती है। लक्ष्मण रेखा से जुड़ा दृश्य भी मनोरंजक बताया गया है। आदिनाथ एम. कोठारे ने राजा का किरदार निभाया है। भावनात्मक दृश्यों में उनका अभिनय ठीक रहता है, लेकिन कुछ जगह गुस्से और चीखने का अंदाज दोहराव वाला महसूस होता है।

सुनीता राजवर, मीता वशिष्ठ, सुष्मिता मुखर्जी, सोनल झा, आदित्य कुलश्रेष्ठ और प्रतीक पचौरी सहित सहायक कलाकारों ने परिवार के माहौल को पर्दे पर उतारने में सहयोग दिया है।

निर्देशन: पहले हाफ में मनोरंजन, दूसरे में उलझन

निर्देशक बालाजी मोहन फिल्म के पहले हिस्से में पारिवारिक नोकझोंक, कॉमेडी और सस्पेंस का संतुलन बनाने में कामयाब नजर आते हैं। बंटू का शक और मोहिनी का रहस्यमयी व्यवहार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। इसी हिस्से में फिल्म की गति बेहतर बनी रहती है और दर्शकों की दिलचस्पी भी कायम रहती है।

दूसरे हाफ में कहानी पौराणिक घटनाओं और अलौकिक शक्तियों की तरफ मुड़ जाती है। रावण और रामायण से जुड़े विचार अनोखे हैं, लेकिन उन्हें वर्तमान कहानी में शामिल करने के दौरान पटकथा की कसावट कमजोर पड़ने लगती है। कुछ दृश्यों में डर पैदा करने की कोशिश जरूरत से ज्यादा नाटकीय लगती है। राजा का राक्षसी रूप, लाल आंखें और नुकीले दांत जैसे दृश्य हॉरर का माहौल बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए हैं, लेकिन हर जगह उनका अपेक्षित असर नहीं होता।

फिल्म महिलाओं के आत्मविश्वास और परिवार में उनके सम्मान की बात भी उठाती है। यह पहलू कहानी को एक सामाजिक संदर्भ देता है, लेकिन इसे और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया जा सकता था।

म्यूजिक: ‘फटा पटाखा’ खींचता है ध्यान

जीवी प्रकाश कुमार ने फिल्म के जरिए हिंदी सिनेमा में संगीतकार के रूप में शुरुआत की है। फिल्म का संगीत इसकी रंगीन और अतरंगी दुनिया के अनुरूप है। ‘फटा पटाखा’ खास तौर पर ध्यान खींचता है, जबकि बाकी गाने कहानी खत्म होने के बाद ज्यादा देर तक याद नहीं रहते। बैकग्राउंड म्यूजिक रहस्य का माहौल बनाने में मदद करता है, हालांकि कमजोर पटकथा वाले दृश्यों को पूरी तरह संभाल नहीं पाता।

फाइनल वर्डिक्ट: अनोखा आइडिया, लेकिन अधूरा असर

‘नई नवेली’ एक अलग तरह की हॉरर-कॉमेडी है, जिसमें पारिवारिक रिश्तों, शक, रहस्य और रामायण काल के संदर्भों को जोड़ने का प्रयास किया गया है। यामी गौतम और अनुराग ठाकुर की जोड़ी कुछ मनोरंजक पल देती है और फिल्म का पहला हिस्सा दर्शकों को बांधे रखता है। हालांकि, दूसरे हाफ में कहानी की उलझनें और पटकथा की कमजोरी इसका असर कम कर देती हैं।

अगर आपको अनोखे कॉन्सेप्ट और हॉरर-कॉमेडी पसंद हैं, तो फिल्म एक बार देखी जा सकती है। लेकिन रामायण से जुड़े रहस्य और मजबूत कहानी की उम्मीद लेकर जाने वाले दर्शकों को निराशा हो सकती है।

रेटिंग: उपलब्ध समीक्षा के अनुसार, दैनिक भास्कर ने फिल्म को 5 में से 3 स्टार दिए हैं।