MP में बढ़ेगा हवाई सफर का दायरा: 10 जिलों की हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट बनाने की तैयारी, पहले चरण में 5 पर फोकस
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 से पहले एयरपोर्ट का काम तेज करने पर जोर; सिंगरौली समेत दूरस्थ जिलों को बेहतर एयर कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना
मध्यप्रदेश में हवाई कनेक्टिविटी को छोटे और दूरस्थ जिलों तक पहुंचाने की तैयारी तेज हो गई है। राज्य सरकार ने प्रदेश की 10 हवाई पट्टियों को भविष्य में एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसमें सिंगरौली, सागर, नीमच, छिंदवाड़ा, मंडला, खंडवा, रतलाम, मंदसौर, उमरिया और शहडोल को शामिल किया गया है।
सरकार की योजना केवल हवाई सुविधा बढ़ाने तक सीमित नहीं है। एयरपोर्ट नेटवर्क के विस्तार को औद्योगिक गतिविधियों, पर्यटन और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर उन जिलों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां सड़क और रेल के अलावा तेज परिवहन के विकल्प सीमित हैं।
पहले चरण में पांच स्थानों पर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
सरकार के प्रस्ताव में शामिल 10 स्थानों में से पहले चरण में पांच जगहों पर एयरपोर्ट विकसित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात सामने आई है। इनमें सिंगरौली भी शामिल है। सिंगरौली में एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया पर विशेष जोर दिया गया है।
राज्य सरकार इन परियोजनाओं के लिए केंद्र के सामने प्रस्ताव और जरूरी औपचारिकताएं आगे बढ़ाएगी। इसका मतलब यह है कि सभी 10 स्थानों पर तत्काल एयरपोर्ट निर्माण शुरू नहीं होगा, बल्कि परियोजनाएं चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगी।
कौन-कौन से जिले प्रस्तावित सूची में?
राज्य सरकार ने जिन 10 हवाई पट्टियों को विकसित करने की योजना बनाई है, उनमें:
सिंगरौली
सागर
नीमच
छिंदवाड़ा
मंडला
खंडवा
रतलाम
मंदसौर
उमरिया
शहडोल
शामिल हैं।
इनमें कुछ जिले औद्योगिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं, जबकि कुछ पर्यटन और क्षेत्रीय महत्व रखते हैं। सरकार का उद्देश्य एयर कनेक्टिविटी को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक विस्तार देना है।
सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन पर खास नजर
उज्जैन एयरपोर्ट परियोजना को प्रदेश की प्राथमिक योजनाओं में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका एक बड़ा कारण 2028 में होने वाला सिंहस्थ है। इस आयोजन में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की संभावना है।
इसी को देखते हुए उज्जैन में एयरपोर्ट से जुड़ी प्रक्रियाओं को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। पर्यावरण से जुड़ी जरूरी अनुमतियां जल्द हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
एयरपोर्ट तैयार होने से सिंहस्थ के दौरान उज्जैन पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए हवाई यात्रा का विकल्प मजबूत हो सकता है। इसके साथ ही धार्मिक पर्यटन को भी लंबे समय में फायदा मिलने की उम्मीद है।
शिवपुरी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की तलाश
शिवपुरी को लेकर अलग से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके लिए नई साइट की पहचान करने की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
नई जगह तय होने के बाद जमीन, तकनीकी सर्वे, पर्यावरणीय मंजूरी और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जा सकेगा। शिवपुरी के एयरपोर्ट को क्षेत्रीय पर्यटन और कनेक्टिविटी के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उड़ान योजना से छोटे शहरों को जोड़ने की कोशिश
हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए केंद्र की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजना ‘उड़ान’ महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस योजना का उद्देश्य छोटे शहरों और ऐसे क्षेत्रों को हवाई नेटवर्क से जोड़ना है, जहां नियमित हवाई सेवा की सुविधा सीमित है।
मध्यप्रदेश में हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की योजनाओं को इसी व्यापक कनेक्टिविटी विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। योजना के विस्तार से राज्य को आगे भी नए क्षेत्रीय हवाई मार्ग विकसित करने का अवसर मिल सकता है।
कृषि उत्पादों को भी मिलेगा हवाई नेटवर्क का फायदा
मध्यप्रदेश सरकार हवाई सेवाओं का इस्तेमाल केवल यात्रियों की आवाजाही तक सीमित नहीं रखना चाहती। कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचाने के लिए भी एयर कनेक्टिविटी का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।
इंदौर, भोपाल और जबलपुर एयरपोर्ट को कृषि उड़ान से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य खासतौर पर ऐसे कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है, जिन्हें कम समय में दूसरे शहरों या बाजारों तक पहुंचाना जरूरी होता है।
विमानन क्षेत्र में युवाओं के लिए भी योजना
राज्य सरकार विमानन क्षेत्र में रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर भी काम कर रही है। विमानन से जुड़े कोर्स करने वाले युवाओं को फीस में सरकारी सहायता देने की योजना बताई गई है।
इससे पायलट, एविएशन मैनेजमेंट और विमानन क्षेत्र से जुड़े दूसरे पाठ्यक्रमों में रुचि रखने वाले युवाओं को फायदा मिल सकता है। सरकार का लक्ष्य प्रदेश में बढ़ते एविएशन नेटवर्क के साथ स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना भी है।
एयर एंबुलेंस सेवा से गंभीर मरीजों को राहत
प्रदेश में हवाई सेवाओं का इस्तेमाल चिकित्सा आपात स्थिति में भी किया जा रहा है। पीएमश्री एयर एंबुलेंस सेवा के जरिए गंभीर मरीजों को दूरदराज के इलाकों से उच्च स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
सरकार के अनुसार, इस सेवा से अब तक 170 से अधिक गंभीर मरीजों को लाभ मिला है। दूरस्थ इलाकों में रहने वाले मरीजों के लिए समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा तक पहुंच बनाने में एयर एंबुलेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उद्योग और पर्यटन दोनों को मिल सकता है फायदा
एयरपोर्ट नेटवर्क का विस्तार होने पर मध्यप्रदेश के औद्योगिक और पर्यटन क्षेत्रों को फायदा मिलने की संभावना है। सिंगरौली जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में निवेश और कारोबारी आवाजाही आसान हो सकती है, जबकि उज्जैन, खंडवा, मंडला और दूसरे पर्यटन क्षेत्रों में बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी बेहतर हो सकती है।
सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए जमीन, तकनीकी मंजूरियों और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को समय पर पूरा करना है। खासकर उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की समयसीमा को देखते हुए एयरपोर्ट परियोजना पर तेजी से काम करना अहम होगा।
कुल मिलाकर मध्यप्रदेश में हवाई नेटवर्क को बड़े शहरों से आगे बढ़ाकर क्षेत्रीय स्तर तक ले जाने की तैयारी है। 10 हवाई पट्टियों को एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने की योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है, जबकि पहले चरण की परियोजनाओं के आगे बढ़ने के बाद राज्य के कई दूरस्थ जिलों के लिए हवाई यात्रा का विकल्प मजबूत हो सकता है।
news desk MPcg