साल में सिर्फ एक दिन खुलता है नागचंद्रेश्वर मंदिर, नागपंचमी पर आधी रात से उमड़ेगा आस्था का सैलाब
17 साल बाद बदली व्यवस्था के तहत इस बार 12 अगस्त की रात 12 बजे खुलेगा मंदिर; 24 घंटे बाद 13 अगस्त की रात फिर बंद होंगे कपाट
उज्जैन। विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं के लिए खोले जाते हैं। इस बार नागपंचमी 13 अगस्त को है और मंदिर के कपाट 12 अगस्त की रात 12 बजे खोले जाएंगे। इसके साथ ही अगले 24 घंटे तक श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन का अवसर मिलेगा। 13 अगस्त की रात 12 बजे के बाद मंदिर के कपाट फिर बंद कर दिए जाएंगे।
नागचंद्रेश्वर मंदिर महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। यहां भगवान शिव की एक अनोखी प्रतिमा स्थापित है, जिसमें वे नागराज के आसन पर विराजमान दिखाई देते हैं। मान्यता है कि नागपंचमी के दिन इस मंदिर में भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करने का विशेष धार्मिक महत्व है। इसी वजह से हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं।
17 साल बाद बदली मंदिर खोलने की व्यवस्था
इस बार नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोलने की व्यवस्था में खास बदलाव किया गया है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक करीब 17 साल बाद मंदिर को नागपंचमी की रात 12 बजे से श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। इससे पहले लंबे समय से नागपंचमी के दिन सुबह मंदिर के कपाट खोले जाने की व्यवस्था चली आ रही थी।
नई व्यवस्था के तहत 12 अगस्त की रात से ही श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। मंदिर के कपाट खुलने से पहले भगवान नागचंद्रेश्वर का विशेष पूजन और अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन की व्यवस्था शुरू होगी।
24 घंटे तक होंगे भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन
कपाट खुलने के बाद मंदिर करीब 24 घंटे तक खुला रहेगा। श्रद्धालु 12 अगस्त की मध्यरात्रि से लेकर 13 अगस्त की रात तक भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। इसके बाद नागपंचमी की रात 12 बजे मंदिर के कपाट दोबारा बंद कर दिए जाएंगे और अगले नागपंचमी तक श्रद्धालु यहां भगवान के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं कर पाएंगे।
नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
नागराज के आसन पर विराजमान हैं भगवान शिव
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव की प्रतिमा नागराज के ऊपर विराजमान मुद्रा में है। धार्मिक मान्यता के अनुसार नागपंचमी के दिन यहां पूजा और दर्शन करने का विशेष महत्व माना जाता है। इसी वजह से देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु इस दुर्लभ दर्शन के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।
महाकाल मंदिर परिसर में स्थित होने के कारण नागचंद्रेश्वर मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान भी विशेष है। साल में केवल एक दिन कपाट खुलने की परंपरा इसे उज्जैन के प्रमुख धार्मिक आकर्षणों में शामिल करती है।
प्रशासन ने दर्शन व्यवस्था पर बढ़ाया फोकस
श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए मंदिर प्रशासन की ओर से दर्शन व्यवस्था, सुरक्षा, प्रवेश और निकासी को लेकर तैयारियां की जा रही हैं। नागपंचमी के दौरान उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या काफी बढ़ जाती है, इसलिए महाकाल मंदिर क्षेत्र में भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस बार आधी रात से दर्शन शुरू होने के कारण श्रद्धालुओं की आवाजाही रात से ही बढ़ने की संभावना है। प्रशासन का प्रयास है कि भक्तों को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कराए जा सकें।
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