बालाघाट के बैगा इलाके में बच्चों की बीमारी से चिंता बढ़ी, 10 दिन में 7 मौतें; स्वास्थ्य विभाग ने गांव-गांव भेजीं टीमें
बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैगा आदिवासी बहुल क्षेत्र में बच्चों के लगातार बीमार पड़ने और मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और इलाज का अभियान तेज कर दिया है। हालात को देखते हुए गांवों में मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं और स्वास्थ्य टीमें घर-घर पहुंचकर बच्चों की जांच कर रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पिछले दो महीनों में करीब 100 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जिनमें से 93 बच्चे इलाज के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। वहीं हाल के करीब 10 दिनों में 7 बच्चों की मौत हुई है।
10 दिन में 7 बच्चों की मौत से बढ़ी चिंता
बैगा बहुल इलाकों में बच्चों की मौतों के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ी है। CMHO बालाघाट डॉ. परेश उलप के मुताबिक, हाल के 10 दिनों में 7 बच्चों की मौत हुई है। हालांकि, उपलब्ध बयान में बीमारी का स्पष्ट चिकित्सकीय कारण या बीमारी का नाम नहीं बताया गया है, इसलिए इसके कारण को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी जल्दबाजी होगी।
इससे पहले सामने आई रिपोर्टों में बालाघाट के चार बैगा गांवों में बच्चों के बीमार होने की जानकारी दी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बीमारी की वजह पता लगाने के लिए बच्चों के सैंपल जांच के लिए पुणे की लैब भेजे गए हैं। संभावित कारणों में कुपोषण और दूषित पानी की भी जांच की जा रही है।
100 बच्चे हुए अस्पताल में भर्ती
CMHO के अनुसार, पिछले दो महीनों में 100 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से 93 बच्चों का सफल इलाज हुआ और वे स्वस्थ होकर घर लौट गए। फिलहाल 7 बच्चे अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्हें एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा गया है। अधिकारियों के मुताबिक, सभी भर्ती बच्चों की हालत स्थिर है।
घर-घर पहुंच रही 20 स्वास्थ्य टीमें
स्थिति पर नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने 20 टीमों को घर-घर सर्वे के लिए लगाया है। टीमें गांवों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं और बीमारी के लक्षण मिलने पर तत्काल उपचार उपलब्ध करा रही हैं।
इसके साथ ही 10 मेडिकल ऑफिसर अस्पताल और फील्ड दोनों जगह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जिन बच्चों का इलाज घर पर ही संभव है, उन्हें वहीं उपचार दिया जा रहा है, जबकि गंभीर स्थिति वाले बच्चों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।
शुरुआत में इलाज को लेकर थी झिझक
CMHO डॉ. परेश उलप ने बताया कि बैगा आदिवासी बहुल इलाका होने के कारण शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग के सामने एक बड़ी चुनौती लोगों का पारंपरिक इलाज पर भरोसा होना था। स्वास्थ्य टीमें जब गांवों में पहुंचती थीं, तो कुछ परिवार अपने घरों के दरवाजे बंद कर लेते थे या बच्चों को छिपा लेते थे।
लेकिन अस्पताल में भर्ती कराए गए बच्चों के इलाज के बाद जब वे स्वस्थ होकर घर लौटे, तो परिवारों का दवाओं और आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा बढ़ा। अब लोग स्वास्थ्य विभाग की टीमों से इलाज कराने के लिए आगे आ रहे हैं।
बीमारी की वजह अभी साफ नहीं
इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल बीमारी के वास्तविक कारण को लेकर है। अभी तक उपलब्ध जानकारी में बीमारी की निश्चित पहचान सामने नहीं आई है। इसलिए कुपोषण, दूषित पानी या किसी संक्रमण को मौतों का कारण बताना जांच पूरी होने से पहले उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों की जांच और सैंपल रिपोर्ट के बाद ही स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकेगी।
फिलहाल स्थिति नियंत्रण में
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, फिलहाल स्थिति सामान्य और नियंत्रण में है। गांवों में सर्वे, मेडिकल कैंप और बच्चों की निगरानी लगातार जारी है। स्वास्थ्य टीमें यह भी सुनिश्चित कर रही हैं कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर इलाज मिल सके और गंभीर लक्षण वाले मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी न हो।
निष्कर्ष: बालाघाट के बैगा क्षेत्र में बच्चों की बीमारी और मौतों का मामला गंभीर है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने बड़े स्तर पर निगरानी और उपचार शुरू कर दिया है। अब सबसे महत्वपूर्ण जांच बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाना और प्रभावित परिवारों तक समय पर चिकित्सा सुविधा पहुंचाना है।
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