ग्वालियर में 2013 पुलिस भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़े में दो दोषी, अमितेश को 2 और विपिन को 3 साल की सजा

ग्वालियर में 2013 पुलिस भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़े में दो दोषी, अमितेश को 2 और विपिन को 3 साल की सजा

ग्वालियर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश की चर्चित व्यापमं पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 से जुड़े फर्जीवाड़े के एक मामले में ग्वालियर की विशेष CBI अदालत ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। अदालत ने अमितेश कुमार को 2 साल और विपिन कुमार को 3 साल के सश्रम कारावास की सजा दी है। दोनों पर अदालत ने जुर्माना भी लगाया है। मामला परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति के बैठने और सॉल्वर के इस्तेमाल से जुड़ा है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2013 में आयोजित मध्य प्रदेश पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा से जुड़ा है। उस समय व्यापमं द्वारा पुलिस भर्ती परीक्षा आयोजित की गई थी। जांच के दौरान सामने आया कि कुछ अभ्यर्थियों ने परीक्षा में खुद शामिल होने के बजाय अपनी जगह दूसरे लोगों को बैठाया था। इस तरह परीक्षा की पहचान और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की गई।

ग्वालियर में सामने आए इस मामले में परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थी की पहचान को लेकर संदेह पैदा हुआ था। जांच में फोटो और हस्ताक्षर समेत परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया गया और इसके बाद मामला जांच एजेंसी तक पहुंचा।

सॉल्वर के जरिए परीक्षा में फर्जीवाड़ा

मामले का सबसे अहम पहलू सॉल्वर और इम्पर्सोनेशन यानी वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने से जुड़ा है। ऐसे मामलों में सॉल्वर वास्तविक उम्मीदवार की जगह परीक्षा में बैठता है और उम्मीदवार के नाम पर प्रश्नपत्र हल करता है।

ग्वालियर में पुलिस भर्ती परीक्षा से जुड़े इसी तरह के कई मामले सामने आए हैं। CBI की जांच में अलग-अलग मामलों में यह पाया गया कि परीक्षा में बैठने वाले व्यक्ति की फोटो और दस्तावेजों का वास्तविक अभ्यर्थी के रिकॉर्ड से मिलान नहीं हो रहा था। एक पुराने मामले में तो शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान फोटो का मिलान नहीं होने पर कथित फर्जी अभ्यर्थी को पकड़ लिया गया था।

CBI ने संभाली थी जांच

व्यापमं से जुड़े परीक्षा फर्जीवाड़े के कई मामलों की जांच सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद CBI को सौंपी गई थी। पुलिस भर्ती परीक्षा 2013 से जुड़े मामलों में भी CBI ने जांच आगे बढ़ाई और आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।

ग्वालियर की विशेष CBI अदालत में ऐसे मामलों में पहले भी दोषियों को सजा सुनाई जा चुकी है। दिसंबर 2023 में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2013 से जुड़े एक अन्य मामले में अभ्यर्थी सतेंद्र सिंह यादव और उसकी जगह परीक्षा देने वाले जितेंद्र कुमार को चार-चार साल के कठोर कारावास और 14,100-14,100 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी।

सिर्फ एक मामला नहीं, कई केस सामने आए

पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 में सॉल्वर और फर्जी अभ्यर्थियों से जुड़े एक से ज्यादा मामले जांच के दायरे में आए थे। अलग-अलग मामलों में वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने, दस्तावेजों में गड़बड़ी और कथित आपराधिक साजिश जैसे आरोप सामने आए।

एक मामले में CBI जांच के दौरान यह सामने आया था कि जिस अभ्यर्थी के नाम से परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ी, वह लिखित परीक्षा में शामिल ही नहीं हुआ था, जबकि बाद में शारीरिक दक्षता परीक्षा में उसके नाम से एक व्यक्ति पहुंचा था। फोटो मिलान नहीं होने पर गड़बड़ी सामने आई।

पहले भी सुनाई जा चुकी हैं सजा

ग्वालियर की विशेष CBI अदालत ने पुलिस भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों में पहले भी कई आरोपियों को दोषी ठहराकर सजा सुनाई है। दिसंबर 2022 में पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा 2013 के एक मामले में दो सॉल्वर और दो मूल अभ्यर्थियों को चार-चार साल की सजा सुनाई गई थी और प्रत्येक पर 14 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया था।

इसके अलावा 2023 में भी पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा से जुड़े अलग-अलग मामलों में कई आरोपियों को कारावास की सजा दी गई। इससे पता चलता है कि 2013 की भर्ती परीक्षा में सामने आए कथित फर्जीवाड़े के मामलों पर न्यायिक प्रक्रिया लंबे समय से चल रही है।

परीक्षा में फर्जीवाड़ा कैसे पकड़ा जाता है?

ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आम तौर पर फोटो, हस्ताक्षर, एडमिट कार्ड, पहचान पत्र और परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड का मिलान करती हैं। यदि परीक्षा में मौजूद व्यक्ति की पहचान दस्तावेजों से मेल नहीं खाती, तो संदेह पैदा होता है। इसके बाद परीक्षा केंद्र के रिकॉर्ड, दस्तावेज और संबंधित लोगों से पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ती है।

ग्वालियर के एक पुलिस भर्ती मामले में भी फोटो मिलान के दौरान कथित फर्जी अभ्यर्थी की पहचान का मामला सामने आया था, जिसके बाद FIR दर्ज हुई और बाद में CBI ने जांच संभाली।

क्यों गंभीर है मामला?

सरकारी भर्ती परीक्षा में सॉल्वर बैठाना या किसी दूसरे व्यक्ति से परीक्षा दिलाना सिर्फ परीक्षा में नकल का मामला नहीं होता। इसमें प्रतिरूपण, धोखाधड़ी, दस्तावेजों के दुरुपयोग और आपराधिक साजिश जैसे गंभीर आरोप शामिल हो सकते हैं। इससे उन हजारों अभ्यर्थियों के साथ भी अन्याय होता है जो अपनी मेहनत से परीक्षा में शामिल होते हैं।

पुलिस भर्ती जैसी परीक्षा में फर्जीवाड़े का असर चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी पड़ता है। यही वजह है कि ऐसे मामलों की जांच CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी तक पहुंची और अदालतों में लंबे समय तक सुनवाई चली।

अदालत के फैसले का क्या मतलब?

अदालत द्वारा अमितेश कुमार और विपिन कुमार को दोषी ठहराए जाने के बाद दोनों को क्रमशः 2 और 3 साल के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। साथ ही दोनों पर जुर्माना भी लगाया गया है।

यह फैसला 2013 की पुलिस भर्ती परीक्षा में सामने आए फर्जीवाड़े से जुड़े मामलों में चल रही न्यायिक कार्रवाई की एक और कड़ी है। हालांकि, अमितेश कुमार और विपिन कुमार से जुड़े इस विशेष फैसले में जुर्माने की सटीक राशि आपके उपलब्ध इनपुट में नहीं दी गई है, इसलिए उसे बिना आधिकारिक रिकॉर्ड के जोड़ना उचित नहीं होगा।

बड़ी बात

ग्वालियर की विशेष CBI अदालत ने 2013 पुलिस आरक्षक भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़े के मामले में अमितेश कुमार और विपिन कुमार को दोषी ठहराया है। अमितेश को 2 साल और विपिन को 3 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है। यह मामला सॉल्वर के इस्तेमाल और वास्तविक अभ्यर्थी की जगह दूसरे व्यक्ति के परीक्षा देने से जुड़ा है। CBI की जांच और अदालत की लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला सामने आया है।