भोपाल में रिहायशी इलाकों में कारोबार पर नगर निगम की सख्ती, हजारों दुकानदारों को नोटिस; 10 दिन में दुकानें बंद करने का निर्देश
अरेरा कॉलोनी समेत कई इलाकों में कार्रवाई तेज, अब सीलिंग की तैयारी; व्यापारियों ने कहा- पहले दें वैकल्पिक व्यवस्था
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। रिहायशी इलाकों में घर, प्लॉट या आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवनों में दुकान, ऑफिस, कोचिंग, कैफे, रेस्टोरेंट और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। नगर निगम की ओर से ऐसे प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कई मामलों में व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं। कार्रवाई आगे बढ़ने पर संबंधित भवनों को सील किए जाने की भी तैयारी है।
नगर निगम की इस कार्रवाई से शहर के कई इलाकों में कारोबारियों के बीच चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि वे वर्षों से इन्हीं स्थानों पर कारोबार कर रहे हैं और कई लोग नगर निगम का लाइसेंस, टैक्स, बिजली का व्यावसायिक बिल तथा अन्य जरूरी दस्तावेज भी जमा करते हैं। ऐसे में अचानक दुकान या प्रतिष्ठान बंद करने का नोटिस मिलने से उनके सामने कारोबार और रोजगार दोनों का संकट खड़ा हो गया है। दूसरी ओर नगर निगम का तर्क है कि यदि भवन का स्वीकृत उपयोग आवासीय है और उसमें नियमों के विपरीत व्यावसायिक गतिविधि संचालित हो रही है, तो नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
करीब 30 हजार कारोबारियों को नोटिस दिए जाने का दावा
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की ओर से जुलाई में कहा गया था कि नगर निगम ने शहर में करीब 30 हजार व्यापारियों को 10 दिन के भीतर दुकानें बंद करने के नोटिस दिए हैं। व्यापारियों ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि जिन प्रतिष्ठानों में कारोबारी लंबे समय से व्यापार कर रहे हैं, उन्हें अचानक बंद कराने से पहले उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए। व्यापारी संगठनों का कहना है कि भोपाल में लंबे समय से नया मास्टर प्लान लागू नहीं हुआ है। इस वजह से शहर के कई हिस्सों में जमीन के उपयोग और बढ़ती आबादी के बीच व्यावहारिक समस्या पैदा हुई है। कई प्रमुख मार्गों और बाजारों के आसपास ऐसे भवन हैं जिनका इस्तेमाल वर्षों से कारोबार के लिए किया जा रहा है। व्यापारियों का तर्क है कि ऐसे क्षेत्रों को पूरी तरह बंद कराने के बजाय नियंत्रित तरीके से मिक्स्ड लैंड यूज की व्यवस्था लागू की जानी चाहिए।
1018 प्रतिष्ठानों को पहले ही नोटिस
नगर निगम की कार्रवाई के दौरान अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर समेत कई क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक नगर निगम ने अब तक करीब 1,018 व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए थे। इनमें उन भवनों को शामिल किया गया है जहां आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत परिसर में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई। निगम की ओर से साफ किया गया है कि कार्रवाई केवल नोटिस जारी करने तक सीमित नहीं रहेगी। जहां नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, वहां गतिविधियां बंद कराने के साथ भवन को सील करने की कार्रवाई भी की जा सकती है।
अरेरा कॉलोनी में सीलिंग की कार्रवाई शुरू
भोपाल की अरेरा कॉलोनी इस कार्रवाई के केंद्र में है। यहां ई-1 से ई-5 सेक्टर समेत कई इलाकों में आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर नगर निगम ने कार्रवाई शुरू की है। कुछ प्रतिष्ठानों को सील करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। एक मामले में शाहपुरा थाना क्षेत्र के रघुनाथ नगर स्थित एसके प्लाजा को नगर निगम ने सील कर दिया था। भवन में संचालित व्यावसायिक गतिविधियों को बंद कराया गया।अरेरा कॉलोनी में लंबे समय से आवासीय और व्यावसायिक उपयोग को लेकर विवाद चलता रहा है। स्थानीय रहवासियों की ओर से भी कई बार शिकायतें की गई हैं कि रिहायशी इलाके में दुकानों, कैफे, कोचिंग सेंटर और अन्य प्रतिष्ठानों के बढ़ने से ट्रैफिक, पार्किंग, शोर और अन्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
आखिर नगर निगम क्यों कर रहा कार्रवाई?
नगर निगम की कार्रवाई के पीछे मूल मुद्दा भवन के स्वीकृत उपयोग और वास्तविक उपयोग के बीच अंतर है। यदि किसी भूखंड या भवन को आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृति मिली है, लेकिन वहां बिना अनुमति व्यावसायिक गतिविधि शुरू कर दी जाती है, तो यह भवन उपयोग संबंधी नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। नगर निगम का कहना है कि ऐसे मामलों में नोटिस देकर संबंधित भवन मालिक या संचालक से जवाब मांगा जाता है। यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिलता या उल्लंघन की पुष्टि होती है तो आगे कार्रवाई की जाती है। इस कार्रवाई का एक बड़ा कारण सुप्रीम कोर्ट के निर्देश भी हैं। अगस्त की शुरुआत में सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की राजधानियों में आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक उपयोग के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसी के बाद भोपाल में कार्रवाई तेज होने की बात सामने आई।
व्यापारियों का सवाल- लाइसेंस और टैक्स लिया तो अब नोटिस क्यों?
नगर निगम की कार्रवाई का विरोध कर रहे व्यापारियों की सबसे बड़ी दलील यह है कि कई प्रतिष्ठानों से वर्षों से विभिन्न प्रकार के शुल्क और टैक्स लिए जाते रहे हैं। कई व्यापारियों के पास नगर निगम के लाइसेंस, जीएसटी रजिस्ट्रेशन और गुमास्ता जैसे दस्तावेज हैं। व्यापारी संगठनों का सवाल है कि यदि किसी स्थान पर वर्षों से कारोबार चल रहा था और स्थानीय निकाय से उससे जुड़े शुल्क या लाइसेंस लिए जा रहे थे, तो अब अचानक उसे नियमों के विपरीत बताकर बंद करने का आदेश क्यों दिया जा रहा है। उनका कहना है कि छोटे कारोबारियों ने अपनी पूरी पूंजी दुकान और कारोबार में लगा रखी है। दुकान बंद होने की स्थिति में कर्मचारियों की नौकरी और परिवार की आय भी प्रभावित होगी।
हालांकि, दूसरी तरफ नियमों के समर्थकों का कहना है कि टैक्स या लाइसेंस जमा करने से किसी भवन का भूमि उपयोग अपने आप नहीं बदल जाता। यदि जमीन का स्वीकृत उपयोग आवासीय है तो व्यावसायिक गतिविधि के लिए अलग अनुमति या वैधानिक प्रावधान जरूरी हो सकते हैं।
मिक्स्ड लैंड यूज की मांग क्यों उठ रही?
कार्रवाई के बीच व्यापारियों ने मिक्स्ड लैंड यूज की मांग तेज कर दी है। इसका मतलब ऐसे निर्धारित क्षेत्रों से है जहां आवासीय और सीमित व्यावसायिक गतिविधियों को नियमों के तहत अनुमति दी जा सके। भोपाल चैंबर और अन्य व्यापारिक संगठनों का तर्क है कि शहर का विस्तार होने के साथ कई इलाकों की प्रकृति बदल चुकी है। जहां कभी केवल मकान थे, वहां अब सड़क, बाजार और दूसरी सुविधाएं विकसित हो चुकी हैं। ऐसे स्थानों पर लंबे समय से चल रहे कारोबार को एक झटके में बंद कराने के बजाय सरकार को नई नीति बनाकर नियमित करने का रास्ता देना चाहिए। व्यापारियों ने सरकार से यह भी मांग की है कि नया मास्टर प्लान लागू होने तक कार्रवाई को रोकने या वैकल्पिक व्यवस्था बनाने पर विचार किया जाए।
रहवासी भी कार्रवाई को लेकर उठा चुके हैं सवाल
इस पूरे मामले में सिर्फ व्यापारी ही नहीं, बल्कि रहवासी संगठन भी अपनी अलग मांगों को लेकर सामने आए हैं। कुछ रहवासियों का आरोप है कि आवासीय इलाकों में अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई पर्याप्त नहीं है और कई जगह केवल नोटिस या पोस्टर लगाकर मामला छोड़ दिया जाता है। रहवासियों का कहना है कि रिहायशी कॉलोनियों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण पार्किंग, ट्रैफिक, शोर और सुरक्षा जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। उनका कहना है कि कार्रवाई सभी के खिलाफ समान रूप से होनी चाहिए और प्रभावशाली लोगों या बड़े प्रतिष्ठानों को किसी तरह की राहत नहीं मिलनी चाहिए।
अरेरा कॉलोनी में क्यों बढ़ा विवाद?
अरेरा कॉलोनी लंबे समय से भोपाल के प्रमुख आवासीय इलाकों में शामिल रही है। लेकिन पिछले वर्षों में यहां कई जगहों पर आवासीय भवनों का इस्तेमाल कारोबार के लिए होने लगा। कुछ इलाकों में मकानों की जगह बड़े कॉम्प्लेक्स, कैफे, कोचिंग सेंटर, लैब और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान दिखाई देने लगे हैं। इस बदलाव के कारण स्थानीय लोगों के बीच भी असंतोष बढ़ा है। उनका कहना है कि कॉलोनी का मूल ढांचा आवासीय उपयोग के हिसाब से तैयार किया गया था। बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों के कारण सड़कों पर वाहनों की संख्या बढ़ती है और पार्किंग की समस्या पैदा होती है। दूसरी ओर कारोबारियों का कहना है कि प्रमुख सड़क और बाजार से जुड़े हिस्सों में व्यापार को पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक समाधान नहीं है।
अब आगे क्या होगा?
नगर निगम की कार्रवाई आने वाले दिनों में और तेज हो सकती है। जिन प्रतिष्ठानों को नोटिस दिए गए हैं, उनके जवाब और दस्तावेजों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पहले व्यावसायिक गतिविधि बंद कराने और उसके बाद सीलिंग जैसी कार्रवाई की जा सकती है। वहीं व्यापारियों ने सरकार से राहत की मांग की है। उनका कहना है कि हजारों लोगों की रोजी-रोटी इन दुकानों और प्रतिष्ठानों से जुड़ी है। इसलिए सरकार को ऐसा रास्ता निकालना चाहिए जिससे नियमों का पालन भी हो और वर्षों से कारोबार कर रहे लोगों का रोजगार भी अचानक खत्म न हो।
फिलहाल भोपाल में आवासीय क्षेत्रों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर नगर निगम, व्यापारी और रहवासी तीनों पक्षों के अपने-अपने तर्क हैं। एक तरफ नियमों के पालन और शहर की मूल प्लानिंग को बनाए रखने की बात है, तो दूसरी तरफ वर्षों से चल रहे कारोबार को व्यवस्थित तरीके से जारी रखने की मांग। आने वाले दिनों में नगर निगम की कार्रवाई और सरकार के स्तर पर लिए जाने वाले फैसले से यह स्पष्ट होगा कि भोपाल में रिहायशी इलाकों के व्यावसायिक उपयोग को लेकर अंतिम व्यवस्था क्या बनती है।
news desk MPcg