नागपंचमी पर आधी रात खुले नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट, 24 घंटे होंगे दर्शन; देशभर से पहुंचे श्रद्धालु, महाकाल की नगरी में आस्था का सैलाब
उज्जैन। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में नागपंचमी के मौके पर आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। महाकाल मंदिर के ऊपरी हिस्से में स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट रविवार और सोमवार की दरमियानी रात ठीक 12 बजे खोल दिए गए। कपाट खुलने के साथ ही मंदिर में श्रद्धालुओं के दर्शन का सिलसिला शुरू हो गया। भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहले से ही कतार में खड़े थे।
आधी रात को हुआ पहला पूजन
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खुलने के बाद परंपरा के अनुसार महानिर्वाणी अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरि महाराज ने भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रथम पूजा-अर्चना की। पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू किए गए। मंदिर परिसर में श्रद्धालु भगवान महाकाल और नागचंद्रेश्वर के जयकारे लगाते नजर आए।
साल में सिर्फ 24 घंटे खुलता है मंदिर
नागचंद्रेश्वर मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके कपाट आम श्रद्धालुओं के लिए पूरे साल बंद रहते हैं। नागपंचमी के अवसर पर ही मंदिर को केवल 24 घंटे के लिए खोला जाता है। इस बार 16 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे कपाट खुले और 17 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे तक श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन कर सकेंगे। यानी भक्तों को साल में सिर्फ इसी एक दिन भगवान के दर्शन का अवसर मिलता है।
इस बार बना खास संयोग
इस साल नागपंचमी का पर्व और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन पड़ रहा है। इसके चलते उज्जैन में धार्मिक उत्साह और भी बढ़ गया है। खास बात यह भी है कि इसी दिन बाबा महाकाल की सवारी भी नगर भ्रमण पर निकलेगी। एक ही दिन नागचंद्रेश्वर के दुर्लभ दर्शन और बाबा महाकाल की सवारी का अवसर मिलने से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के उज्जैन पहुंचने की उम्मीद जताई गई थी।
देशभर से उज्जैन पहुंचे श्रद्धालु
नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट साल में केवल एक बार खुलने के कारण देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। कई भक्त दर्शन के लिए घंटों पहले कतार में लग गए। जैसे ही मंदिर के कपाट खुले, श्रद्धालुओं ने भगवान नागचंद्रेश्वर के जयकारे लगाए और दर्शन के लिए आगे बढ़ना शुरू किया। इस बार सावन सोमवार और नागपंचमी के एक साथ होने के कारण भीड़ सामान्य दिनों की तुलना में काफी ज्यादा रहने की संभावना थी।
भगवान नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा है खास
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव की एक दुर्लभ प्रतिमा विराजमान है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां भगवान शिव नागराज के साथ विराजमान हैं और उनके ऊपर नाग के फन दिखाई देते हैं। मंदिर की प्रतिमा को प्राचीन और विशेष कलात्मक महत्व वाला माना जाता है। इसी अनोखी प्रतिमा के दर्शन के लिए नागपंचमी पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहता है।
नागराज तक्षक से जुड़ी मान्यता
नागचंद्रेश्वर मंदिर को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यह स्थान नागराज तक्षक की तपस्या से जुड़ा हुआ है। मान्यता के अनुसार नागराज तक्षक ने भगवान शिव की आराधना की थी। इसी वजह से नागपंचमी के दिन यहां भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन और पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है। हालांकि ये धार्मिक मान्यताएं हैं, जिनका आधार आस्था और परंपरा है।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
नागपंचमी और सावन सोमवार के एक साथ आने से उज्जैन में भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दर्शन, भीड़ नियंत्रण, पार्किंग, पेयजल, सफाई, चिकित्सा और सुरक्षा जैसी व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को व्यवस्थित रखने के लिए प्रवेश और निकासी के अलग-अलग रास्तों की व्यवस्था की गई है।
शीघ्र दर्शन की भी व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए इस बार नागचंद्रेश्वर मंदिर में शीघ्र दर्शन की ऑनलाइन बुकिंग की व्यवस्था भी की गई थी। रिपोर्टों के मुताबिक ₹300 शुल्क के साथ शीघ्र दर्शन की सुविधा और निर्धारित स्लॉट रखे गए थे। इसके लिए अलग प्रवेश व्यवस्था की गई थी।
महाकाल मंदिर में भी उमड़ी भीड़
नागचंद्रेश्वर मंदिर के अलावा नागपंचमी और सावन सोमवार के कारण महाकालेश्वर मंदिर में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। 17 अगस्त की सुबह बाबा महाकाल के कपाट तड़के खोले गए और विशेष पूजा-अर्चना व भस्म आरती की गई। इस धार्मिक संयोग के कारण पूरे उज्जैन में भक्तिमय माहौल बना हुआ है।
24 घंटे बाद फिर बंद हो जाएंगे कपाट
नागचंद्रेश्वर मंदिर के दर्शन का यह विशेष अवसर केवल 24 घंटे का है। 17 अगस्त की रात 12 बजे के बाद मंदिर के कपाट दोबारा बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालुओं को भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए अगले साल की नागपंचमी का इंतजार करना होगा। यही वजह है कि नागपंचमी के दिन उज्जैन का यह मंदिर देशभर के श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है
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