छात्रों के 24 दिन के आंदोलन के बाद झुकी सरकार, JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाएं रद्द

छात्रों के 24 दिन के आंदोलन के बाद झुकी सरकार, JSSC-CGL समेत कई भर्ती परीक्षाएं रद्द

झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बाद हेमंत सोरेन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। JSSC-CGL समेत TDPL के जरिए कराई गई कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया गया है। अब पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी।

रांची। झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लंबे आंदोलन के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए छात्र करीब 24 दिनों से आंदोलन कर रहे थे। लगातार बढ़ते दबाव के बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसके बाद JSSC-CGL समेत TSR Data Processing Pvt. Ltd. (TDPL) के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों को रद्द करने का फैसला लिया गया।

आखिर क्यों शुरू हुआ था छात्रों का आंदोलन?

झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों की नाराजगी अचानक नहीं बढ़ी। छात्रों ने परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता की कमी और भर्ती प्रक्रिया पर उठ रहे सवालों को लेकर आंदोलन शुरू किया था।

रांची के मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका में 25 जुलाई से छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे थे। आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया और इसमें बड़ी संख्या में सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी शामिल हुए। छात्रों की प्रमुख मांगों में विवादित परीक्षाओं को रद्द करना, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना और भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना शामिल था।

JSSC-CGL बना आंदोलन का सबसे बड़ा मुद्दा

इस पूरे विवाद में JSSC-CGL परीक्षा सबसे ज्यादा चर्चा में रही। छात्रों का आरोप था कि परीक्षा प्रक्रिया में गंभीर गड़बड़ियां हुई हैं और इसकी निष्पक्षता पर सवाल खड़े हुए हैं।

सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सबसे बड़ा गतिरोध इसी परीक्षा को रद्द करने को लेकर था। आखिरकार सरकार ने JSSC-CGL के साथ TDPL से जुड़ी अन्य परीक्षाओं को भी रद्द करने का निर्णय लिया। रिपोर्टों के मुताबिक TDPL द्वारा 2014 से आयोजित परीक्षाओं की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में लाई जाएगी।

छात्रों ने अपनाया आंदोलन का कड़ा रास्ता

सरकार पर दबाव बढ़ाने के लिए छात्रों ने धरना-प्रदर्शन के साथ भूख हड़ताल भी शुरू की। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। आंदोलनकारियों ने सरकार को अपनी मांगें मानने के लिए समयसीमा भी दी थी और मांगें पूरी नहीं होने पर मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी थी।

प्रदर्शन के दौरान स्थिति कई बार तनावपूर्ण भी हुई। पुलिस बैरिकेडिंग तोड़ने और झड़प के मामले में बड़ी संख्या में लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने की खबर भी सामने आई थी।

सरकार ने क्या-क्या फैसला लिया?

सरकार के फैसले के बाद विवादित भर्ती प्रक्रिया को लेकर कई अहम कदम सामने आए हैं।

JSSC-CGL परीक्षा रद्द कर दी गई।
TDPL के जरिए आयोजित संबंधित भर्ती परीक्षाओं को भी रद्द किया गया।
इन परीक्षाओं के परिणाम और उनसे जुड़ी चयन प्रक्रिया को भी निरस्त किया गया।
भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए कमेटी गठित की जाएगी।
सरकार ने भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सुधार और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी जोर दिया है।
रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में जांच की मांग

छात्रों की मांगों में सिर्फ परीक्षा रद्द करना ही शामिल नहीं था। वे पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे। सरकार ने जांच के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया है। हालांकि, छात्रों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी थी, जिस पर पूरी सहमति नहीं बन पाई है। इसी वजह से सरकार के फैसले के बाद भी आंदोलन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई थी।

जिन छात्रों ने परीक्षा पास की, उनके सामने भी संकट

सरकार के इस फैसले से जहां आंदोलन कर रहे छात्रों में राहत और खुशी दिखाई दी, वहीं दूसरी ओर JSSC-CGL में सफल होकर नियुक्ति की प्रक्रिया में आगे बढ़ चुके अभ्यर्थियों के सामने नई चिंता खड़ी हो गई है।

रिपोर्टों के अनुसार करीब 2,000 अभ्यर्थियों पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि परीक्षा और उससे जुड़े परिणाम रद्द होने से उनकी नियुक्ति का भविष्य प्रभावित होगा। अब इन अभ्यर्थियों के लिए सरकार आगे क्या व्यवस्था करती है, इस पर नजर रहेगी।

आंदोलन के बाद क्या हुआ?

सरकार द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों में जश्न का माहौल देखने को मिला। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने भी अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी और इसे आंदोलन की बड़ी सफलता बताया।

हालांकि, मामला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। छात्रों की CBI जांच समेत अन्य मांगों पर अभी सवाल बने हुए हैं। वहीं परीक्षा रद्द होने से सफल अभ्यर्थियों का भविष्य भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती है। ऐसे में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि सरकार दोबारा भर्ती परीक्षाएं कब और किस नई व्यवस्था के तहत कराएगी।

अब आगे क्या होगा?

अब सरकार के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करना और दूसरी, हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित रखते हुए नई भर्ती प्रक्रिया तैयार करना।

छात्रों ने जिस पारदर्शिता और निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था की मांग उठाई है, उसके बाद सरकार के लिए अगली परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा संचालन, एजेंसी की भूमिका, परिणाम और चयन प्रक्रिया को लेकर मजबूत निगरानी व्यवस्था बनाना अहम होगा।

यानी 24 दिन के आंदोलन के बाद छात्रों को बड़ी मांग पर सफलता तो मिली है, लेकिन अब असली परीक्षा सरकार की है—जांच कितनी निष्पक्ष होती है और रद्द हुई परीक्षाओं का भविष्य क्या होगा।