भारतीय सेना का 'सुपर प्लान': थिएटर कमांड से बदलेगा युद्ध लड़ने का तरीका, जानिए क्या है यह बड़ा सैन्य सुधार
भारतीय सेना में दशकों से प्रस्तावित सबसे बड़े सैन्य सुधारों में से एक 'थिएटर कमांड' योजना अब लागू होने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इस योजना के तहत भारतीय थल सेना, नौसेना और वायु सेना को अलग-अलग काम करने वाली सेनाओं की जगह एकीकृत कमांड संरचना में लाने की तैयारी है। इसका उद्देश्य भविष्य के युद्धों और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल, तेज फैसले और संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल को सुनिश्चित करना है।
रक्षा सूत्रों के अनुसार, नए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणी इस योजना के अंतिम खाके को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के सामने पेश कर सकते हैं। माना जा रहा है कि इस प्रस्ताव पर लंबे समय से चल रही चर्चाओं के बाद अब इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
क्या है थिएटर कमांड व्यवस्था?
वर्तमान व्यवस्था में भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना की अपनी-अपनी अलग कमांड संरचनाएं हैं। तीनों सेनाएं अपने स्तर पर योजना बनाती हैं, प्रशिक्षण करती हैं और ऑपरेशन की तैयारी करती हैं। युद्ध या किसी बड़े संकट के समय इनके बीच समन्वय स्थापित किया जाता है।
लेकिन थिएटर कमांड मॉडल में तीनों सेनाओं को एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र के हिसाब से एक ही कमांड के तहत लाया जाएगा।
इस व्यवस्था में किसी खास क्षेत्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी एक थिएटर कमांडर के पास होगी, जो जरूरत के अनुसार सेना, वायु सेना और नौसेना के संसाधनों का इस्तेमाल कर सकेगा।
यानी युद्ध की स्थिति में अलग-अलग सेनाओं के बीच तालमेल बनाने में लगने वाला समय कम होगा और फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
भारत में कितनी थिएटर कमांड बनाने की योजना?
प्रस्तावित योजना के अनुसार भारत में शुरुआती तौर पर तीन प्रमुख थिएटर कमांड बनाए जाने की संभावना है:
1. उत्तरी थिएटर कमांड
इसका मुख्य फोकस चीन से लगी सीमा की सुरक्षा पर होगा। वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए यह कमांड बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
2. पश्चिमी थिएटर कमांड
यह कमांड पाकिस्तान सीमा और पश्चिमी मोर्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालेगी।
3. मैरीटाइम थिएटर कमांड
हिंद महासागर क्षेत्र, समुद्री सीमाओं और नौसैनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यह कमांड बनाई जाएगी।
हर थिएटर कमांड का नेतृत्व चार सितारा रैंक के अधिकारी द्वारा किए जाने का प्रस्ताव है, जो वर्तमान सेना, नौसेना और वायु सेना प्रमुखों के समकक्ष होगा।
क्यों पड़ी थिएटर कमांड की जरूरत?
आधुनिक युद्ध अब सिर्फ जमीन, समुद्र या हवा तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज की लड़ाई में साइबर स्पेस, अंतरिक्ष तकनीक, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर की भूमिका तेजी से बढ़ रही है।
ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि तीनों सेनाओं का एकीकृत ढांचा भारत की सैन्य क्षमता को और मजबूत कर सकता है।
अलग-अलग कमांड व्यवस्था में कई बार निर्णय लेने में समय लग सकता है, जबकि थिएटर कमांड में एक ही कमांडर पूरे क्षेत्र की सैन्य रणनीति तय कर सकेगा।
कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुई थी चर्चा
भारत में सैन्य सुधार और तीनों सेनाओं के एकीकरण की चर्चा 1999 के कारगिल युद्ध के बाद तेज हुई थी। कारगिल समीक्षा समिति और उसके बाद गठित मंत्रियों के समूह ने भी तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत बताई थी।
इसके बाद वर्ष 2019 में भारत में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद बनाया गया। CDS का प्रमुख उद्देश्य ही तीनों सेनाओं के बीच संयुक्तता (Jointness) बढ़ाना और सैन्य सुधारों को आगे बढ़ाना था।
गलवान और हालिया सुरक्षा चुनौतियों से मिला सबक
चीन के साथ पूर्वी लद्दाख में गलवान संघर्ष और सीमा पर लंबे समय तक चले तनाव ने भी संयुक्त सैन्य रणनीति की जरूरत को सामने रखा।
इसके अलावा भविष्य के संभावित संघर्षों में तेज प्रतिक्रिया, बेहतर खुफिया समन्वय और संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए एकीकृत कमांड व्यवस्था को जरूरी माना जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
थिएटर कमांड लागू करना आसान नहीं होगा। यह भारत के सैन्य इतिहास का सबसे बड़ा संगठनात्मक बदलाव माना जा रहा है।
सबसे बड़ी चुनौती अधिकारों और जिम्मेदारियों के बंटवारे को लेकर है।
मौजूदा व्यवस्था में सेना प्रमुख अपने-अपने बलों की भर्ती, प्रशिक्षण, हथियारों और संसाधनों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार हैं।
नई व्यवस्था में भी यह जिम्मेदारी काफी हद तक सेनाओं के पास रह सकती है, लेकिन युद्ध के दौरान सैनिकों और संसाधनों का इस्तेमाल थिएटर कमांडर के निर्देशों के अनुसार होगा।
इसके अलावा बजट, कमांड संरचना और तीनों सेनाओं के बीच समन्वय को लेकर भी कई प्रशासनिक मुद्दों पर अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है।
दुनिया के कई देशों में पहले से लागू है मॉडल
अमेरिका, चीन और कई अन्य देशों में थिएटर कमांड जैसी व्यवस्था पहले से मौजूद है।
इन देशों में अलग-अलग सैन्य शाखाओं को एक क्षेत्रीय कमांड के तहत काम कराया जाता है, जिससे युद्ध की स्थिति में तेजी से निर्णय लेने में मदद मिलती है।
भारत भी इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए अपनी सैन्य क्षमता को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करना चाहता है।
भारत की युद्ध क्षमता में कितना बदलाव आएगा?
अगर थिएटर कमांड योजना लागू होती है तो इसके कई बड़े प्रभाव देखने को मिल सकते हैं:
तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल होगा।
युद्ध की स्थिति में फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।
संसाधनों का दोहराव कम होगा।
आधुनिक तकनीक और हथियारों का बेहतर इस्तेमाल संभव होगा।
सीमाओं और समुद्री क्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, थिएटर कमांड भारत को पारंपरिक युद्ध के साथ-साथ साइबर, अंतरिक्ष और हाइब्रिड युद्ध जैसी नई चुनौतियों के लिए भी तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकती है।
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