केन-बेतवा परियोजना पर बढ़ा विवाद: विस्थापन और मुआवजे को लेकर आमने-सामने दावे, सरकार ने जारी किए आंकड़े

केन-बेतवा परियोजना पर बढ़ा विवाद: विस्थापन और मुआवजे को लेकर आमने-सामने दावे, सरकार ने जारी किए आंकड़े

भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। बुंदेलखंड में परियोजना से प्रभावित परिवारों के विस्थापन, मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। वहीं सरकार और प्रशासन ने परियोजना से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जारी करते हुए अपने स्तर पर की गई कार्रवाई और मुआवजा वितरण की स्थिति सामने रखी है।

केन-बेतवा लिंक परियोजना देश की बड़ी नदी जोड़ो परियोजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य केन नदी के पानी को बेतवा नदी बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड क्षेत्र में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। परियोजना की लागत करीब 44,605 करोड़ रुपये बताई गई है।

विस्थापन और मुआवजा बना मुख्य मुद्दा

परियोजना के तहत प्रभावित परिवारों के विस्थापन और मुआवजे को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि कई प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा और पुनर्वास का लाभ नहीं मिला है। कुछ परिवारों ने मुआवजे की राशि और सर्वे प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई है। इन मुद्दों को लेकर छतरपुर और आसपास के इलाकों में विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं।

वहीं सरकारी पक्ष के अनुसार परियोजना प्रभावित लोगों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की प्रक्रिया नियमों के तहत की जा रही है। केंद्र सरकार से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों में केन-बेतवा लिंक परियोजना के पहले चरण में 1,913 परियोजना प्रभावित परिवारों के विस्थापन का उल्लेख है, जिनमें 648 परिवार अनुसूचित जनजाति से संबंधित बताए गए हैं।

सरकार के आंकड़ों में मुआवजे का भुगतान

सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार जुलाई 2026 तक कृषि भूमि मुआवजे के लिए 10,913 प्रभावित व्यक्तियों के लिए 360.66 करोड़ रुपये के अवार्ड पारित किए गए थे, जिसमें से 320 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका था।

हालांकि, प्रभावित परिवारों और विरोध कर रहे संगठनों की ओर से मुआवजे और पुनर्वास को लेकर अभी भी शिकायतें सामने आ रही हैं। यही वजह है कि परियोजना को लेकर सरकारी आंकड़ों और स्थानीय लोगों के दावों के बीच अंतर का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।

छतरपुर में दोबारा सर्वे की प्रक्रिया

विवाद के बीच प्रशासन की ओर से प्रभावित गांवों में दोबारा सर्वे की प्रक्रिया भी सामने आई है। छतरपुर जिला प्रशासन ने परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वसन और पुनर्व्यवस्थापन से संबंधित आधिकारिक अधिसूचना भी जारी की है। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि सर्वे में छूटे पात्र लोगों को प्रक्रिया के तहत शामिल कर मुआवजा दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।

पर्यावरण को लेकर भी सवाल

केन-बेतवा परियोजना को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव भी लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। परियोजना के तहत पन्ना क्षेत्र में वन और वन्यजीवों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पर्यावरणविदों और स्थानीय संगठनों ने चिंता जताई है। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को ध्यान में रखते हुए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।

राजनीतिक मुद्दा भी बना परियोजना

विस्थापन और मुआवजे को लेकर चल रहे विरोध के बीच यह मुद्दा अब राजनीतिक रूप भी ले चुका है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 19 अगस्त को बुंदेलखंड के परियोजना प्रभावित आदिवासी परिवारों के आंदोलन का समर्थन किया और उचित मुआवजा व पुनर्वास की मांग उठाई।

इस पूरे मामले में फिलहाल इतना स्पष्ट है कि केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास को लेकर विवाद जारी है। सरकार अपने आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर मुआवजा वितरण और पुनर्वास प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात कह रही है, जबकि प्रभावित परिवारों और विरोध कर रहे संगठनों की ओर से अभी भी कई शिकायतें उठाई जा रही हैं। इसलिए इस मामले में दोनों पक्षों के दावों को अलग-अलग रखते हुए खबर करना ही तथ्यात्मक रूप से उचित होगा।