भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: 500 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, 25 अगस्त को होगी सुनवाई

भागीरथपुरा दूषित पानी कांड: 500 से ज्यादा पन्नों की जांच रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, 25 अगस्त को होगी सुनवाई

दूषित पानी की शिकायतों के बाद मचा था हड़कंप, हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित आयोग ने विभागों से दस्तावेज जुटाकर तैयार की विस्तृत रिपोर्ट

इंदौर के भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में जांच आयोग ने 500 से ज्यादा पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में पेश कर दी है। रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा गया है। रिपोर्ट में घटना से जुड़े अलग-अलग पहलुओं, विभागों की भूमिका और जांच के दौरान सामने आए तथ्यों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं हुई है, इसलिए इसके निष्कर्षों और जिम्मेदारी तय करने को लेकर आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी की शिकायत सामने आने के बाद बड़ी संख्या में लोगों की तबीयत बिगड़ गई थी। कई लोगों को उल्टी-दस्त और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं के चलते अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। इस दौरान कई मौतें भी हुईं, जिसके बाद मामला गंभीर रूप से चर्चा में आया। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने पेयजल की गुणवत्ता और क्षेत्र में पानी की सप्लाई व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए थे। लोगों का आरोप था कि इलाके में लंबे समय से पानी की समस्या और गंदे पानी की शिकायतें सामने आती रही थीं।

मामले की गंभीरता को देखते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर एक सदस्यीय जांच आयोग का गठन किया गया था। आयोग ने घटना की परिस्थितियों को समझने के लिए संबंधित विभागों से रिकॉर्ड और दस्तावेज जुटाए। नगर निगम, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और पानी की सप्लाई से जुड़े अधिकारियों से जानकारी ली गई। जांच के दौरान प्रभावित इलाके की स्थिति, पेयजल सप्लाई की व्यवस्था, पाइपलाइन और सीवेज सिस्टम से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की गई।
जांच में स्थानीय लोगों की शिकायतों और बयानों को भी महत्वपूर्ण माना गया। इसके अलावा घटना के दौरान लिए गए पानी के सैंपल, स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट, अस्पतालों में भर्ती मरीजों से जुड़ी जानकारी और प्रशासन द्वारा उठाए गए कदमों से संबंधित दस्तावेजों का अध्ययन किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि आखिर दूषित पानी की स्थिति कैसे बनी और समय रहते इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।

500 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट तैयार होने के बाद अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 25 अगस्त है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान रिपोर्ट को लेकर आगे की प्रक्रिया तय हो सकती है। रिपोर्ट के निष्कर्ष सामने आने के बाद यह तस्वीर साफ होने की उम्मीद है कि दूषित पानी की समस्या के पीछे मुख्य कारण क्या था, किन स्तरों पर लापरवाही या व्यवस्था संबंधी कमी सामने आई और इस पूरे मामले में जिम्मेदारी किसकी बनती है।
फिलहाल जांच रिपोर्ट सीलबंद होने के कारण उसके अंदर दर्ज निष्कर्षों को लेकर कोई अंतिम दावा नहीं किया जा सकता। 25 अगस्त की सुनवाई और उसके बाद रिपोर्ट सार्वजनिक होने की स्थिति में भागीरथपुरा कांड से जुड़े कई महत्वपूर्ण सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं। खासतौर पर प्रभावित परिवारों और स्थानीय लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच में घटना की वजह और जिम्मेदारी को लेकर क्या निष्कर्ष निकाले गए हैं।