बिश्केक में 26वां SCO समिट, PM मोदी ने विश्व नेताओं के साथ लिया हिस्सा
शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन में जुटे सदस्य देशों के शीर्ष नेता, क्षेत्रीय सहयोग और वैश्विक चुनौतियों पर हुई अहम चर्चा
किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अन्य सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं के साथ हिस्सा लिया। सम्मेलन में SCO देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने और क्षेत्रीय एवं वैश्विक स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों को लेकर चर्चा हुई। अलग-अलग देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासनाध्यक्ष इस महत्वपूर्ण बैठक में शामिल हुए, जिससे बिश्केक में आयोजित SCO Summit अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से खास बन गया। शंघाई सहयोग संगठन का मंच सदस्य देशों को सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, व्यापार, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, तकनीक और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर एक साथ चर्चा करने का अवसर देता है। बदलते वैश्विक हालात के बीच इस संगठन की भूमिका भी लगातार महत्वपूर्ण हुई है। ऐसे में बिश्केक में आयोजित 26वें शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग और समन्वय बढ़ाने पर विशेष ध्यान रहा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सम्मेलन में मौजूदगी भारत के लिए भी महत्वपूर्ण रही। भारत SCO का सक्रिय सदस्य है और इस मंच के जरिए मध्य एशियाई देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है। भारत के लिए मध्य एशिया रणनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। SCO के माध्यम से भारत को इन देशों के साथ सीधे संवाद और सहयोग बढ़ाने का अवसर मिलता है। सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहे। SCO का गठन ही क्षेत्रीय सुरक्षा और सदस्य देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुआ था। वर्तमान समय में आतंकवाद, कट्टरपंथ, सीमा सुरक्षा और बदलती वैश्विक परिस्थितियां कई देशों के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में SCO के मंच पर इन मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच समन्वय और साझा रणनीति को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इसके अलावा आर्थिक सहयोग भी SCO की प्राथमिकताओं में शामिल है। सदस्य देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने, परिवहन एवं कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने पर भी लगातार जोर दिया जाता रहा है। भारत के लिए यह पहल खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे मध्य एशिया और अन्य क्षेत्रों के साथ व्यापारिक संपर्क बढ़ाने के नए रास्ते खुल सकते हैं। बिश्केक में विभिन्न देशों के नेताओं की मौजूदगी के दौरान द्विपक्षीय मुलाकातों और अनौपचारिक बातचीत का दौर भी देखने को मिला। अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान ऐसी मुलाकातें कई बार औपचारिक बैठकों से आगे जाकर आपसी संबंधों को मजबूत करने का माध्यम बनती हैं। नेताओं के बीच व्यापार, निवेश, सुरक्षा, ऊर्जा और क्षेत्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भागीदारी को भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ और मध्य एशिया के साथ मजबूत होते संबंधों के व्यापक संदर्भ में भी देखा जा रहा है। भारत लंबे समय से मध्य एशियाई देशों के साथ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी में बदलने की कोशिश करता रहा है। SCO इस प्रक्रिया के लिए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच उपलब्ध कराता है। SCO में भारत के साथ चीन, रूस, पाकिस्तान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और ईरान समेत कई देश शामिल हैं। संगठन के मंच पर इन देशों के बीच संवाद का अपना रणनीतिक महत्व है। अलग-अलग देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद होने के बावजूद SCO एक ऐसा मंच उपलब्ध कराता है, जहां सदस्य देश साझा हितों वाले विषयों पर बातचीत कर सकते हैं।
बिश्केक में आयोजित 26वें SCO Summit की तस्वीरों और वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अन्य विश्व नेताओं के साथ नजर आए। सम्मेलन ने एक बार फिर यह दिखाया कि बहुपक्षीय कूटनीति में SCO की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण बनी हुई है। भारत भी इस मंच के जरिए अपने रणनीतिक हितों को आगे बढ़ाने के साथ सदस्य देशों के साथ सहयोग को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में जब सुरक्षा, व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी से जुड़े मुद्दे तेजी से बदल रहे हैं, ऐसे में SCO जैसे क्षेत्रीय संगठनों की भूमिका और बढ़ जाती है। बिश्केक में हुई यह बैठक भी सदस्य देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने और साझा चुनौतियों पर मिलकर काम करने की दिशा में एक अहम मंच रही।
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