MP Traffic Rule: बिना इंश्योरेंस वाहन चलाना पड़ेगा भारी, पेट्रोल-डीजल पर भी लग सकती है रोक; 61 लाख वाहन रडार पर
मध्य प्रदेश में बिना वैध इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों पर सरकार अब सख्ती की तैयारी में है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत पेट्रोल पंपों पर नंबर प्लेट स्कैन कर वाहन के इंश्योरेंस की वैधता जांची जा सकती है। इंश्योरेंस नहीं होने पर पेट्रोल-डीजल देने से इनकार किया जा सकता है।
भोपाल। मध्य प्रदेश में वाहन चालकों के लिए आने वाले दिनों में ट्रैफिक नियमों को लेकर बड़ी व्यवस्था लागू हो सकती है। बिना वैध मोटर इंश्योरेंस के सड़क पर दौड़ रहे वाहनों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। सरकार ऐसे वाहनों की पहचान के लिए तकनीक का इस्तेमाल करने की योजना बना रही है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत पेट्रोल पंप पर ही वाहन के इंश्योरेंस की जांच की जा सकेगी।
अगर वाहन का इंश्योरेंस वैध नहीं पाया गया तो उसे पेट्रोल या डीजल देने से रोका जा सकता है। हालांकि, यह व्यवस्था अभी प्रस्तावित और पायलट प्रोजेक्ट के स्तर पर है। इसे पहले उन जिलों में लागू करने पर विचार किया जा रहा है, जहां बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या ज्यादा है। पायलट प्रोजेक्ट के परिणाम के आधार पर इसे पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
पेट्रोल पंप पर नंबर प्लेट स्कैन होगी
प्रस्तावित व्यवस्था में पेट्रोल पंपों पर Automatic Number Plate Recognition यानी ANPR कैमरे लगाए जाने की योजना है। ये कैमरे पेट्रोल पंप पर आने वाले वाहनों की नंबर प्लेट को स्कैन करेंगे।
नंबर प्लेट स्कैन होने के बाद वाहन से जुड़ी जानकारी डिजिटल सिस्टम के माध्यम से जांची जा सकेगी। इसके लिए सिस्टम को केंद्र सरकार के VAHAN पोर्टल से जोड़ने की योजना है। वाहन का इंश्योरेंस वैध होने पर ईंधन देने की प्रक्रिया सामान्य रूप से हो सकेगी, जबकि इंश्योरेंस की अवधि समाप्त होने पर ईंधन देने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या कम करना और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
MP में करीब 61 लाख वाहन बिना वैध इंश्योरेंस के
आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में करीब 1.75 करोड़ वाहन पंजीकृत हैं। इनमें लगभग 35 प्रतिशत यानी करीब 61 लाख वाहन ऐसे बताए जा रहे हैं, जिनके पास वैध इंश्योरेंस नहीं है।
इतनी बड़ी संख्या में बिना वैध बीमा वाले वाहनों के सड़क पर चलने को सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना जा रहा है। इसी वजह से सरकार अब केवल चालान या जांच अभियान तक सीमित रहने के बजाय तकनीक के जरिए ऐसे वाहनों की पहचान करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
पायलट प्रोजेक्ट के बाद पूरे प्रदेश में लागू हो सकती है व्यवस्था
सरकार की योजना के मुताबिक पहले ऐसे चुनिंदा जिलों में व्यवस्था को आजमाया जाएगा, जहां बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की संख्या अधिक है। पायलट प्रोजेक्ट के दौरान तकनीकी व्यवस्था, नंबर प्लेट स्कैनिंग और इंश्योरेंस डेटा की जांच की प्रक्रिया को परखा जाएगा।
अगर यह व्यवस्था सफल रहती है तो भविष्य में इसे मध्य प्रदेश के दूसरे जिलों और फिर पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।
सड़क सुरक्षा को लेकर हुई बैठक में चर्चा
भोपाल में सोमवार को Supreme Court Committee on Road Safety के अध्यक्ष जस्टिस (सेवानिवृत्त) अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा से जुड़ी बैठक हुई। इसी बैठक में बिना वैध इंश्योरेंस वाले वाहनों पर प्रभावी तरीके से कार्रवाई करने और प्रस्तावित ईंधन व्यवस्था पर चर्चा हुई।
बैठक में वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट से जुड़ा मामला भी सामने आया। एक ऑटोमेटिक फिटनेस सेंटर में तकनीकी सिस्टम के जरिए वाहन की फिटनेस पास दिखाए जाने की शिकायत पर भी चर्चा हुई। मामले को लेकर समिति की ओर से नाराजगी जताई गई और फिटनेस जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए।
वाहन मालिकों के लिए जरूरी है इंश्योरेंस अपडेट रखना
अगर यह व्यवस्था लागू होती है तो वाहन मालिकों के लिए अपने वाहन का इंश्योरेंस समय पर रिन्यू कराना और उसकी वैधता बनाए रखना बेहद जरूरी हो जाएगा। अभी प्रस्तावित व्यवस्था का फोकस पेट्रोल पंपों के जरिए बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान करने पर है।
हालांकि, वाहन चालकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाहन चलाना पहले से ही कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। नई तकनीकी व्यवस्था का उद्देश्य नियमों के पालन को और प्रभावी बनाना है।
क्या होगा आगे?
फिलहाल सरकार की ओर से इस व्यवस्था को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी की जा रही है। पहले पायलट प्रोजेक्ट के जरिए इसकी व्यवहारिकता और तकनीकी व्यवस्था की जांच होगी। इसके बाद समीक्षा के आधार पर पूरे प्रदेश में लागू करने को लेकर फैसला लिया जा सकता है।
यानी आने वाले समय में मध्य प्रदेश में वाहन की नंबर प्लेट ही उसके इंश्योरेंस स्टेटस की जांच का जरिया बन सकती है। अगर प्रस्ताव लागू होता है, तो बिना इंश्योरेंस वाहन चलाने वालों के लिए नियमों की अनदेखी करना पहले की तुलना में काफी मुश्किल हो जाएगा।
news desk MPcg