अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, शादी समारोह पर हमले में 5 की मौत; 50 से ज्यादा घायल

अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर, शादी समारोह पर हमले में 5 की मौत; 50 से ज्यादा घायल

दक्षिणी ईरान में अमेरिकी हमले को लेकर ईरान का बड़ा दावा, खुजस्तान में भी 7 लोगों की मौत; जवाब में जॉर्डन और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव एक बार फिर गंभीर स्थिति में पहुंच गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर हमले किए हैं। अमेरिकी सेना के मुताबिक, कार्रवाई में ईरान की एयर डिफेंस साइट्स, रडार सिस्टम, समुद्री ठिकानों, समुद्र में माइन बिछाने की क्षमता और कम्युनिकेशन साइट्स को निशाना बनाया गया। इन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।

ईरान की ओर से दावा किया गया है कि दक्षिणी ईरान के सिरिक इलाके में एक शादी समारोह के दौरान अमेरिकी हमला हुआ। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में कम से कम 5 लोगों की मौत हुई, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। हमले के बाद सामने आए वीडियो और तस्वीरों में अस्पताल में घायल लोगों का इलाज होते हुए दिखाई दे रहा है। इनमें बच्चों के घायल होने की बात भी सामने आई है। हालांकि, हमले से जुड़ी सभी जानकारियों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इसके अलावा ईरान के खुजस्तान प्रांत में भी अमेरिकी हमले से भारी नुकसान की जानकारी सामने आई है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, यहां हुए हमले में 7 लोगों की मौत और 8 लोग घायल हुए हैं। लगातार हो रहे हमलों के बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है।

ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इससे मध्य-पूर्व में संघर्ष के और फैलने की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका के सहयोगी देशों में भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सतर्कता बढ़ाई गई है। इस पूरे घटनाक्रम का असर क्षेत्र की सुरक्षा के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है, खासकर होर्मुज स्ट्रेट को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ समझौते की जरूरत से इनकार किया है। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर लगभग पूरा नियंत्रण है और ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव में है। दोनों पक्षों के बीच लगातार हमलों और कड़े बयानों के कारण अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि यह संघर्ष आगे कितना बढ़ता है और क्या इसे रोकने के लिए कोई कूटनीतिक पहल होती है।