भारत की 7.8% GDP ग्रोथ ने चौंकाया, लेकिन आगे की राह आसान नहीं; संजीव सान्याल ने बताईं 3 बड़ी चुनौतियां
भारत की पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 7.8% रही है, जो उम्मीद से बेहतर है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने इसे मजबूत प्रदर्शन बताया। हालांकि, उनका कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में इतनी तेज ग्रोथ को लंबे समय तक बनाए रखना आसान नहीं होगा। अगर आने वाली तिमाहियों में GDP ग्रोथ करीब 7% भी रहती है तो यह संतोषजनक होगी। उन्होंने कहा कि मौजूदा ग्रोथ कई सेक्टर से आ रही है और सिर्फ किसी एक क्षेत्र पर निर्भर नहीं है।
ग्लोबल अनिश्चितता और तेल की कीमतें बड़ी चुनौती
संजीव सान्याल ने वैश्विक अनिश्चितता को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बताया। पश्चिम एशिया में तनाव, ग्लोबल ट्रेड में रुकावट और टैरिफ को लेकर अनिश्चितता का असर भारत पर पड़ सकता है। पश्चिम एशिया भारत के लिए महत्वपूर्ण एक्सपोर्ट मार्केट है और यहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। इस क्षेत्र से आने वाली रेमिटेंस भी अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी अहम हैं, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। भारत ने रूस, अमेरिका और वेनेजुएला समेत कई देशों से तेल आयात कर सप्लाई सोर्स को अलग-अलग किया है।
अल नीनो और मानसून पर भी नजर
सान्याल ने अल नीनो को भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक संभावित जोखिम बताया। इसका असर मानसून और कृषि क्षेत्र पर पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि फिलहाल इसके प्रभाव की तुलना यूरोप के कुछ हिस्सों में देखे गए गंभीर सूखे से नहीं की जा सकती। बेरोजगारी और महंगाई को लेकर उन्होंने कहा कि सरकारी आंकड़े गांव और शहर दोनों जगह बेरोजगारी दर में धीरे-धीरे कमी का संकेत देते हैं। हालांकि, पढ़े-लिखे युवाओं में बेरोजगारी अभी भी चिंता का विषय है। महंगाई मौजूदा समय में 4 से 5% के आसपास है, जो करीब एक दशक पहले के 8 से 12% के स्तर से कम है।
नई GDP मेथडोलॉजी का किया बचाव
संजीव सान्याल ने GDP की नई गणना पद्धति और बेस ईयर में बदलाव का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान आर्थिक गतिविधियां सामान्य नहीं थीं, इसलिए उस समय बेस ईयर को अपडेट करना मुश्किल था। 2024 में अर्थव्यवस्था सामान्य स्थिति में लौटने के बाद बेस ईयर को अपडेट किया गया। उन्होंने कहा कि मजबूत GDP आंकड़ों की झलक कॉरपोरेट मुनाफे, कारों की रिकॉर्ड बिक्री और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स की खरीद में भी दिखाई देती है। हालांकि, आने वाली तिमाहियों में GDP ग्रोथ की रफ्तार कुछ कम हो सकती है। इसके बावजूद कई सेक्टर से मिल रही ग्रोथ भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकती है।
news desk MPcg