नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, 7 दिन में 1127 मौतें; 4600 लोग अब भी लापता

नेपाल में फिर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा, 7 दिन में 1127 मौतें; 4600 लोग अब भी लापता

पहाड़ी इलाकों में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदियों का रास्ता ब्लॉक होने की आशंका, अचानक पानी आने का खतरा बढ़ा; एक लड़की ने आपदा में 17 रिश्तेदारों को खोया

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। आपदा के सात दिन बाद भी कई इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 1127 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि करीब 4600 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें लगभग 500 विदेशी नागरिक शामिल हैं। कई इलाकों में संपर्क व्यवस्था प्रभावित होने और सड़कें क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत टीमों को प्रभावित लोगों तक पहुंचने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

बाढ़ की पहली तबाही से उबरने की कोशिश कर रहे नेपाल के सामने अब दोबारा बाढ़ आने का खतरा खड़ा हो गया है। विशेषज्ञों ने पहाड़ी क्षेत्रों की स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक, ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फ और चट्टानों के खिसकने से नदियों का प्राकृतिक रास्ता अवरुद्ध हो सकता है। अगर इस तरह बने अवरोध के पीछे पानी जमा होता रहा और अचानक वह टूट गया, तो नीचे की ओर बेहद तेज गति से पानी पहुंच सकता है। इससे पहले से बाढ़ प्रभावित इलाकों में हालात और गंभीर होने की आशंका है। आपदा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बड़ी संख्या में परिवार अपने लोगों से बिछड़ गए हैं। एक नेपाली लड़की ने बताया कि उसने इस त्रासदी में अपने परिवार के 17 रिश्तेदारों को खो दिया। ऐसी कई दर्दनाक कहानियां प्रभावित इलाकों से सामने आ रही हैं, जहां लोगों ने कुछ ही घंटों में अपने घर, सामान और परिवार के सदस्यों को खो दिया।

बाढ़ से प्रभावित बिदुर समेत कई इलाकों में लोगों को अभी भी राहत शिविरों में रहना पड़ रहा है। जिन घरों में पानी और मलबा घुस गया है, वहां रहने लायक स्थिति नहीं बची है। कई परिवारों के सामने भोजन, पीने के साफ पानी, दवाइयों और सुरक्षित रहने की जगह की समस्या बनी हुई है। प्रशासन और राहत एजेंसियां प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान पहुंचाने में जुटी हैं। वहीं, लापता लोगों की तलाश के लिए बचाव दल लगातार अभियान चला रहे हैं। कई स्थानों पर मलबे और बाढ़ के पानी के बीच तलाशी अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारत में भी नेपाल आपदा से जुड़े 9 शव बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। लापता लोगों की बड़ी संख्या को देखते हुए आने वाले दिनों में राहत और खोज अभियान और तेज किए जाने की उम्मीद है।

नेपाल के लिए सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि अगर पहाड़ी क्षेत्रों में चट्टानों और बर्फ के कारण कहीं नदी का प्रवाह बाधित हुआ, तो अचानक आने वाला पानी पहले से कमजोर हो चुके इलाकों में नई तबाही ला सकता है। ऐसे में प्रशासन की ओर से संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। प्रभावित लोगों के लिए राहत पहुंचाने के साथ-साथ संभावित नए खतरे से निपटने की तैयारी भी की जा रही है। फिलहाल नेपाल में हजारों परिवार इस उम्मीद में हैं कि लापता उनके अपने लोग सुरक्षित मिल जाएं। लेकिन एक सप्ताह बाद भी बड़ी संख्या में लोगों का पता नहीं चल पाने से चिंता लगातार बढ़ रही है। प्राकृतिक आपदा के बाद अब संभावित दूसरी बाढ़ का खतरा राहत कार्यों के लिए नई चुनौती बन गया है।