विदिशा में कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू, 2030 तक 20 लाख नए मामलों का अनुमान; अब बड़े शहरों की दौड़ होगी कम

विदिशा में कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू, 2030 तक 20 लाख नए मामलों का अनुमान; अब बड़े शहरों की दौड़ होगी कम

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने जताई चिंता, बोले- 2030 तक हर साल 20 लाख नए कैंसर मामले सामने आ सकते हैं

विदिशा में कैंसर मरीजों के इलाज के लिए बड़ी स्वास्थ्य सुविधा की शुरुआत हुई है। अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय में कैंसर डे-केयर सेंटर शुरू किया गया है। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सेंटर के शुभारंभ के दौरान देश में बढ़ते कैंसर के मामलों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मौजूदा रुझानों को देखते हुए वर्ष 2030 तक भारत में हर साल करीब 20 लाख नए कैंसर मामले सामने आने का अनुमान है।

विदिशा में स्थानीय स्तर पर मिलेगा इलाज

नए डे-केयर सेंटर का सबसे बड़ा फायदा विदिशा और आसपास के जिलों के मरीजों को मिलने की उम्मीद है। यहां मरीजों को विशेषज्ञों की निगरानी में कीमोथेरेपी और जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे बार-बार भोपाल, इंदौर या दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों की यात्रा करने की जरूरत कम होगी। केंद्र सरकार के मुताबिक, इस पहल का उद्देश्य कैंसर की विशेषज्ञ सुविधाओं को बड़े महानगरों तक सीमित रखने के बजाय मरीजों के घर के नजदीक पहुंचाना है।

जून के कैंसर जांच शिविर में सामने आए चौंकाने वाले आंकड़े

विदिशा में कैंसर के खतरे को समझने के लिए जून 2026 में बड़े स्तर पर स्क्रीनिंग और जागरूकता अभियान चलाया गया था। आधिकारिक जानकारी के अनुसार इस दौरान करीब 3 हजार लोगों की जांच की गई। सरकारी विवरण में 586 लोगों में कैंसर की पुष्टि और 254 लोगों को संदिग्ध पाए जाने की जानकारी दी गई है। इन मरीजों के लिए आगे जांच, इलाज और जरूरत के मुताबिक रेफरल की व्यवस्था की गई।

टाटा मेमोरियल सेंटर और एम्स भोपाल का सहयोग

विदिशा में शुरू की गई सुविधा को टाटा मेमोरियल सेंटर के तकनीकी सहयोग से विकसित किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज और एम्स भोपाल के बीच भी सहयोग की व्यवस्था की गई है। केंद्र को आगे चरणबद्ध तरीके से मजबूत करने की योजना है, जिसमें प्रशिक्षित डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ, बेहतर डायग्नोस्टिक सुविधाएं, पैथोलॉजी, कैंसर रजिस्ट्री और पेलिएटिव केयर जैसी सेवाओं को शामिल किया जाएगा।

दो डॉक्टर और सात नर्सिंग स्टाफ को दिया गया प्रशिक्षण

डे-केयर सेंटर के संचालन के लिए चिकित्सा और नर्सिंग टीम को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक दो डॉक्टरों और सात नर्सिंग स्टाफ को कैंसर उपचार से जुड़ी विशेष ट्रेनिंग दी गई है। इसका उद्देश्य मरीजों को स्थानीय स्तर पर सुरक्षित और विशेषज्ञ निगरानी में उपचार उपलब्ध कराना है। इससे उन मरीजों को विशेष राहत मिल सकती है जिन्हें नियमित अंतराल पर कीमोथेरेपी के लिए दूसरे शहरों की यात्रा करनी पड़ती है।

विदिशा में आगे बनेगा पूरा कैंसर अस्पताल

कैंसर डे-केयर सेंटर को अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि बड़े कैंसर उपचार केंद्र की दिशा में पहला चरण बताया गया है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विदिशा में भविष्य में पूर्ण कैंसर अस्पताल विकसित करने की दिशा में काम करने की बात कही है। इसके लिए भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया भी शुरू होने की जानकारी सामने आई है। योजना के तहत आगे रेडियोथेरेपी समेत आधुनिक उपचार सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

रेडियोथेरेपी और LINAC सुविधा की भी तैयारी

केंद्र सरकार के अनुसार विदिशा की कैंसर उपचार योजना में रेडियोथेरेपी को भी शामिल किया जा रहा है। मेडिकल कॉलेज में रेडियोथेरेपी सुविधा विकसित करने की योजना है और अगले दो से तीन वर्षों में LINAC यानी Linear Accelerator सुविधा शुरू किए जाने की उम्मीद जताई गई है। इससे आसपास के मरीजों को उन्नत रेडिएशन उपचार के लिए दूसरे शहरों पर निर्भरता कम हो सकती है।

कैंसर के साथ जागरूकता और जीवनशैली पर भी जोर

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कैंसर से निपटने के लिए सिर्फ अस्पताल और इलाज की सुविधाएं बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। शुरुआती पहचान, नियमित जांच, सही चिकित्सा सलाह और जागरूकता भी जरूरी है। उन्होंने खाद्य पदार्थों में मिलावट जैसी कुप्रथाओं पर रोक लगाने के लिए समाज की भागीदारी की जरूरत बताई। वहीं शिवराज सिंह चौहान ने स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और नशे से दूर रहने पर जोर दिया।

मरीजों और परिवारों का खर्च और समय दोनों बचेंगे

कैंसर का इलाज अक्सर लंबा चलता है और कई मरीजों को बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है। ऐसे में दूसरे शहरों की यात्रा का खर्च, रहने की व्यवस्था और काम से छुट्टी जैसी परेशानियां परिवार पर अतिरिक्त बोझ डालती हैं। विदिशा में डे-केयर मॉडल शुरू होने से स्थानीय मरीजों को अपने जिले के भीतर ही उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद है। गंभीर मामलों में जरूरत के अनुसार उन्हें उच्च चिकित्सा केंद्रों पर रेफर किया जा सकेगा।

विदिशा में बनेगा कैंसर डेटा सेंटर और रजिस्ट्री

कैंसर की स्थिति को बेहतर तरीके से समझने के लिए स्थानीय स्तर पर कैंसर रजिस्ट्री और डेटा सेंटर विकसित करने की योजना भी सामने आई है। इसके जरिए क्षेत्र में कैंसर के मामलों, बीमारी के प्रकार और उपचार से जुड़ी जानकारी को व्यवस्थित रूप से दर्ज किया जा सकेगा। इससे भविष्य में स्थानीय स्तर पर कैंसर नियंत्रण और स्क्रीनिंग की रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है।

बड़े शहरों से बाहर कैंसर सुविधाएं पहुंचाने पर फोकस

केंद्र सरकार के मुताबिक टाटा मेमोरियल सेंटर देश के अलग-अलग हिस्सों में कैंसर देखभाल का नेटवर्क मजबूत कर रहा है। इसका उद्देश्य उपचार के साथ-साथ रोकथाम, शुरुआती पहचान, जांच, रेडिएशन और डॉक्टरों के प्रशिक्षण जैसी सुविधाओं का विस्तार करना है। राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते कैंसर बोझ को देखते हुए विदिशा जैसे शहरों में सुविधाओं का विस्तार मरीजों के लिए अहम माना जा रहा है।

विदिशा में शुरू हुआ यह डे-केयर सेंटर फिलहाल कैंसर मरीजों के लिए स्थानीय स्तर पर कीमोथेरेपी और विशेषज्ञ सेवाओं की शुरुआत है। आने वाले चरणों में रेडियोथेरेपी, डायग्नोस्टिक सुविधाओं और पूर्ण कैंसर अस्पताल की दिशा में काम आगे बढ़ने की योजना है। अगर यह विस्तार तय समय में पूरा होता है, तो विदिशा के साथ रायसेन, सीहोर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को भी इसका सीधा लाभ मिल सकता है।