रामटेक में संस्कृत सप्ताह का अनोखा आगाज: संस्कृतमय ‘कः भवति बृहस्पतिः?’ ने विद्यार्थियों में भरा उत्साह 

रामटेक में संस्कृत सप्ताह का अनोखा आगाज: संस्कृतमय ‘कः भवति बृहस्पतिः?’ ने विद्यार्थियों में भरा उत्साह 

KBC की तर्ज पर संस्कृत में हुई अनोखी ज्ञान प्रतियोगिता

रामटेक: संस्कृत सप्ताह के अवसर पर भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र की ओर से विद्यार्थियों के लिए एक अनूठी ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की संकल्पना पर आधारित इस प्रतियोगिता का संस्कृत रूप ‘कः भवति बृहस्पतिः?’ रखा गया। 1 से 4 सितंबर तक डॉ. तोतड़े सभागृह में आयोजित इस प्रतियोगिता में पूरा संवाद, प्रश्नोत्तर और मंच संचालन संस्कृत भाषा में हुआ।

कालिदास संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस अभिनव कार्यक्रम में संस्कृत को केवल पारंपरिक विषय के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय उसे आधुनिक और मनोरंजक प्रस्तुति शैली से जोड़ा गया। प्रतियोगिता में विद्यालय, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर के विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया।

विद्यालय से विश्वविद्यालय स्तर तक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

‘कः भवति बृहस्पतिः?’ प्रतियोगिता का आयोजन अलग-अलग स्तरों पर किया गया। इसमें नागपुर और रामटेक क्षेत्र के विभिन्न विद्यालयों एवं महाविद्यालयों के विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया। तीनों स्तरों पर विद्यार्थियों की भागीदारी और उत्साह देखने को मिला।

प्रतियोगिता में संस्कृत भाषा से जुड़े प्रश्नों के साथ-साथ भारतीय धर्म-दर्शन, संस्कृति, विभिन्न शास्त्रों, लौकिक विषयों और सामान्य ज्ञान को भी शामिल किया गया। इस तरह विद्यार्थियों के ज्ञान का मूल्यांकन केवल संस्कृत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्हें व्यापक विषयों से जुड़े प्रश्नों का सामना करना पड़ा।

‘बृहस्पति’ नाम के पीछे भी है खास विचार

इस प्रतियोगिता की संकल्पना भारतीय धर्म-दर्शन और संस्कृति संकाय की अधिष्ठाता प्रो. कलापिनी अगस्ती की पहल से साकार हुई। भारतीय परंपरा में बृहस्पति को ज्ञान और बुद्धि के देवता के रूप में माना जाता है। उन्हें ‘सकलज्ञानराशि’ के रूप में भी संबोधित किया जाता है।

इसी अवधारणा को ध्यान में रखते हुए संस्कृत विश्वविद्यालय में ज्ञान की श्रेष्ठता को केंद्र में रखकर प्रतियोगिता का नाम ‘कः भवति बृहस्पतिः?’ रखा गया। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल पुरस्कार जीतना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में ज्ञान के प्रति रुचि और जिज्ञासा पैदा करना रहा।

धनराशि से ज्यादा ज्ञान को दिया गया महत्व

प्रतियोगिता की सबसे खास बात यह रही कि इसमें धनराशि को केंद्र में रखने के बजाय ज्ञान को प्राथमिकता दी गई। विभिन्न विषयों से जुड़े प्रश्नों का सही उत्तर देकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले संस्कृत विद्यार्थियों को ‘बृहस्पति’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।

आयोजकों ने प्रतियोगिता के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश देने का प्रयास किया कि ज्ञान स्वयं में सबसे बड़ा पुरस्कार है। संस्कृत भाषा को आधुनिक प्रतियोगिता के प्रारूप में प्रस्तुत करने से विद्यार्थियों के लिए सीखने का अनुभव भी मनोरंजक और रोचक बन गया।

अमिताभ बच्चन के अंदाज में नजर आए डॉ. सुमित कठाळे

डॉ. तोतड़े सभागृह में प्रतियोगिता के लिए विशेष मंच तैयार किया गया था। आकर्षक प्रकाश व्यवस्था, प्रतिभागियों के लिए विशेष बैठक व्यवस्था और KBC शैली की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को अलग पहचान दी।

कार्यक्रम में डॉ. सुमित कठाळे ने अमिताभ बच्चन की भूमिका के अंदाज में प्रतियोगिता का संचालन किया। हालांकि उनकी वेशभूषा पूरी तरह भारतीय रही। उन्होंने धोती, कुर्ता और पुणेरी पगड़ी पहनकर मंच संभाला। सबसे खास बात यह रही कि प्रतियोगिता के दौरान पूरा संवाद संस्कृत भाषा में किया गया।

10 समूहों के बीच हुआ ज्ञान का मुकाबला

प्रतियोगिता के लिए कुल 10 समूहों का चयन किया गया। प्रत्येक समूह में दो विद्यार्थी शामिल थे। प्रारंभिक परीक्षा के बाद चयनित समूहों को मुख्य मंच पर बुलाया जाता था, जहां KBC की शैली में प्रश्नोत्तर का दौर शुरू होता था।

खेल शुरू होने से पहले प्रतिभागियों को प्रतियोगिता के नियमों और तीन जीवन-रेखाओं के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद विद्यार्थियों के सामने एक के बाद एक प्रश्न रखे गए और उन्हें उपलब्ध विकल्पों में से सही उत्तर चुनना था।

संस्कृत संवाद ने बढ़ाया रोमांच

कार्यक्रम की प्रस्तुति को जीवंत बनाने में डॉ. सुमित कठाळे के संवाद और संचालन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने संस्कृत भाषा का प्रयोग करते हुए विद्यार्थियों के बीच सहज माहौल बनाया। उनके चुटीले संवाद और शब्द-विनोद से प्रतियोगी दबाव से बाहर आए और पूरे कार्यक्रम में मनोरंजन का माहौल बना रहा।

कभी आसान तो कभी दुविधा में डालने वाले प्रश्नों ने प्रतियोगिता का रोमांच बढ़ाया। KBC शैली के पार्श्वसंगीत और तकनीकी प्रभावों ने मंच को और आकर्षक बना दिया। जीवन-रेखाओं के उपयोग ने भी प्रतियोगिता में उत्सुकता बनाए रखी।

विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ दिए जवाब

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने कई कठिन और रोचक प्रश्नों का आत्मविश्वास के साथ सामना किया। किसी प्रश्न के उत्तर को लेकर संशय होने पर प्रतिभागियों ने जीवन-रेखाओं का सहारा लिया।

कई मौकों पर विद्यार्थियों ने अपने शिक्षकों से भी सहायता ली। जीवन-रेखा के रूप में शिक्षकों की मदद लेने की व्यवस्था ने प्रतियोगिता को विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच संवाद का अवसर भी दिया। शिक्षकों ने भी उत्साहपूर्वक विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया।

सभागृह में गूंजती रही विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण प्रतिक्रिया

प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सही उत्तर मिलने पर सभागृह तालियों और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रियाओं से गूंज उठता था। प्राध्यापक भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए प्रतियोगिता का हिस्सा बने रहे।

आयोजकों के अनुसार विद्यार्थियों की इस उत्स्फूर्त भागीदारी ने कार्यक्रम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्कृत भाषा में आयोजित होने के बावजूद विद्यार्थियों ने प्रतियोगिता को लेकर किसी तरह की झिझक नहीं दिखाई।

कम संसाधनों में साकार हुई अभिनव संकल्पना

‘कः भवति बृहस्पतिः?’ प्रतियोगिता को कल्पनाशीलता, सृजनात्मकता और कार्यकुशलता का उदाहरण बताया गया। उपलब्ध संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल करते हुए KBC जैसे बड़े टेलीविजन कार्यक्रम की अवधारणा को संस्कृत भाषा और भारतीय परंपरा से जोड़ा गया।

आयोजकों का मानना है कि संस्कृत और आधुनिक प्रस्तुति शैली का यह मेल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणादायक साबित हुआ। इससे यह भी सामने आया कि नई सोच और रचनात्मक प्रयासों के जरिए पारंपरिक विषयों को युवाओं के बीच आकर्षक तरीके से प्रस्तुत किया जा सकता है।

विद्यालय स्तर पर इन विद्यार्थियों ने हासिल किए स्थान

विद्यालय स्तर की प्रतियोगिता में भवन्स एनटीपीसी, मौदा की सारा सहारे और योहांस कांबळे की जोड़ी ने प्रथम स्थान हासिल किया। सोमवार हाईस्कूल, निखिलस की मीरा कुलकर्णी और अभिजात त्रिफळे की जोड़ी दूसरे स्थान पर रही।

रिलायंस फाउंडेशन स्कूल, मौदा के रोहित दत्ता और कृषद धावडे ने तीसरा स्थान प्राप्त किया। विद्यालय स्तर के विजेताओं को कार्यक्रम के दौरान पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर के विजेता

महाविद्यालय स्तर पर एल.ए.डी. महाविद्यालय, नागपुर की गौरी नाईक और आसावरी वानखेडे की जोड़ी ने प्रथम स्थान हासिल किया।

विश्वविद्यालय स्तर पर विश्वजीत श्रोते और धनश्री शर्मा ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। सभी विजेताओं को संबंधित स्तर पर पुरस्कार प्रदान किए गए। इसके अलावा प्रतियोगिता में भाग लेने वाले सभी विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

विजेताओं को मान्यवरों के हाथों मिला सम्मान

प्रत्येक स्तर पर विजेताओं को प्रो. कविता होले, अधिष्ठाता, संस्कृत तथा संस्कृतेतर भाषा संकाय और अन्य मान्यवरों के शुभहस्ते पुरस्कार प्रदान किए गए। प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र भी दिए गए।

कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र के सह-समन्वयक प्रो. हरेकृष्ण अगस्ती और डॉ. रेणुका बोकारे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उनकी मौजूदगी ने कार्यक्रम को शैक्षणिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और महत्वपूर्ण बनाया।

तकनीकी टीम और आयोजकों के सहयोग से सफल हुआ आयोजन

कार्यक्रम के सफल संचालन में तकनीकी टीम का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा। आदित्य शुक्ला, पवन कळंबे और ब्रिजेश सोमकुवर ने तकनीकी विभाग की ओर से आवश्यक सहयोग प्रदान किया।

आयोजकों ने सभी विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, तकनीकी टीम और कार्यक्रम से जुड़े सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया। विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी को कार्यक्रम की सबसे बड़ी सफलता माना गया।

संस्कृत सप्ताह में नई ऊर्जा का संचार

‘कः भवति बृहस्पतिः?’ ने संस्कृत सप्ताह के आयोजन को एक अलग और आधुनिक स्वरूप दिया। संस्कृत भाषा, भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक प्रतियोगिता प्रारूप के इस संगम ने विद्यार्थियों को सीखने के साथ मनोरंजन का भी अवसर दिया।

इस आयोजन ने यह संदेश दिया कि संस्कृत को केवल पुस्तकों और पारंपरिक अध्ययन तक सीमित रखने के बजाय रचनात्मक और आधुनिक तरीकों से नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है। रामटेक में आयोजित यह प्रतियोगिता संस्कृत सप्ताह के दौरान विद्यार्थियों के लिए ज्ञान, मनोरंजन और भारतीय परंपरा का अनोखा संगम बनकर सामने आई