चुरहट में इलाज की व्यवस्था पर सवाल, 6 साल के बैगा बच्चे की रीवा ले जाते समय मौत; ऑक्सीजन न मिलने का आरोप
सांस लेने में तकलीफ के बाद चुरहट अस्पताल पहुंचा था मासूम
सीधी जिले के चुरहट क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कैमोर पहाड़ क्षेत्र से इलाज के लिए लाए गए 6 वर्षीय आदिवासी बैगा बालक की रीवा ले जाते समय मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि बच्चे को सांस लेने में गंभीर परेशानी थी, लेकिन चुरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में समय पर पर्याप्त ऑक्सीजन सुविधा नहीं मिल सकी। इसके बाद जब बच्चे को रीवा रेफर किया गया, तब रास्ते में उसकी हालत और बिगड़ गई।
अचानक बिगड़ी तबीयत, मां बच्चे को लेकर अस्पताल पहुंची
जानकारी के अनुसार गुरुवार दोपहर बच्चे की तबीयत अचानक खराब हुई। उसे सांस लेने में परेशानी होने लगी, जिसके बाद उसकी मां उसे लेकर चुरहट सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची। अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चे की स्थिति देखी और प्राथमिक उपचार किया। हालत गंभीर होने पर उसे संजय गांधी अस्पताल, रीवा रेफर करने का निर्णय लिया गया। लेकिन परिजनों का कहना है कि रेफर की प्रक्रिया पूरी होने और बच्चे को आगे ले जाने की तैयारी में काफी समय लग गया।
अस्पताल में ऑक्सीजन थी, लेकिन मास्क नहीं मिलने का आरोप
परिजनों ने अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में ऑक्सीजन उपलब्ध होने के बावजूद बच्चे को ऑक्सीजन देने के लिए जरूरी मास्क नहीं मिल सका। बच्चे को सांस लेने में तकलीफ बढ़ रही थी और इसी दौरान अस्पताल में ऑक्सीजन मास्क तलाशने की कोशिश की गई। परिजनों के मुताबिक रेफर की प्रक्रिया में 40 मिनट से ज्यादा का समय बीत गया। इस दौरान बच्चे को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट नहीं मिल पाने का आरोप है।
मशीन से ऑक्सीजन देने की कोशिश, फिर 108 एंबुलेंस का इंतजार
परिजनों के मुताबिक बच्चे को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए मशीन से सीधे सप्लाई देने का प्रयास किया गया। इसके बाद बच्चे को रीवा ले जाने के लिए 108 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। परिवार का आरोप है कि एंबुलेंस में भी पर्याप्त ऑक्सीजन की व्यवस्था नहीं थी। गंभीर स्थिति में बच्चे को चुरहट से रीवा ले जाया गया, लेकिन उसकी हालत लगातार बिगड़ती रही।
सीधी से चुरहट पहुंचने में भी लगा करीब डेढ़ घंटा
परिजनों ने 108 एंबुलेंस की उपलब्धता और पहुंचने में लगे समय को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 108 एंबुलेंस को सीधी से चुरहट पहुंचने में करीब डेढ़ घंटे का समय लगा। बच्चे की हालत पहले से गंभीर थी और उसे तत्काल चिकित्सा सहायता की जरूरत थी। ऐसे में एंबुलेंस के पहुंचने में लगा समय और उसमें उपलब्ध चिकित्सा सुविधाएं अब जांच का विषय बन सकती हैं।
रीवा पहुंचने से पहले ही टूट गई सांस
बच्चे को चुरहट से संजय गांधी अस्पताल, रीवा ले जाया जा रहा था, लेकिन वह अस्पताल पहुंच भी नहीं सका। परिजनों के अनुसार शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे रीवा पहुंचने से पहले ही बच्चे की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिवार में मातम है। मासूम की मौत ने ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
मां ने कहा- ऑक्सीजन मिलती तो शायद बेटा बच जाता
मृतक बच्चे की मां ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि यदि 108 एंबुलेंस में पर्याप्त ऑक्सीजन की व्यवस्था होती तो शायद उसके बेटे की जान बच सकती थी। हालांकि यह निश्चित रूप से कहना कि मौत केवल ऑक्सीजन की कमी के कारण हुई, जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल परिवार की ओर से अस्पताल और एंबुलेंस की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
अब जांच से साफ होगा कहां हुई लापरवाही
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचने के बाद बच्चे को तत्काल जरूरी ऑक्सीजन सपोर्ट क्यों नहीं मिल पाया और रेफर की प्रक्रिया में कितना समय लगा। इसके अलावा 108 एंबुलेंस में ऑक्सीजन सहित जरूरी आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं, इसकी भी जांच जरूरी है। बच्चे की मौत के वास्तविक कारण और किसी स्तर पर लापरवाही हुई या नहीं, यह चिकित्सकीय जांच और प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
आदिवासी क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
चुरहट की इस घटना ने दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। गंभीर मरीजों के लिए अस्पताल में ऑक्सीजन, जरूरी उपकरण, प्रशिक्षित स्टाफ और समय पर एंबुलेंस उपलब्ध होना बेहद महत्वपूर्ण है। खासकर बच्चों और सांस से जुड़ी गंभीर स्थिति में कुछ मिनट भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस घटना को लेकर क्या जांच करता है और यदि कोई कमी सामने आती है तो उसे दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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news desk MPcg