जिस जमीन पर 17 करोड़ का लोन, उसकी मुफ्त रजिस्ट्री क्यों? MP सरकार खर्च करेगी 3,800 करोड़ रुपये, 2,102 हितग्राही पहले ही ले चुके 175 करोड़ का कर्ज
जिस जमीन पर 17 करोड़ का लोन, उसकी मुफ्त रजिस्ट्री क्यों? MP सरकार खर्च करेगी 3,800 करोड़ रुपये, 2,102 हितग्राही पहले ही ले चुके 175 करोड़ का कर्ज
50 लाख लोगों को मिलेगा मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ, पटवारियों के विरोध से अटकी प्रक्रिया; सरकारी खजाने से होने वाले खर्च पर उठे सवाल
50 लाख लोगों को मुफ्त रजिस्ट्री का लाभ देने की तैयारी
मध्य प्रदेश में आबादी भूमि पर रहने वाले लोगों को मालिकाना हक दिलाने के लिए सरकार मुफ्त रजिस्ट्री कराने की तैयारी कर रही है। इस योजना पर करीब 3,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का कहना है कि जमीन की रजिस्ट्री होने से लोगों को संपत्ति के वैध दस्तावेज मिलेंगे और वे जरूरत पड़ने पर बैंकों से कर्ज भी ले सकेंगे। इस योजना से प्रदेश के करीब 50 लाख लोगों को लाभ मिलने की बात कही जा रही है।
2,102 हितग्राही पहले ही ले चुके हैं 175 करोड़ रुपये का कर्ज
रिपोर्ट के मुताबिक, योजना से जुड़े 2,102 हितग्राही बैंकों से अब तक 175 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुके हैं। इस आंकड़े के सामने आने के बाद मुफ्त रजिस्ट्री की जरूरत और उसके दायरे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। यदि कुछ हितग्राही पहले ही बैंक से कर्ज प्राप्त कर चुके हैं, तो ऐसे मामलों में रजिस्ट्री की प्रक्रिया और सरकारी खर्च का आधार क्या होगा? इस पर स्पष्ट जानकारी सामने आना जरूरी है।
17 करोड़ रुपये के लोन वाली जमीन का मामला चर्चा में
रिपोर्ट में 17 करोड़ रुपये के लोन से जुड़ी जमीन का भी जिक्र है। इसी को लेकर सवाल उठाया जा रहा है कि जिस जमीन के आधार पर बैंक से कर्ज लिया जा चुका है, उसकी मुफ्त रजिस्ट्री कराने की आवश्यकता क्या है? हालांकि, किसी जमीन पर कर्ज मिलना और उसका कानूनी मालिकाना हक पूरी तरह स्पष्ट होना अलग-अलग बातें हो सकती हैं। इसलिए इस मामले में संबंधित जमीन के दस्तावेजों और कर्ज की शर्तों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
पटवारियों के विरोध से अटकी रजिस्ट्री की प्रक्रिया
मध्य प्रदेश में मुफ्त रजिस्ट्री की प्रक्रिया पटवारियों के विरोध के कारण प्रभावित होने की बात सामने आई है। प्रक्रिया में देरी होने से योजना का लाभ पाने की उम्मीद कर रहे लोगों को इंतजार करना पड़ सकता है। योजना को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन को राजस्व अमले से जुड़े विवादों का समाधान करना होगा, ताकि पात्र हितग्राहियों के दस्तावेज तैयार करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा सके।
3,800 करोड़ रुपये के खर्च पर जवाबदेही का सवाल
सरकार की योजना का उद्देश्य आबादी भूमि पर रहने वाले लोगों को कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराना और उन्हें बैंकिंग सुविधाओं से जोड़ना है। लेकिन जब योजना पर 3,800 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, तो पात्रता, वास्तविक जरूरत और सरकारी धन के उपयोग का स्पष्ट हिसाब भी महत्वपूर्ण हो जाता है। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि मुफ्त रजिस्ट्री किन शर्तों पर होगी, पहले से कर्ज ले चुके हितग्राहियों के मामलों में क्या प्रक्रिया अपनाई जाएगी और योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों तक किस तरह पहुंचाया जाएगा।
news desk MPcg