मध्य प्रदेश में दूध महंगा: सांची ने बढ़ाए दाम, आम लोगों के बजट पर असर
मध्य प्रदेश में दूध की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी हुई है। सांची ने अपने दूध के दाम 2 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। भोपाल दुग्ध संघ द्वारा जारी नई दरें 15 मई से लागू होंगी। इससे पहले अमूल और मदर डेयरी भी दूध के दाम बढ़ा चुके हैं। लगातार हो रही इस बढ़ोतरी का सीधा असर आम लोगों की रसोई और मासिक बजट पर पड़ने वाला है।
भोपाल में सबसे ज्यादा असर
भोपाल में प्रतिदिन लगभग 7.5 लाख लीटर सांची दूध की खपत होती है। राजधानी में पैक्ड दूध के रूप में सबसे ज्यादा इस्तेमाल इसी ब्रांड का होता है। वहीं अमूल दूध की खपत भी करीब 90 हजार लीटर प्रतिदिन बताई जा रही है। सौरभ और श्रीधी जैसे अन्य ब्रांड भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बिकते हैं, लेकिन खुले दूध की मांग अभी भी सबसे ज्यादा बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, भोपाल में हर दिन करीब 10 लाख लीटर खुला दूध बिकता है। हाल ही में खुले दूध के दाम भी 2 रुपए तक बढ़े हैं, लेकिन यह अब भी पैक्ड दूध की तुलना में लगभग 10 रुपए प्रति लीटर सस्ता है। यही वजह है कि कई परिवार आज भी खुले दूध को प्राथमिकता दे रहे हैं।
कंपनियों ने क्यों बढ़ाए दाम?
डेयरी कंपनियों का कहना है कि पशु आहार, पैकेजिंग सामग्री, ईंधन और ट्रांसपोर्ट की लागत लगातार बढ़ रही है। इसी कारण दूध के दामों में बदलाव करना जरूरी हो गया था। अधिकारियों के मुताबिक इस बार कीमतों में 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक की वृद्धि की गई है।
अमूल ने मई 2025 के बाद पहली बार दूध महंगा किया है, जबकि मदर डेयरी अप्रैल 2025 में भी दाम बढ़ा चुकी थी। अब सांची के नए रेट लागू होने के बाद प्रदेशभर के उपभोक्ताओं को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
इंदौर समेत कई शहरों में बढ़ रही अमूल की मांग
इंदौर में अमूल दूध की सबसे ज्यादा खपत बताई जा रही है, जहां रोजाना करीब 1.25 लाख लीटर दूध बिकता है। इसके अलावा जबलपुर और ग्वालियर में भी अमूल की मांग लगातार बढ़ रही है।
सोशल मीडिया पर लोगों की नाराजगी
दूध के दाम बढ़ने के बाद सोशल media पर कई लोगों ने नाराजगी जताई है। लोगों का कहना है कि रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे घर का बजट बिगड़ता जा रहा है। खासकर मध्यम वर्ग और बड़े परिवारों के लिए यह बढ़ोतरी चिंता का विषय बन गई है।
निष्कर्ष
लगातार बढ़ती महंगाई के बीच दूध जैसी जरूरी चीज के दाम बढ़ना आम लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। डेयरी कंपनियां इसे लागत बढ़ने की मजबूरी बता रही हैं, लेकिन उपभोक्ताओं की चिंता यह है कि यदि इसी तरह कीमतें बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में रसोई का बजट संभालना और मुश्किल हो सकता है।
news desk MPcg