भारत की मत्स्य-6000 पनडुब्बी: गहरे समुद्र के रहस्य खोलने को तैयार
मत्स्य-6000, भारत की मानवयुक्त पनडुब्बी, 6000 मीटर गहराई तक अनुसंधान के लिए तैयार है। एनआईओटी द्वारा विकसित, यह अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप परीक्षित है और फ्रांस की नॉटाइल पनडुब्बी के साथ साझेदारी करेगी। डीप ओशन मिशन के तहत, यह गहरे समुद्र के रहस्यों को उजागर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
चेन्नई, 21 अप्रैल 2025: भारत की महत्वाकांक्षी गहरे समुद्र अनुसंधान परियोजना, मत्स्य-6000, अब अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही समुद्र की गहराइयों में उतरने के लिए तैयार है। यह मानवयुक्त पनडुब्बी, जिसे राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी), चेन्नई ने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत विकसित किया है, तीन लोगों को 6000 मीटर की गहराई तक ले जाने में सक्षम है। यह भारत के डीप ओशन मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो समुद्री अनुसंधान में नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।
परीक्षण और तकनीकी विशेषताएं
मत्स्य-6000 का डिजाइन और निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, और इसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कठोर परीक्षणों से गुजारा गया है। हाल ही में, चेन्नई के कटुपल्ली बंदरगाह पर तीन चालक दल के सदस्यों के साथ इसकी तैरने की क्षमता, स्थिरता, गतिशीलता, नियंत्रण प्रणाली और सुरक्षा उपकरणों का सफल प्रदर्शन किया गया। इस पनडुब्बी में 2.1 मीटर व्यास का टाइटेनियम मिश्र धातु से बना पर्सनल स्फीयर है, जो 720 बार दबाव (6000 मीटर गहराई पर अपेक्षित दबाव से 1.2 गुना अधिक) सहन करने में सक्षम है। यह स्फीयर 1 एटमॉस्फीयर दबाव बनाए रखता है, जिससे चालक दल की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
पनडुब्बी में 12 घंटे के सामान्य संचालन और 96 घंटे की आपातकालीन सहनशक्ति के लिए डीएनवी-प्रमाणित मानव सहायता और सुरक्षा प्रणाली (एचएसएसएस) मौजूद है। यह प्रणाली ऑक्सीजन स्तर को 20% और कार्बन डाईऑक्साइड को 1000 पीपीएम से कम रखती है, साथ ही आर्द्रता को नियंत्रित करती है। इसके अतिरिक्त, पायलट हर 30 मिनट में अंडरवाटर एकॉस्टिक टेलीफोन के माध्यम से मिशन कंट्रोल सेंटर को जानकारी भेजता रहेगा, जिससे निरंतर संचार बना रहे।
सुरक्षा और आपातकालीन उपाय
मत्स्य-6000 को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह हमेशा तैरती रहे, जब तक कि बैलास्ट टैंक में पानी भरकर इसे गोता लगाने का निर्देश न दिया जाए। आपात स्थिति में सतह पर लौटने के लिए इसमें तीन अलग-अलग वजन कम करने के तंत्र हैं। इसके अलावा, अतिरिक्त बिजली, नियंत्रण और संचार उपकरणों की व्यवस्था भी की गई है। पनडुब्बी में एक अंडरवाटर एकॉस्टिक टेलीफोन और 500 मीटर गहराई तक काम करने वाला सब-फोन भी है, जो 10,000 मीटर तक संचालन के लिए परीक्षित है।
डीप ओशन मिशन और बजट
पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने 2021 में डीप ओशन मिशन शुरू किया था, जिसके तहत मत्स्य-6000 का विकास किया जा रहा है। इस परियोजना के लिए 2021-22 में 150 करोड़ रुपये आबंटित किए गए, जिसमें से 59.93 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2022-23 में 650 करोड़ रुपये का बजट था, जिसमें 98.07 करोड़ रुपये का उपयोग हुआ। 2023-24 में 600 करोड़ रुपये आबंटित किए गए, जिसमें से 214.42 करोड़ रुपये खर्च हुए। 2024-25 में भी 600 करोड़ रुपये का प्रावधान है, और 28 मार्च 2025 तक 585.95 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।
सहयोगी संस्थान
इस परियोजना में इसरो, डीआरडीओ, भारतीय नौसेना, आईआईटी, और समीर-चेन्नई जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की कंपनियां जैसे लार्सन एंड टुब्रो, रंगसंस एयरोस्पेस, यूनिक हाइड्रा, और मिश्र धातु निगम लिमिटेड शामिल हैं। यह सहयोग भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाता है।
अंतरराष्ट्रीय साझेदारी
एनआईओटी ने फ्रांस के ‘फ्रेंच रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर एक्सप्लॉयटेशन ऑफ द सी’ के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी से फ्रांस की नॉटाइल पनडुब्बी के साथ वैज्ञानिक सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा, जो समुद्र की 6000 मीटर गहराई तक अनुसंधान करती है।
news desk MPcg