Supreme Court of India में केंद्र की बड़ी रणनीति, “डिजिटल अरेस्ट” पर कसेगा शिकंजा

Supreme Court of India में केंद्र की बड़ी रणनीति, “डिजिटल अरेस्ट” पर कसेगा शिकंजा

Supreme Court of India में केंद्र सरकार ने “डिजिटल अरेस्ट” जैसे तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों पर रोक लगाने के लिए व्यापक रणनीति पेश की है। इस मामले की सुनवाई 12 मई को होगी, जहां चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली पीठ गृह मंत्रालय की स्टेटस रिपोर्ट की समीक्षा करेगी।

सरकार ने अपनी योजना में WhatsApp की भूमिका को अहम बताया है। प्रस्ताव के अनुसार, व्हाट्सएप अब केवल फर्जी अकाउंट्स को ब्लॉक करने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर संबंधित डिवाइस आईडी को भी ब्लॉक करने पर विचार करेगा, ताकि बार-बार सिम बदलकर धोखाधड़ी करने वाले अपराधियों पर अंकुश लगाया जा सके। साथ ही, प्लेटफॉर्म ने डिलीट किए गए अकाउंट्स का डेटा 180 दिनों तक सुरक्षित रखने और जांच एजेंसियों को सहयोग देने पर सहमति जताई है।

रिपोर्ट में चार प्रमुख क्षेत्रों—प्लेटफॉर्म जवाबदेही, बैंकिंग सुरक्षा, सिम ट्रेसबिलिटी और पीड़ितों के मुआवजे—पर फोकस किया गया है। Reserve Bank of India द्वारा सुझाए गए उपायों में संदिग्ध खातों को तुरंत फ्रीज करना, बैंकों के बीच बेहतर समन्वय और पीड़ितों को प्राथमिकता के आधार पर धन वापसी शामिल है। वहीं, दूरसंचार मंत्रालय को फर्जी सिम पर रोक के लिए बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन मजबूत करने की सिफारिश की गई है।

आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में साइबर धोखाधड़ी के मामलों में 206 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई और कुल नुकसान 22,845 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। 22 लाख से अधिक मामलों का दर्ज होना इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। हालांकि, विशेषज्ञों ने गोपनीयता और नागरिक अधिकारों को लेकर चिंता भी जताई है। सरकार की यह पहल साइबर अपराधों के खिलाफ एक सख्त और समन्वित ढांचा तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।