क्या खत्म हो जाएगा ATM का दौर, 2 साल में 44% घटा डेबिट कार्ड का इस्तेमाल
भारत में डिजिटल भुगतान की बढ़ती लोकप्रियता ने लोगों के लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। कभी नकदी निकालने और भुगतान करने का सबसे भरोसेमंद माध्यम माने जाने वाले डेबिट कार्ड का उपयोग अब तेजी से घट रहा है। हालिया आंकड़े बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में डेबिट कार्ड से होने वाले लेनदेन में लगभग 44 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
डेबिट कार्ड के उपयोग में लगातार गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2023-24 में डेबिट कार्ड से लगभग 22,860 लाख लेनदेन हुए थे। यह संख्या 2024-25 में घटकर 16,120 लाख रह गई और 2025-26 में और कम होकर 12,802 लाख तक पहुंच गई। आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि लोग अब एटीएम और डेबिट कार्ड पर पहले जितना निर्भर नहीं रहे।
UPI बना सबसे बड़ा कारण
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह Unified Payments Interface यानी UPI को माना जा रहा है। मोबाइल फोन के जरिए कुछ सेकंड में भुगतान की सुविधा ने लोगों की नकदी पर निर्भरता कम कर दी है। किराना दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, लगभग हर जगह UPI भुगतान आम हो चुका है।
अब लोगों को छोटी-छोटी खरीदारी के लिए एटीएम जाकर नकदी निकालने की जरूरत नहीं पड़ती। मोबाइल से सीधे भुगतान करना अधिक आसान और तेज माना जा रहा है।
कार्डलेस कैश निकासी ने भी बदली तस्वीर
बैंकों ने पिछले कुछ वर्षों में कार्डलेस कैश निकासी की सुविधा शुरू की है। अब कई एटीएम से केवल मोबाइल और ओटीपी की मदद से नकदी निकाली जा सकती है। इससे भी डेबिट कार्ड की आवश्यकता कम हुई है।
क्रेडिट कार्ड की बढ़ती लोकप्रियता
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रेडिट कार्ड के बढ़ते उपयोग ने भी डेबिट कार्ड को पीछे धकेला है। कैशबैक, रिवॉर्ड पॉइंट्स और ईएमआई जैसी सुविधाओं के कारण लोग खरीदारी के लिए क्रेडिट कार्ड को प्राथमिकता दे रहे हैं।
क्या ATM सचमुच खत्म हो जाएंगे
हालांकि डेबिट कार्ड के उपयोग में गिरावट जरूर आई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि ATM पूरी तरह खत्म हो जाएंगे। देश के ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में अभी भी नकदी का व्यापक उपयोग होता है। इसके अलावा कई लोग सुरक्षा और सुविधा के कारण नकद लेनदेन को प्राथमिकता देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले वर्षों में ATM की भूमिका बदल सकती है, लेकिन उनका पूरी तरह समाप्त होना फिलहाल संभव नहीं दिखता। हां, यह जरूर है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन के बीच ATM और डेबिट कार्ड का महत्व पहले की तुलना में कम होता जा रहा है।
बदल रही है भारत की आर्थिक आदत
भारत तेजी से कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। UPI, डिजिटल वॉलेट, नेट बैंकिंग और कार्डलेस बैंकिंग जैसी सुविधाओं ने लोगों की भुगतान संबंधी आदतों को बदल दिया है। आने वाले समय में यह बदलाव और तेज हो सकता है, जिससे बैंकिंग और भुगतान व्यवस्था का स्वरूप पूरी तरह नया दिखाई दे सकता है।
news desk MPcg