पीएम मोदी का 5 देशों का दौरा बना भारत की आर्थिक ताकत का बड़ा संदेश, ₹3.5 लाख करोड़ निवेश की उम्मीद
नई दिल्ली:
दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत अब केवल एक विशाल बाजार नहीं, बल्कि भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में तेजी से उभर रहा है। प्रधानमंत्री Narendra Modi की हालिया पांच देशों की यात्रा को इसी वजह से भारत की आर्थिक कूटनीति का बड़ा मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस दौरे के दौरान दुनिया की कई दिग्गज कंपनियों ने भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई, जिससे करीब ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश और विस्तार योजनाओं की संभावनाएं बनी हैं।
50 से ज्यादा वैश्विक कंपनियों के CEOs से हुई बैठक
प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी यात्रा के दौरान 50 से अधिक बड़ी वैश्विक कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। इन कंपनियों की कुल वैल्यू करीब 2.7 से 3 ट्रिलियन डॉलर बताई जा रही है। टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, लॉजिस्टिक्स, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में भारत को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला।
अधिकारियों के अनुसार, भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, स्थिर नीतियां और बढ़ती उपभोक्ता क्षमता विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। कई कंपनियां अब “चीन प्लस वन” रणनीति के तहत भारत को सबसे मजबूत विकल्प मान रही हैं।
UAE ने किया सबसे बड़ा निवेश ऐलान
संयुक्त अरब अमीरात यानी United Arab Emirates ने भारत में करीब 5 अरब डॉलर (लगभग ₹45 हजार करोड़) के निवेश की घोषणा की है। यह निवेश इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, ऊर्जा और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और UAE के बीच CEPA समझौते के बाद व्यापारिक संबंध और मजबूत हुए हैं, जिसका सीधा असर निवेश पर दिखाई दे रहा है।
किन सेक्टर्स में आएगा सबसे ज्यादा पैसा?
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक आने वाले समय में जिन सेक्टर्स में सबसे ज्यादा निवेश आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं:
- सेमीकंडक्टर
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI)
- ग्रीन एनर्जी
- लॉजिस्टिक्स
- डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर
- टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग
इन क्षेत्रों में भारत सरकार पहले से कई प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है। माना जा रहा है कि इससे लाखों रोजगार के अवसर पैदा होंगे और देश की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता मजबूत होगी।
भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रही दुनिया
इस दौरे का सबसे बड़ा संदेश यह रहा कि वैश्विक कंपनियां अब भारत को सिर्फ उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में देख रही हैं। चीन और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव के कारण कई कंपनियां अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट करना चाहती हैं।
प्रधानमंत्री मोदी की बैठकों में “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” अभियानों को भी मजबूत समर्थन मिला।
भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत
करीब ₹3.5 लाख करोड़ के संभावित निवेश को भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे न केवल रोजगार बढ़ेंगे बल्कि नई टेक्नोलॉजी, उत्पादन क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी भी मजबूत होगी।
सरकार का मानना है कि ऐसे निवेश भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेंगे।
विपक्ष के सवालों के बीच सरकार को मिला बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री मोदी के विदेश दौरों को लेकर विपक्ष अक्सर सवाल उठाता रहा है, लेकिन इस बार निवेश और व्यापारिक समझौतों ने सरकार को मजबूत राजनीतिक संदेश देने का अवसर दिया है। भाजपा इसे भारत की बढ़ती वैश्विक ताकत और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीतिक क्षमता का प्रमाण बता रही है।
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