बागमती रेल हादसे के 45 साल आज भी सिहर उठता है देश, जब सात बोगियां नदी में समा गई थीं

बागमती रेल हादसे के 45 साल आज भी सिहर उठता है देश, जब सात बोगियां नदी में समा गई थीं

6 जून 1981 भारतीय रेल इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसे याद करते ही आज भी लोगों की रूह कांप उठती है। 45 वर्ष पहले बिहार की बागमती नदी में हुआ भीषण रेल हादसा देश की सबसे भयावह रेल त्रासदियों में गिना जाता है। इस दुर्घटना में सैकड़ों परिवारों की खुशियां एक पल में उजड़ गई थीं और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई थी।

मानसी से सहरसा की ओर आ रही एक यात्री ट्रेन की सात बोगियां अचानक बागमती नदी में जा गिरी थीं। हादसा इतना भयावह था कि देखते ही देखते सैकड़ों यात्री तेज बहाव वाली नदी में समा गए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस त्रासदी में 235 लोगों की मौत हुई थी, जबकि कई लोगों का कभी पता ही नहीं चल पाया। यही वजह है कि इसे भारतीय रेलवे के इतिहास की सबसे दर्दनाक दुर्घटनाओं में शामिल किया जाता है।

स्थानीय लोगों के अनुसार 6 जून 1981 का दिन सामान्य दिनों की तरह शुरू हुआ था। ट्रेन यात्रियों से खचाखच भरी हुई थी। अचानक ट्रेन के बागमती नदी पुल के पास पहुंचने के दौरान हादसा हुआ और कुछ ही क्षणों में सात डिब्बे नदी में गिर गए। हादसे के कारणों को लेकर उस समय कई तरह की चर्चाएं हुई थीं। कहीं तेज आंधी और खराब मौसम को वजह बताया गया, तो कहीं तकनीकी खामी और रेलवे ट्रैक की स्थिति पर सवाल उठे।

दुर्घटना के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार और अफरा-तफरी का ऐसा मंजर था जिसे देखने वालों की आंखें आज भी नम हो जाती हैं। स्थानीय ग्रामीण सबसे पहले राहत और बचाव कार्य में जुटे। सीमित संसाधनों के बावजूद लोगों ने नदी में कूदकर यात्रियों को बचाने की कोशिश की। बाद में प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।

कोसी और सीमांचल क्षेत्र के हजारों परिवार इस हादसे से सीधे प्रभावित हुए थे। कई घरों के कमाने वाले सदस्य हमेशा के लिए चले गए, जबकि अनेक बच्चों ने अपने माता-पिता को खो दिया। उस समय संचार और बचाव सुविधाएं सीमित होने के कारण राहत कार्य भी बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुआ था।

45 साल बाद भी यह हादसा स्थानीय लोगों की स्मृतियों में जिंदा है। हर वर्ष इसकी बरसी पर लोग उन मृतकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं जिन्होंने इस भीषण त्रासदी में अपनी जान गंवाई थी। कई परिवार आज भी उस दर्द को नहीं भूल पाए हैं जो उन्हें उस मनहूस दिन मिला था।

रेल सुरक्षा के क्षेत्र में बीते दशकों में कई सुधार हुए हैं। आधुनिक तकनीक, बेहतर ट्रैक मॉनिटरिंग और उन्नत सुरक्षा प्रणालियों ने रेल यात्राओं को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाया है। फिर भी बागमती रेल हादसा एक ऐसी चेतावनी और सीख के रूप में याद किया जाता है, जिसने रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में गंभीर चिंतन को जन्म दिया।

आज, जब इस त्रासदी को 45 वर्ष पूरे हो चुके हैं, तब भी 6 जून 1981 का वह दर्दनाक दिन इतिहास के पन्नों में एक ऐसी याद बनकर दर्ज है, जिसे भुला पाना शायद कभी संभव नहीं होगा।