33 साल पुराने गोलीकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, 85 साल के बुजुर्ग को 3 साल की कैद, अन्य 4 दोषियों को मिली 10-10 साल की सजा

33 साल पुराने गोलीकांड में कोर्ट का बड़ा फैसला, 85 साल के बुजुर्ग को 3 साल की कैद, अन्य 4 दोषियों को मिली 10-10 साल की सजा

जागरण संवाददाता, हाजीपुर (वैशाली)। बिहार के वैशाली जिले की हाजीपुर अदालत से न्याय की एक बेहद ऐतिहासिक और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम की अदालत ने करीब 33 वर्ष पुराने जानलेवा हमले (गोलीकांड) के मामले में अंतिम फैसला सुना दिया है। अदालत ने एक ही परिवार के 5 लोगों को दोषी ठहराते हुए कड़ी सजा सुनाई है। इस लंबी कानूनी लड़ाई के दौरान केस के 4 अन्य आरोपियों की मौत पहले ही हो चुकी है।

 उम्र का लिहाज कर बुजुर्ग को कम सजा, बाकी को 10-10 साल की जेल

न्यायालय ने मामले की गंभीरता और दोषियों की वर्तमान स्थिति को देखते हुए सजा का निर्धारण किया 85 वर्षीय बुजुर्ग को सजा: मुख्य दोषी दीप राय की ढलती उम्र (85 वर्ष) को ध्यान में रखते हुए अदालत ने उन्हें 3 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।

अन्य चार दोषियों को सख्त सजा: परिवार के अन्य चार सदस्यों—जगदीश राय उर्फ जीशा राय, नरेश राय, नागदेव राय और नकेश्वर राय को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा दी गई है। साथ ही इन चारों पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना (अर्थदंड) भी लगाया गया है।

क्या था 1992 का यह पूरा मामला

अपर लोक अभियोजक ख्वाजा हसन खान 'लड्डू' के अनुसार, यह खूनी वारदात 10 नवंबर 1992 की है। जुड़ावनपुर थाना क्षेत्र के राघोपुर निवासी अदालत राय अपनी पत्नी रामसखी देवी के साथ घर के बाहर बैठे थे।

इसी दौरान दीप राय अपने परिजनों के साथ वहां पहुंचा और घर के सामने वाले रास्ते पर शीशे के टुकड़े बिछाने लगा। जब दंपति ने इसका विरोध किया, तो विवाद बढ़ गया। आरोपी पक्ष ने पहले दोनों के साथ लाठी-डंडों से मारपीट की और फिर उन पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। गोली लगने से पति-पत्नी दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

 33 साल लंबी चली न्यायिक प्रक्रिया

9 लोगों पर हुई थी FIR: घटना के बाद जुड़ावनपुर थाने में दीप राय समेत 9 लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज की गई थी। 4 आरोपियों की हो गई मौत 1993 में चार्जशीट दाखिल होने के बाद यह मामला लगातार कोर्ट में चलता रहा। 33 साल लंबी खिंची इस सुनवाई के दौरान ही 4 आरोपियों की मौत हो गई।

10 गवाहों के बाद फैसला

अभियोजन पक्ष की ओर से कोर्ट में 10 चश्मदीद गवाहों को पेश किया गया। अदालत ने बीती 26 मई को सभी बचे हुए 5 आरोपियों को दोषी करार दिया था, जिसके बाद मंगलवार (2 जून 2026) को सजा का एलान किया गया।

33 साल बाद आए इस फैसले ने यह साबित कर दिया है कि कानून के घर में देर भले हो, लेकिन अंधेर नहीं। अब 85 साल की उम्र में मुख्य आरोपी दीप राय को दो लोगों के सहारे जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ेगा।