MP विधानसभा में UCC बिल पास: भारी हंगामे के बीच सरकार ने कराया पारित, कांग्रेस की सेलेक्ट कमेटी भेजने की मांग खारिज

MP विधानसभा में UCC बिल पास: भारी हंगामे के बीच सरकार ने कराया पारित, कांग्रेस की सेलेक्ट कमेटी भेजने की मांग खारिज

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) विधेयक को लेकर सदन में जमकर राजनीतिक घमासान देखने को मिला। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस, नारेबाजी और हंगामे के बीच सरकार ने यूसीसी बिल को विधानसभा से पारित करा लिया।

कांग्रेस ने विधेयक को प्रवर समिति (Select Committee) के पास भेजने की मांग की, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया। इसके बाद विपक्षी विधायक वेल में पहुंच गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। हंगामे की स्थिति को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी।

इसके बावजूद सरकार ने चर्चा पूरी कराकर विधेयक पारित घोषित कर दिया।

UCC बिल पेश होते ही सदन में शुरू हुआ विवाद

मंगलवार को मध्य प्रदेश विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने के बाद सरकार की ओर से समान नागरिक संहिता विधेयक सदन में पेश किया गया। यह बिल आते ही विपक्ष ने इसकी प्रक्रिया और जरूरत पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक जल्दबाजी में नहीं लाया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि पहले इसे प्रवर समिति के पास भेजा जाए, जहां विशेषज्ञों, कानूनविदों और सभी पक्षों की राय ली जा सके।

कांग्रेस का कहना था कि यूसीसी का सीधा संबंध नागरिकों के व्यक्तिगत कानून, सामाजिक व्यवस्था और संवैधानिक अधिकारों से है, इसलिए इस पर व्यापक चर्चा जरूरी है।

हालांकि सरकार ने विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया और सदन में विधेयक पर चर्चा शुरू कराई।

कांग्रेस विधायक वेल में पहुंचे, लगाए नारे

यूसीसी विधेयक पर चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने विरोध शुरू कर दिया। कई विधायक अपनी सीटों से उठकर विधानसभा के वेल में पहुंच गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।

कांग्रेस विधायकों का आरोप था कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए यूसीसी जैसे मुद्दे ला रही है।

विपक्षी नेताओं ने कहा कि प्रदेश में बेरोजगारी, किसानों की समस्या, महंगाई और अन्य मुद्दे मौजूद हैं, लेकिन सरकार राजनीतिक एजेंडे को प्राथमिकता दे रही है।

दूसरी तरफ भाजपा विधायक और मंत्री लगातार मांग करते रहे कि विपक्ष हंगामा छोड़कर बिल पर अपनी बात रखे।

हंगामे के कारण दो बार स्थगित हुई कार्यवाही

सदन में बढ़ते हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सभी सदस्यों से शांत रहने और चर्चा में भाग लेने की अपील की।

लेकिन जब नारेबाजी नहीं रुकी तो अध्यक्ष ने पहली बार कार्यवाही करीब 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी।

दोबारा कार्यवाही शुरू होने के बाद भी कांग्रेस विधायक अपनी मांग पर अड़े रहे। इसके बाद फिर से हंगामा हुआ और सदन को 15 मिनट के लिए स्थगित करना पड़ा।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव बोले- UCC सामाजिक समानता का कानून

यूसीसी बिल पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता किसी एक वर्ग या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था बनाने का प्रयास है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह कानून महिला अधिकारों, सामाजिक समानता और न्याय व्यवस्था को मजबूत करेगा।

उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के लाखों लोगों ने यूसीसी को लेकर अपने सुझाव दिए हैं और जनता की राय के आधार पर यह पहल आगे बढ़ाई गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि—

विवाह का पंजीयन अनिवार्य किया जाएगा।
सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे।
महिलाओं को अधिक अधिकार और सुरक्षा मिलेगी।
समाज में भेदभाव कम होगा।

सीएम ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि विपक्ष हर सुधारात्मक कदम का विरोध करता है और वोट बैंक की राजनीति करता रहा है।

सीएम ने कांग्रेस पर लगाए तुष्टीकरण के आरोप

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सदन में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी वर्षों से तुष्टीकरण की राजनीति करती रही है।

उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और यूसीसी उसी भावना को मजबूत करता है।

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कांग्रेस समान कानून की बात का विरोध कर रही है, जबकि संविधान में समानता का सिद्धांत मौजूद है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी की धार्मिक स्वतंत्रता खत्म करना नहीं बल्कि सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था बनाना है।

कांग्रेस नेताओं ने बताया- राजनीतिक एजेंडा

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद, आतिफ अकील और अन्य नेताओं ने बिल का विरोध किया।

आरिफ मसूद ने कहा कि यूसीसी के नाम पर एक विशेष वर्ग को निशाना बनाया जा सकता है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद-29 का उल्लेख करते हुए कहा कि अल्पसंख्यकों के सांस्कृतिक अधिकारों की रक्षा जरूरी है।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस दिशा में कोई कानून लागू नहीं किया है, ऐसे में राज्य सरकार इतनी जल्दबाजी क्यों कर रही है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार को विधेयक को समिति के पास भेजना चाहिए था ताकि सभी पहलुओं पर विचार किया जा सके।

कांग्रेस का विधानसभा परिसर में सांकेतिक प्रदर्शन

यूसीसी बिल के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले सांकेतिक प्रदर्शन भी किया।

कांग्रेस नेताओं ने पोस्टर और तख्तियां लेकर सरकार पर आरोप लगाए कि वह युवाओं, किसानों और आम जनता के मुद्दों से ध्यान भटका रही है।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक और भावनात्मक मुद्दों को प्राथमिकता दे रही है।

भाजपा ने कांग्रेस के इस प्रदर्शन को राजनीति करार दिया।

भाजपा ने कहा- जनता की मांग पर आया बिल

संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि यूसीसी विधेयक केवल सरकार का फैसला नहीं है।

उन्होंने कहा कि लोगों से सुझाव मांगे गए थे और बड़ी संख्या में नागरिकों ने अपनी राय दी।

विजयवर्गीय ने कहा कि समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना है।

भाजपा विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि यूसीसी लागू होकर रहेगा और विरोध करने वाली पार्टियों को जनता जवाब देगी।

भाजपा-कांग्रेस विधायकों के बीच कई बार हुई बहस

यूसीसी पर चर्चा के दौरान कई बार सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक आमने-सामने दिखाई दिए।

भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि यूसीसी का विरोध सामाजिक समानता के खिलाफ है।

वहीं कांग्रेस नेताओं ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार इस मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रही है।

सदन में कई बार नारेबाजी की स्थिति बनी और अध्यक्ष को हस्तक्षेप करना पड़ा।

UCC में किन मुद्दों पर हो सकता है असर?

समान नागरिक संहिता का उद्देश्य देश या राज्य के सभी नागरिकों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाना है।

इसमें आमतौर पर विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों से जुड़े नियम शामिल होते हैं।

सरकार का दावा है कि इससे सभी नागरिकों के लिए एक समान व्यवस्था बनेगी, जबकि विपक्ष और कुछ सामाजिक संगठनों का कहना है कि अलग-अलग समुदायों की परंपराओं और अधिकारों को ध्यान में रखना जरूरी है।

MP में UCC लागू करने की तैयारी क्यों अहम?

मध्य प्रदेश सरकार का यह कदम राजनीतिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यूसीसी देश में लंबे समय से बहस का विषय रहा है। कुछ राज्य इसे समानता और सुधार की दिशा में कदम मानते हैं, जबकि विरोध करने वाले इसे व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप बताते हैं।

मध्य प्रदेश में इस विधेयक के पारित होने के बाद अब इसकी आगे की संवैधानिक प्रक्रिया और नियमों पर नजर रहेगी।

आगे की राह

विधानसभा से पारित होने के बाद यूसीसी विधेयक आगे तय संवैधानिक प्रक्रिया के तहत बढ़ेगा।

सरकार जहां इसे सामाजिक सुधार और समान अधिकारों की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह इस मुद्दे पर अपना विरोध जारी रखेगी।

आने वाले दिनों में यूसीसी मध्य प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।