ग्वालियर-चंबल के 24 स्कूलों में शुरू होंगी कृषि की कक्षाएं, अतिशेष और अतिथि शिक्षकों से होगी पढ़ाई

ग्वालियर-चंबल के 24 स्कूलों में शुरू होंगी कृषि की कक्षाएं, अतिशेष और अतिथि शिक्षकों से होगी पढ़ाई

कृषि शिक्षा को स्कूली पाठ्यक्रम से जोड़ने की तैयारी, अतिशेष शिक्षकों के साथ जरूरत पड़ने पर अतिथि शिक्षक भी संभालेंगे कक्षाएं

ग्वालियर-चंबल। ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के 24 सरकारी स्कूलों में अब विद्यार्थियों को कृषि विषय की पढ़ाई कराई जाएगी। शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों में कृषि की कक्षाएं शुरू करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए पहले स्कूलों में उपलब्ध शिक्षकों की स्थिति देखी जाएगी और जहां अतिशेष शिक्षक उपलब्ध होंगे, उन्हें जरूरत के अनुसार तैनात किया जाएगा। वहीं, शिक्षकों की कमी होने पर अतिथि शिक्षकों की मदद से कक्षाएं संचालित की जाएंगी।

इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूली स्तर से ही कृषि और खेती से जुड़ी जानकारी देना है। खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को इसका लाभ मिलने की उम्मीद है। कृषि अब केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई प्रबंधन, मिट्टी परीक्षण, फसल प्रबंधन और कृषि आधारित व्यवसाय जैसे कई क्षेत्र शामिल हो चुके हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को इन विषयों की शुरुआती जानकारी स्कूल में ही देने की कोशिश की जा रही है।

कृषि विषय की कक्षाएं शुरू करने के लिए शिक्षकों की उपलब्धता सबसे अहम होगी। विभाग पहले यह देखेगा कि संबंधित स्कूलों में कितने अतिशेष शिक्षक उपलब्ध हैं और उन्हें किस तरह समायोजित किया जा सकता है। जहां अतिशेष शिक्षकों से आवश्यकता पूरी नहीं होगी, वहां अतिथि शिक्षकों की सेवाएं ली जाएंगी, ताकि कृषि विषय की पढ़ाई शुरू होने के बाद विद्यार्थियों की कक्षाएं नियमित रूप से चलती रहें।

स्कूल स्तर पर कृषि शिक्षा शुरू होने से विद्यार्थियों को खेती-किसानी को वैज्ञानिक नजरिए से समझने का अवसर मिलेगा। वे फसलों की बेहतर पैदावार, आधुनिक कृषि तकनीकों, जैविक खेती, कृषि उपकरणों और खेती से जुड़े नए प्रयोगों के बारे में जानकारी हासिल कर सकेंगे। इसके साथ ही विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान, बागवानी, कृषि इंजीनियरिंग, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि आधारित स्वरोजगार जैसे क्षेत्रों में भविष्य के अवसरों की जानकारी भी मिल सकती है।

ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के कई हिस्सों में कृषि लोगों की आजीविका का प्रमुख आधार है। ऐसे में स्कूलों में कृषि विषय को शामिल करने से विद्यार्थियों की पढ़ाई को स्थानीय परिस्थितियों और रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने में मदद मिल सकती है। खासकर ग्रामीण पृष्ठभूमि के विद्यार्थी अपने आसपास होने वाली खेती को वैज्ञानिक तरीके से समझ सकेंगे और आगे चलकर कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के इस्तेमाल की दिशा में भी आगे बढ़ सकते हैं।

फिलहाल यह व्यवस्था क्षेत्र के 24 स्कूलों से शुरू की जा रही है। शिक्षकों की उपलब्धता के अनुसार इन स्कूलों में कृषि की कक्षाएं संचालित की जाएंगी। शिक्षा विभाग की इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को पारंपरिक विषयों के साथ ऐसे ज्ञान से जोड़ना है, जो उनके स्थानीय जीवन, कौशल विकास और भविष्य के करियर से सीधे जुड़ा हो।