Gen-Z के बीच क्यों बढ़ रहा ड्रैग कल्चर का क्रेज? जानिए क्या है ड्रैग क्वीन और ड्रैग किंग
सोशल मीडिया के दौर में ड्रैग कल्चर एक बार फिर चर्चा में है। कलाकार मेकअप, विग, खास कॉस्ट्यूम और अलग अंदाज के किरदार के साथ मंच पर प्रस्तुति देते हैं। हालांकि, यह संस्कृति Gen-Z की नई खोज नहीं है, बल्कि इसके पीछे थिएटर और परफॉर्मेंस की काफी पुरानी परंपरा जुड़ी हुई है।
आज के दौर में Gen-Z के बीच फैशन, मेकअप और परफॉर्मेंस के कई नए ट्रेंड तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन्हीं में से एक है ड्रैग कल्चर, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की वजह से अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा लोगों तक पहुंच रहा है। इंस्टाग्राम, यूट्यूब और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ड्रैग कलाकारों की तस्वीरें, वीडियो और लाइव परफॉर्मेंस देखने को मिलती हैं।
ड्रैग कल्चर में कलाकार सामान्य से अलग और अक्सर बेहद आकर्षक या नाटकीय अंदाज में तैयार होते हैं। इसमें खास तरह के कपड़े, मेकअप, विग, जूते और एक्सेसरीज का इस्तेमाल किया जाता है। कलाकार एक विशेष मंचीय किरदार या व्यक्तित्व बनाकर उसके रूप में प्रस्तुति देते हैं।
क्या होता है ड्रैग कल्चर?
ड्रैग एक तरह की परफॉर्मेंस आर्ट है, जिसमें कलाकार जानबूझकर अपने रूप, पहनावे, मेकअप और व्यवहार को एक खास किरदार के मुताबिक बदलता है। इसका उद्देश्य मनोरंजन, अभिनय, संगीत, डांस, कॉमेडी या किसी सामाजिक संदेश को प्रस्तुति के जरिए दर्शकों तक पहुंचाना हो सकता है।
ड्रैग परफॉर्मेंस में कलाकार का लुक अक्सर सामान्य फैशन से काफी अलग होता है। बड़े विग, चमकदार कपड़े, नाटकीय मेकअप और मंचीय अंदाज इसकी पहचान माने जाते हैं।
ड्रैग क्वीन और ड्रैग किंग में क्या अंतर?
ड्रैग परफॉर्मेंस करने वाले कलाकारों को आम तौर पर ड्रैग क्वीन या ड्रैग किंग कहा जाता है।
ड्रैग क्वीन आमतौर पर ऐसे कलाकार होते हैं जो मंचीय प्रस्तुति के दौरान स्त्रीत्व से जुड़े पारंपरिक रूप और फैशन को अपनाकर एक किरदार तैयार करते हैं।
वहीं ड्रैग किंग कलाकार आमतौर पर पुरुषत्व से जुड़े रूप, कपड़े और व्यवहार को मंचीय किरदार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि, ड्रैग को केवल कपड़ों या जेंडर की नकल के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं है। यह एक प्रदर्शन कला है, जिसमें कलाकार अपनी रचनात्मकता के अनुसार किरदार और लुक तैयार करता है।
क्या Gen-Z ने ड्रैग कल्चर शुरू किया?
नहीं। ड्रैग कल्चर को Gen-Z की बनाई हुई संस्कृति कहना सही नहीं होगा। जेंडर-स्वैपिंग कॉस्ट्यूम और मंचीय प्रस्तुतियों की परंपरा दुनिया के कई हिस्सों में काफी पुरानी है।
विशेष रूप से थिएटर के इतिहास में ऐसे दौर रहे हैं जब महिलाओं को मंच पर अभिनय करने की अनुमति नहीं थी और पुरुष कलाकार ही महिला पात्रों की भूमिका निभाते थे। हालांकि आधुनिक ड्रैग संस्कृति का विकास कई अलग-अलग थिएटर, नाइटलाइफ और LGBTQ+ समुदायों की परंपराओं के मेल से हुआ।
समय के साथ यह सिर्फ मंचीय मनोरंजन तक सीमित नहीं रही और फैशन, संगीत, कॉमेडी, पॉप कल्चर तथा सामाजिक अभिव्यक्ति का हिस्सा बन गई।
सोशल मीडिया ने कैसे बढ़ाई लोकप्रियता?
पहले ड्रैग परफॉर्मेंस मुख्य रूप से क्लब, थिएटर और विशेष आयोजनों तक सीमित दर्शकों तक पहुंचती थीं। सोशल मीडिया ने इस तस्वीर को काफी बदल दिया है।
अब कोई कलाकार अपनी परफॉर्मेंस का छोटा वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड कर सकता है और वह कुछ ही घंटों में हजारों या लाखों लोगों तक पहुंच सकता है। इससे स्थानीय स्तर के कलाकारों को भी अंतरराष्ट्रीय दर्शक मिल रहे हैं।
इसके अलावा शॉर्ट वीडियो और रील्स के बढ़ते चलन ने ड्रैग मेकअप, कॉस्ट्यूम और परफॉर्मेंस को युवा दर्शकों के बीच और ज्यादा लोकप्रिय बनाया है।
ड्रैग सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं
कई कलाकार ड्रैग को सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि रचनात्मक अभिव्यक्ति के रूप में भी देखते हैं। परफॉर्मेंस के जरिए वे फैशन, पहचान, समाज, राजनीति या व्यक्तिगत अनुभव जैसे विषयों को सामने रख सकते हैं।
कुछ ड्रैग शो में कॉमेडी और संगीत प्रमुख होते हैं, जबकि कुछ कलाकार नृत्य, थिएटर या कहानी कहने को अपनी प्रस्तुति का हिस्सा बनाते हैं।
भारत में भी दिख रहा असर
भारत में भी ड्रैग परफॉर्मेंस को लेकर पिछले कुछ वर्षों में सार्वजनिक चर्चा बढ़ी है। बड़े शहरों में ड्रैग शो, क्लब इवेंट और परफॉर्मेंस आयोजित होते हैं। भारतीय कलाकार अपने कार्यक्रमों में स्थानीय संगीत, बॉलीवुड, फैशन और पारंपरिक तत्वों को भी शामिल करते हैं।
सोशल मीडिया ने भारतीय ड्रैग कलाकारों को अपनी कला के लिए नया मंच दिया है। अब दर्शक किसी खास शहर में कार्यक्रम होने का इंतजार किए बिना ऑनलाइन भी ऐसी प्रस्तुतियां देख सकते हैं।
क्यों आकर्षित हो रही है Gen-Z?
Gen-Z के बीच ड्रैग कल्चर की लोकप्रियता के पीछे सोशल मीडिया, फैशन और पॉप कल्चर का बड़ा प्रभाव माना जा सकता है। इस पीढ़ी के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बल्कि अपनी रचनात्मकता और व्यक्तिगत स्टाइल दिखाने का जरिया भी हैं।
ड्रैग में बोल्ड फैशन, मेकअप, अभिनय, संगीत और कॉमेडी एक साथ दिखाई देते हैं। यही वजह है कि यह डिजिटल कंटेंट के लिए भी काफी प्रभावी फॉर्मेट बन गया है।
निष्कर्ष
ड्रैग कल्चर को केवल Gen-Z का नया ट्रेंड समझना सही नहीं होगा। इसकी जड़ें थिएटर और परफॉर्मेंस की पुरानी परंपराओं तक जाती हैं, जबकि आधुनिक दौर में क्लब कल्चर, पॉप कल्चर और सोशल मीडिया ने इसे नया रूप और बड़ा दर्शक वर्ग दिया है।
आज ड्रैग एक ऐसी परफॉर्मेंस आर्ट बन चुकी है, जिसमें फैशन, मेकअप, संगीत, अभिनय और रचनात्मकता एक साथ नजर आती है। सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के साथ आने वाले समय में इसके और नए रूप सामने आने की संभावना है।
news desk MPcg