बालाघाट में बच्चों की मौतों के बाद जागा प्रशासन, हैंडपंपों की सफाई और क्लोरिनेशन शुरू; पानी की जांच में मिला एडिनोवायरस

बालाघाट में बच्चों की मौतों के बाद जागा प्रशासन, हैंडपंपों की सफाई और क्लोरिनेशन शुरू; पानी की जांच में मिला एडिनोवायरस

बालाघाट: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड के बैगा बहुल गांवों में बच्चों की लगातार मौतों और बीमारी के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अडोरी, मछुरदा, कुंडेकसा, बोंदारी और कोरका समेत आसपास के गांवों में बीमारी फैलने के बीच अब पेयजल व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन सक्रिय हुआ है। गांवों में हैंडपंपों की सफाई और क्लोरिनेशन का काम शुरू कराया जा रहा है।

नईदुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अडोरी और मछुरदा पंचायत के कई गांवों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था लंबे समय से परेशानी का कारण बनी हुई है। कई जगह नल-जल योजना की पाइपलाइन बिछाने का काम अधूरा है, जबकि कुछ इलाकों में पाइपलाइन अब तक नहीं पहुंची है। ऐसे में ग्रामीणों की बड़ी आबादी हैंडपंप और प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर है।

21 बच्चों की मौत के दावे से मचा हड़कंप

पिछले करीब ढाई महीने में बच्चों की मौतों को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। 20 अगस्त की नईदुनिया रिपोर्ट में 21 बच्चों की मौत का उल्लेख किया गया है। इससे पहले विपक्ष की ओर से भी बालाघाट में बच्चों की मौतों का मुद्दा उठाया गया था। 14 अगस्त को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने 19 बच्चों की मौत का दावा किया था और सरकार पर आंकड़े छिपाने का आरोप लगाया था। हालांकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से मौतों की संख्या और बीमारी के अंतिम कारण को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आई है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक प्रभावित बच्चों में एक साथ कई तरह के लक्षण और संक्रमण पाए गए हैं। इनमें मलेरिया, टायफाइड, डायरिया, त्वचा संक्रमण, स्कैबीज, बुखार और कुपोषण से जुड़े लक्षण शामिल बताए गए हैं। बीमारी के वास्तविक कारण का पता लगाने के लिए रक्त और पानी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं।

पानी की जांच में एडिनोवायरस का उल्लेख

प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में है। उपलब्ध रिपोर्ट में पानी की जांच के दौरान एडिनोवायरस मिलने का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसे बच्चों की मौत का सीधा और अंतिम कारण मानना अभी जल्दबाजी होगी। इसके लिए विशेषज्ञों की जांच और लैब रिपोर्ट का पूरा निष्कर्ष सामने आना जरूरी है।

एडिनोवायरस एक प्रकार का वायरस है, जो कई तरह के संक्रमण पैदा कर सकता है। इसके कुछ प्रकार सांस संबंधी संक्रमण, आंखों के संक्रमण या पेट और आंतों से जुड़ी बीमारी का कारण बन सकते हैं। इसलिए प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था को लेकर सावधानी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

गांवों में हैंडपंपों की सफाई और क्लोरिनेशन

बच्चों की बीमारी और मौतों के बीच अब लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने प्रभावित गांवों में हैंडपंपों की सफाई और क्लोरिनेशन शुरू किया है। इसका उद्देश्य पेयजल स्रोतों को साफ रखना और पानी में मौजूद संभावित रोगजनकों के जोखिम को कम करना है।

ग्रामीणों के मुताबिक, कई गांवों में हैंडपंप खराब पड़े हैं। कुछ हैंडपंपों से पानी आता है, जबकि कई लंबे समय से बंद हैं। अडोरी पंचायत के सरपंच परशराम धुर्वे के अनुसार, हैंडपंप खराब होने पर ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं और उन्हें सुधार के लिए विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत करनी पड़ती है।

नल-जल योजना अधूरी, झिरिया के पानी पर निर्भर ग्रामीण

अडोरी और मछुरदा पंचायत के कई बैगा बहुल गांवों में नल-जल योजना की स्थिति भी चिंता बढ़ाने वाली है। कुछ स्थानों पर पाइपलाइन बिछाई गई है, लेकिन कई इलाकों में अभी तक पाइपलाइन नहीं पहुंची है। ऐसे में ग्रामीणों को पर्याप्त और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार करीब 10 से 12 गांवों में पानी के लिए सीमित संख्या में हैंडपंप हैं। इनमें भी सभी चालू नहीं हैं। कई ग्रामीण मजबूरी में झिरिया यानी प्राकृतिक जलस्रोत के पानी से प्यास बुझा रहे हैं। बारिश के मौसम में ऐसे जलस्रोतों के दूषित होने का खतरा और बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग ने भी बढ़ाई निगरानी

बीमारी के प्रकोप के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में घर-घर सर्वे और मेडिकल जांच तेज की है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार 20 सर्वे टीमों, 10 चिकित्सा अधिकारियों और चार एंबुलेंस की मदद से प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य निगरानी की जा रही है।

इसके अलावा करीब 980 घरों में स्वास्थ्य सर्वे, बच्चों की जांच और जरूरी दवाओं व पोषण संबंधी सप्लीमेंट उपलब्ध कराने की जानकारी भी सामने आई है। स्वास्थ्य अभियान के दौरान बच्चों को विटामिन-ए, ओआरएस, जिंक, आयरन और एल्बेंडाजोल जैसी दवाएं दी गईं।

बीमारी की असली वजह अब भी जांच के घेरे में

बालाघाट के इन आदिवासी बहुल गांवों में बीमारी का मामला सिर्फ पेयजल तक सीमित नहीं माना जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सामने मलेरिया, त्वचा संक्रमण, डायरिया, कुपोषण और अन्य संक्रमणों की चुनौती भी है। प्रभावित क्षेत्र दूरदराज होने के कारण स्वास्थ्य सेवाओं की नियमित पहुंच भी एक बड़ी चुनौती रही है।

ऐसे में पानी की जांच में एडिनोवायरस की मौजूदगी सामने आना एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर है, लेकिन बच्चों की मौतों का वास्तविक कारण तय करने के लिए सभी मेडिकल और लैब रिपोर्टों को एक साथ देखना जरूरी होगा।

फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित गांवों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना, खराब हैंडपंपों को दुरुस्त करना, पानी का क्लोरिनेशन करना और बीमार बच्चों को समय पर इलाज उपलब्ध कराना है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगा कि इस बीमारी के पीछे दूषित पानी की कितनी भूमिका है और बच्चों की मौतों का वास्तविक कारण क्या रहा।