हरदा के 2020 अवैध गर्भपात मामले में हाई कोर्ट सख्त, डॉक्टर और नर्सिंग होम की भूमिका की होगी स्वतंत्र जांच

हरदा के 2020 अवैध गर्भपात मामले में हाई कोर्ट सख्त, डॉक्टर और नर्सिंग होम की भूमिका की होगी स्वतंत्र जांच

भगवती नर्सिंग होम परिसर में मिला था भ्रूण; उम्रकैद की सजा काट रहे पुनिया बाई और अर्जुन पटेल को हाई कोर्ट से जमानत

जबलपुर। मध्य प्रदेश के हरदा जिले के वर्ष 2020 के कथित अवैध गर्भपात मामले में जबलपुर हाई कोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश दिया है। कोर्ट ने मामले में भगवती नर्सिंग होम के प्रबंधन और डॉक्टर मनीष शर्मा की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश राज्य सरकार को दिए हैं। अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि पूरे घटनाक्रम में नर्सिंग होम प्रबंधन और संबंधित डॉक्टर की क्या भूमिका थी।

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह की युगलपीठ ने की। इसी प्रकरण में उम्रकैद की सजा काट रहे पुनिया बाई और अर्जुन पटेल को भी हाई कोर्ट ने जमानत दे दी है।

नर्सिंग होम परिसर में मिला था भ्रूण

मामला मार्च 2020 का है। रिकॉर्ड के मुताबिक 7 मार्च 2020 को हरदा स्थित भगवती नर्सिंग होम परिसर में एक भ्रूण मिला था। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान नर्सिंग होम में कथित तौर पर अवैध गर्भपात कराए जाने की जानकारी सामने आई थी।

इस मामले में सिविल लाइन थाना पुलिस ने पुनिया बाई और अर्जुन पटेल को आरोपी बनाया था। बाद में प्रकरण अदालत पहुंचा और हरदा जिला एवं सत्र न्यायालय ने दोनों को दोषी ठहराते हुए 26 फरवरी 2024 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी सजा

जिला अदालत के फैसले के खिलाफ दोनों आरोपियों की ओर से हाई कोर्ट में अपील दाखिल की गई। सुनवाई के दौरान मामले से जुड़े रिकॉर्ड और जांच के विभिन्न पहलुओं को अदालत के सामने रखा गया।

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान नर्सिंग होम और डॉक्टर की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने राज्य सरकार को इस पहलू की स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

डॉक्टर और नर्सिंग होम की भूमिका की होगी जांच

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से यह पता लगाने को कहा है कि कथित अवैध गर्भपात की पूरी घटना में भगवती नर्सिंग होम प्रबंधन और डॉक्टर मनीष शर्मा की क्या भूमिका थी।

इस जांच के जरिए यह भी स्पष्ट किया जाना है कि नर्सिंग होम में उस समय क्या गतिविधियां हुईं और संबंधित डॉक्टर या प्रबंधन की उसमें किसी प्रकार की भूमिका थी या नहीं। कोर्ट के निर्देश के बाद अब इस पहलू पर अलग से जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

दो आरोपियों को मिली जमानत

इसी मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे पुनिया बाई और अर्जुन पटेल को हाई कोर्ट ने जमानत प्रदान कर दी है। हालांकि, जमानत दिए जाने का अर्थ मामले में अंतिम रूप से दोषमुक्त होना नहीं है। दोनों की अपील और मामले से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं पर न्यायिक प्रक्रिया आगे जारी रहेगी।

2020 से चला आ रहा है मामला

भगवती नर्सिंग होम से जुड़ा यह मामला वर्ष 2020 में सामने आया था। नर्सिंग होम परिसर में भ्रूण मिलने के बाद शुरू हुई पुलिस जांच ने कथित अवैध गर्भपात के आरोपों का रूप लिया। इसके बाद आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ और निचली अदालत में सुनवाई के बाद वर्ष 2024 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

अब हाई कोर्ट के ताजा आदेश के बाद मामले में एक नया पहलू जुड़ गया है। अदालत ने डॉक्टर और नर्सिंग होम प्रबंधन की भूमिका की स्वतंत्र जांच के निर्देश देकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष तरीके से जांच हो।