मुंबई में मराठी टेस्ट के विरोध में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी; सरकार ने बढ़ाई ट्रेनिंग की समयसीमा

मुंबई में मराठी टेस्ट के विरोध में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी; सरकार ने बढ़ाई ट्रेनिंग की समयसीमा

मुंबई। महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा के ज्ञान को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़क तक पहुंच गया है। मराठी भाषा की जांच और RTO की कार्रवाई के विरोध में मुंबई के कई इलाकों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने हड़ताल और प्रदर्शन किया, जिसके कारण यात्रियों को स्टेशन, ऑफिस और अन्य जगहों तक पहुंचने में परेशानी का सामना करना पड़ा। बांद्रा, कांदिवली, गोवंडी, वाकोला, कुर्ला, अंधेरी और सांताक्रूज समेत कई इलाकों में ऑटो की आवाजाही प्रभावित होने की रिपोर्ट सामने आई है।

हालांकि, यह सिर्फ एक दिन का अचानक शुरू हुआ विवाद नहीं है। महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो, टैक्सी और ऐप-बेस्ड कैब चालकों के लिए मराठी भाषा की ‘वर्किंग नॉलेज’ जरूरी करने की व्यवस्था लागू की है। इसी के तहत RTO की ओर से चालकों की मौखिक जांच की जा रही है।

आखिर क्यों शुरू हुआ विवाद?

महाराष्ट्र सरकार ने ड्राइवरों के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी को नियमों से जोड़ा है। 20 अगस्त 2026 से RTO ने ड्राइवरों के मराठी ज्ञान की जांच शुरू की। अधिकारियों की ओर से यात्रियों और ड्राइवर के बीच सामान्य बातचीत से जुड़े सवाल पूछे जा रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक जांच में करीब 15 बुनियादी सवालों वाला पेपर भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

जो चालक मराठी में जरूरी स्तर की बातचीत नहीं कर पा रहे हैं, उन्हें नोटिस दिया जा रहा है और भाषा सीखने के लिए समय दिया जा रहा है।

ड्राइवर यूनियनों की आपत्ति इसी प्रक्रिया को लेकर है। उनका कहना है कि ड्राइविंग का काम करने के लिए भाषा की परीक्षा और इस तरह के सवाल पूछना उचित नहीं है। कई ड्राइवरों का दावा है कि उनसे ऐसे मराठी शब्द और वाक्य पूछे जा रहे हैं, जिनका उनकी रोजमर्रा की ड्राइविंग से सीधा संबंध नहीं है।

722 ड्राइवरों को नोटिस का मामला

मराठी भाषा नियम के तहत कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ रहा है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक मुंबई और आसपास के क्षेत्रों में 722 ऑटो और टैक्सी चालकों को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। इसी कार्रवाई के बाद ड्राइवरों में नाराजगी बढ़ी और विरोध तेज हुआ।

वहीं महाराष्ट्र के अलग-अलग RTO कार्यालयों की कार्रवाई में भी कई ड्राइवरों को नोटिस जारी किए गए हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में बड़ी संख्या में चालक इस प्रक्रिया से प्रभावित हुए हैं।

ड्राइवरों की क्या मांग है?

हड़ताल कर रहे ड्राइवरों का कहना है कि वे मराठी सीखने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाषा सीखने की प्रक्रिया सम्मानजनक और व्यावहारिक होनी चाहिए।

कुछ ड्राइवरों ने कहा कि अगर सरकार उन्हें पर्याप्त समय और प्रशिक्षण देती है तो वे मराठी सीखने के लिए तैयार हैं। उनकी मुख्य आपत्ति भाषा को अचानक रोजगार और परमिट से जोड़ने तथा RTO जांच की प्रक्रिया को लेकर है।

ड्राइवरों का यह भी कहना है कि वे वर्षों से मुंबई में ऑटो-टैक्सी चला रहे हैं और यात्रियों से अलग-अलग भाषाओं में बातचीत करते हैं। ऐसे में भाषा के आधार पर उनके रोजगार पर असर नहीं पड़ना चाहिए।

फेल होने पर क्या होगा?

महाराष्ट्र सरकार की व्यवस्था के तहत ड्राइवरों को मराठी की कामचलाऊ/व्यावहारिक जानकारी साबित करनी है। जो ड्राइवर जांच में अपेक्षित स्तर नहीं दिखा पाते, उन्हें भाषा सीखने के लिए समय दिया जा रहा है। नियमों के तहत लगातार अनुपालन न करने पर बैज या परमिट पर कार्रवाई की स्थिति बन सकती है।

हालांकि सरकार ने अब ड्राइवरों को कुछ राहत देने की दिशा में कदम उठाया है।

सरकार ने बढ़ाई भाषा सीखने की समयसीमा

हड़ताल और विवाद के बीच महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा है कि जिन ड्राइवरों ने अभी तक मराठी प्रशिक्षण के लिए नामांकन नहीं कराया है, उन्हें अतिरिक्त तीन महीने का समय दिया जाएगा।

इससे पहले प्रशिक्षण सत्रों की समयसीमा 15 अगस्त तक थी। अब सरकार ने ऐसे ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए और समय देने का फैसला किया है। हालांकि RTO की ओर से नियमों के अनुपालन की जांच जारी रहेगी।

सरकार ने ड्राइवरों की मदद के लिए महाराष्ट्र में 161 मराठी प्रशिक्षण केंद्र शुरू करने और शिकायतों के लिए RTO हेल्पलाइन उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी है।

सरकार का क्या कहना है?

सरकार का तर्क है कि ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चालक सीधे यात्रियों से जुड़े होते हैं। ऐसे में उन्हें स्थानीय भाषा की बुनियादी जानकारी होनी चाहिए ताकि यात्रियों और ड्राइवरों के बीच बातचीत आसानी से हो सके।

परिवहन विभाग इसे केवल भाषा का मुद्दा नहीं, बल्कि यात्रियों से संवाद और मौजूदा परिवहन नियमों के अनुपालन से जोड़कर देख रहा है। दूसरी तरफ ड्राइवर संगठनों का कहना है कि इसे लागू करने का तरीका रोजगार पर दबाव डालने वाला नहीं होना चाहिए।

मामला अब बॉम्बे हाईकोर्ट भी पहुंचा

विवाद के बीच चार ऐप-बेस्ड कैब ड्राइवरों ने बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र सरकार के मराठी भाषा संबंधी नियम को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस नियम से उनके काम और आजीविका पर असर पड़ सकता है।

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि नियम का प्रभाव खास तौर पर दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों पर पड़ रहा है। मामले की कानूनी प्रक्रिया अब आगे बढ़ेगी।

मुंबई में यात्रियों पर पड़ा असर

हड़ताल के कारण मुंबई के कई इलाकों में यात्रियों को ऑटो और टैक्सी आसानी से नहीं मिल पाए। कई यात्रियों को रेलवे स्टेशन तक पहुंचने के लिए दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा।

ऑटो की कमी के बीच ऐप-बेस्ड कैब और अन्य परिवहन साधनों की मांग बढ़ने से किराए में भी बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है।

कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारी चालकों द्वारा सड़क पर चल रहे अन्य ऑटो चालकों को भी रोकने की खबरें सामने आईं। इससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई।

मुंबई में कितने ऑटो-टैक्सी ड्राइवर प्रभावित?

महाराष्ट्र में करीब 9.65 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर होने की जानकारी राज्य के परिवहन मंत्री ने दी है। इनमें से लगभग 1.65 लाख ड्राइवर मराठी प्रशिक्षण लेकर प्रमाणपत्र प्राप्त कर चुके हैं।

यानी बड़ी संख्या में ड्राइवरों के लिए अभी भाषा संबंधी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है।

विवाद में राजनीति भी तेज

मराठी भाषा के नियम को लेकर विवाद अब राजनीतिक रंग भी ले चुका है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना समेत कुछ मराठी संगठनों की ओर से स्थानीय भाषा के समर्थन में आवाज उठाई जा रही है। दूसरी ओर, ड्राइवर संगठनों और कुछ राजनीतिक नेताओं ने नियम को लेकर आपत्ति जताई है।

मुंबई जैसे बहुभाषी शहर में मराठी की अनिवार्यता को लेकर स्थानीय पहचान बनाम रोजगार और भाषाई समावेशिता की बहस तेज हो गई है।

अभी क्या अपडेट है?

26 अगस्त 2026 तक सबसे बड़ा अपडेट यह है कि सरकार ने मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त तीन महीने का समय देने की घोषणा की है, लेकिन RTO की जांच और नियमों का अनुपालन जारी रहेगा। दूसरी ओर, ड्राइवरों का विरोध पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कई इलाकों में ऑटो-टैक्सी सेवाएं प्रभावित हुई हैं।

साथ ही चार कैब ड्राइवरों की याचिका बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच चुकी है, इसलिए आने वाले दिनों में इस नियम को लेकर अदालत का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा।

फिलहाल सरकार की ओर से प्रशिक्षण के लिए अतिरिक्त समय और 161 प्रशिक्षण केंद्रों की व्यवस्था की गई है, जबकि ड्राइवर संगठन भाषा सीखने की प्रक्रिया को आसान बनाने और RTO कार्रवाई पर स्पष्टता की मांग कर रहे हैं।