चंडीगढ़ से अगवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, 54 दिन बाद PGIMER में मौत

चंडीगढ़ से अगवा सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को पेड़ से बांधकर जिंदा जलाया, 54 दिन बाद PGIMER में मौत

3-4 जुलाई की रात सेक्टर-34 से अगवा करने का आरोप; मोरिंडा के जंगल में ले जाकर पेड़ से बांधा और आग लगाने की बात, मौत के बाद दर्ज हुआ अपहरण-हत्या का केस

चंडीगढ़ से एक पंजाबी सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के कथित अपहरण और फिर उसे जिंदा जलाने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। मनजीत कौर की करीब दो महीने तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 26 अगस्त को PGIMER चंडीगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें गंभीर रूप से झुलसी हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण और हत्या के मामले में FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मनजीत कौर को कथित तौर पर चंडीगढ़ के सेक्टर-34 बुलाया गया था। उनकी मां कांता देवी की शिकायत के अनुसार, उनकी बेटी के दो परिचित शुभी और पिंडा ने उन्हें वहां बुलाया। आरोप है कि वहां उनके साथ मारपीट की गई और जबरन एक वाहन में बैठाकर पंजाब के मोरिंडा के पास जंगल वाले इलाके में ले जाया गया।

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मोरिंडा के पास पहुंचने के बाद मनजीत कौर को एक पेड़ से बांध दिया गया और आग लगा दी गई। हमलावरों के मौके से भागने के बाद एक अन्य परिचित वहां पहुंचा और कंबल की मदद से आग बुझाई। इसके बाद मनजीत को गंभीर हालत में मोरिंडा के अस्पताल ले जाया गया। बाद में उनका इलाज मोहाली के मैक्स अस्पताल में हुआ और फिर उन्हें PGIMER चंडीगढ़ रेफर किया गया, जहां वह लगातार उपचार में रहीं।

इलाज के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी कई सवाल खड़े हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, मनजीत कौर को इलाज के दौरान होश आया था और उन्होंने अपना बयान दर्ज कराने की इच्छा जताई थी। PGIMER पुलिस पोस्ट की ओर से कथित तौर पर खरड़ सदर पुलिस को भी सूचना दी गई कि मनजीत बयान देने की स्थिति में हैं। आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद जांच अधिकारी अस्पताल नहीं पहुंचे। इस दौरान PGI पुलिस पोस्ट में इस संबंध में डेली डायरी रिपोर्ट यानी DDR दर्ज किए जाने की बात भी सामने आई है।

मनजीत कौर करीब दो महीने तक अस्पताल में इलाज कराती रहीं, लेकिन 26 अगस्त को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद PGI पुलिस पोस्ट की ओर से फिर खरड़ सदर पुलिस को सूचना भेजी गई। इसके बाद जांच अधिकारी अस्पताल पहुंचे। मनजीत की मां को सेक्टर-34 पुलिस स्टेशन ले जाकर उनका बयान दर्ज किया गया और बुधवार रात FIR दर्ज की गई। अगले दिन PGIMER में पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद शव परिवार को सौंप दिया गया।
अब चंडीगढ़ पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मनजीत कौर को सेक्टर-34 क्यों बुलाया गया था, उन्हें किस वाहन से चंडीगढ़ से मोरिंडा ले जाया गया और हमले के पीछे क्या वजह थी। पुलिस सेक्टर-34 और आसपास के इलाकों की CCTV फुटेज खंगाल रही है। इसके साथ ही वाहन की आवाजाही का पता लगाने के लिए टोल प्लाजा की CCTV फुटेज भी जांचे जाने की संभावना है।

पुलिस उन अस्पतालों से जुड़ी जानकारी भी जुटा रही है, जहां PGIMER पहुंचने से पहले मनजीत कौर का इलाज हुआ था। जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि क्या दोनों अस्पतालों ने इस मामले को मेडिको-लीगल केस यानी MLC के तौर पर पुलिस को सूचित किया था या नहीं। इसके अलावा पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या मनजीत की मां या परिवार ने इससे पहले पंजाब पुलिस से अपनी बेटी के कथित अपहरण और जलाए जाने को लेकर कोई शिकायत की थी। मामले में कई सवाल अभी भी अनसुलझे हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि मनजीत को चंडीगढ़ से मोरिंडा क्यों ले जाया गया, इस वारदात में शुभी और पिंडा के अलावा कोई अन्य व्यक्ति शामिल था या नहीं और अस्पताल में इलाज के दौरान मनजीत का बयान दर्ज क्यों नहीं हो पाया। इन सभी सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के बाद ही सामने आएंगे।

वहीं पंजाब पुलिस ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस का कहना है कि कथित अपहरण चंडीगढ़ में हुआ था, इसलिए कार्रवाई चंडीगढ़ पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आती थी। पंजाब पुलिस ने यह भी कहा है कि खरड़ पुलिस ने मनजीत की मां को पूरा सहयोग दिया और FIR दर्ज कराने में सहायता की। अब जांच एजेंसियां घटना की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी हैं। मनजीत कौर की मौत के बाद इस मामले ने पुलिस की कार्रवाई और समय पर बयान दर्ज किए जाने को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस CCTV फुटेज, वाहन की जानकारी, अस्पताल के रिकॉर्ड और परिवार के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। मामले में आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।