पूर्व IAS नियाज खान की बड़ी मांग- उम्मीदवारों को धर्म के आधार पर दिलाई जाए शपथ, जीत के बाद पलटने पर वीडियो किया जाए जारी

पूर्व IAS नियाज खान की बड़ी मांग- उम्मीदवारों को धर्म के आधार पर दिलाई जाए शपथ, जीत के बाद पलटने पर वीडियो किया जाए जारी

Niyaz Khan Statement: पूर्व IAS अधिकारी नियाज खान ने चुनावी राजनीति में नेताओं के दल-बदल और कथित खरीद-फरोख्त को लेकर एक सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से शपथ दिलाई जाए कि जीतने के बाद वे लालच में नहीं आएंगे और बिकेंगे नहीं।

भोपाल। मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व IAS अधिकारी नियाज खान एक बार फिर अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं। रिटायरमेंट के बाद वे लगातार सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करते रहे हैं। अब उन्होंने चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को लेकर एक अलग तरह का सुझाव दिया है।

नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सुझाव दिया कि चुनाव में उम्मीदवारों को टिकट देने से पहले उनसे शपथ दिलाई जानी चाहिए। उनके मुताबिक, उम्मीदवारों से यह शपथ ली जाए कि चुनाव जीतने के बाद वे किसी तरह के लालच में नहीं आएंगे और अपनी राजनीतिक स्थिति नहीं बदलेंगे।

धर्म के आधार पर शपथ दिलाने का सुझाव

पूर्व IAS अधिकारी ने अपने पोस्ट में धर्म के आधार पर अलग-अलग तरीके से शपथ दिलाने की बात कही। उन्होंने हिंदू उम्मीदवारों के लिए गंगाजल और बच्चों की शपथ तथा मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए कुरान और बच्चों की शपथ का सुझाव दिया।

नियाज खान का कहना है कि उम्मीदवारों से इस तरह शपथ दिलाकर यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जा सकती है कि वे चुनाव जीतने के बाद किसी लालच या राजनीतिक फायदे के लिए अपने रुख से न पलटें।

उनके इस सुझाव का केंद्र चुनाव के बाद होने वाले राजनीतिक बदलाव और नेताओं के कथित तौर पर पाला बदलने की घटनाओं को रोकने का विचार है।

शपथ लेते समय वीडियो रिकॉर्ड करने की भी मांग

नियाज खान ने केवल शपथ दिलाने की बात नहीं कही, बल्कि शपथ का वीडियो रिकॉर्ड करने का सुझाव भी दिया। उनका कहना है कि उम्मीदवार के शपथ लेने का वीडियो सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

यदि चुनाव जीतने के बाद कोई उम्मीदवार अपने कथित वादे से पलटता है या राजनीतिक रूप से अपना रुख बदलता है, तो उस समय शपथ वाला वीडियो सार्वजनिक किया जा सकता है। उनके अनुसार इससे जनता को यह याद दिलाया जा सकेगा कि उम्मीदवार ने चुनाव से पहले क्या संकल्प लिया था।

चुनावी राजनीति में खरीद-फरोख्त पर उठाया सवाल

नियाज खान के इस बयान का संदर्भ चुनाव के बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से जुड़ा है। भारतीय राजनीति में कई बार चुनाव के बाद नेताओं के दल बदलने, समर्थन बदलने या सरकार बनाने-बिगाड़ने को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।

पूर्व IAS अधिकारी का सुझाव इसी तरह की परिस्थितियों को लेकर है। हालांकि उन्होंने जो तरीका सुझाया है, वह उनका व्यक्तिगत विचार है और इसे किसी मौजूदा चुनावी नियम या कानूनी प्रावधान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

एक दिन पहले भी सोशल मीडिया पोस्ट से चर्चा में थे

नियाज खान ने इससे एक दिन पहले भी सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी की थी। उन्होंने लोकतंत्र में ब्राह्मणों और क्षत्रियों की राजनीतिक स्थिति को लेकर टिप्पणी की थी। उनके इस बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर चर्चा हुई।

नियाज खान लंबे समय से सोशल मीडिया पर विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखते रहे हैं। उनके कुछ पोस्ट पहले भी विवाद का विषय बन चुके हैं।

लेखक भी हैं पूर्व IAS नियाज खान

नियाज खान प्रशासनिक सेवा के अलावा लेखन के लिए भी जाने जाते हैं। वह अंग्रेजी में 12 उपन्यास लिख चुके हैं। इनमें The Great Brahmin की काफी चर्चा हुई थी।

सरकारी सेवा से सेवानिवृत्ति के बाद भी वे सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों पर अपनी राय सार्वजनिक मंचों के जरिए सामने रखते रहे हैं।

सामाजिक मुद्दों पर लगातार रखते हैं राय

नियाज खान सोशल मीडिया के माध्यम से अलग-अलग सामाजिक विषयों पर टिप्पणी करते रहे हैं। इससे पहले भी उन्होंने आवास, समुदायों और प्रशासनिक सेवा से जुड़े मुद्दों को लेकर पोस्ट किए हैं।

उनके बयानों को लेकर कभी समर्थन तो कभी विरोध देखने को मिलता रहा है। इस बार उनका चुनावी उम्मीदवारों से शपथ लेने और उसका वीडियो रिकॉर्ड करने का सुझाव चर्चा में है।

नियाज खान के सुझाव की मुख्य बातें
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों से शपथ लेने की बात।
हिंदू उम्मीदवारों के लिए गंगाजल और बच्चों की शपथ का सुझाव।
मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए कुरान और बच्चों की शपथ का सुझाव।
शपथ का वीडियो रिकॉर्ड करने की मांग।
चुनाव जीतने के बाद कथित तौर पर पलटने पर वीडियो जारी करने का सुझाव।
उद्देश्य के तौर पर राजनीतिक खरीद-फरोख्त और लालच से बचने की बात कही।

नियाज खान का यह बयान फिलहाल एक व्यक्तिगत सुझाव है। इसे मौजूदा चुनावी कानून या टिकट वितरण की अनिवार्य प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। उनके बयान के बाद सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर बहस तेज हो गई है।