सिहोरा में फर्जी महिला डॉक्टर का क्लीनिक, अबॉर्शन किट और दवाइयां बरामद; डिग्री-डिप्लोमा तक नहीं दिखा पाई

सिहोरा में फर्जी महिला डॉक्टर का क्लीनिक, अबॉर्शन किट और दवाइयां बरामद; डिग्री-डिप्लोमा तक नहीं दिखा पाई

स्वास्थ्य विभाग और तहसीलदार की संयुक्त कार्रवाई, खितौला में कई महीनों से इलाज करने की शिकायत; क्लीनिक से महिलाओं और बच्चों के उपचार से जुड़े उपकरण भी मिले
शिकायत के बाद प्रशासन ने क्लीनिक पर दी दबिश

जबलपुर जिले के सिहोरा क्षेत्र में बिना वैध चिकित्सकीय योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने का मामला सामने आया है। सिहोरा से करीब 60 किलोमीटर दूर खितौला क्षेत्र में एक महिला द्वारा कथित तौर पर लंबे समय से क्लीनिक संचालित करने की शिकायत स्वास्थ्य विभाग तक पहुंची थी। शिकायत में महिला पर बिना जरूरी योग्यता के इलाज करने के साथ-साथ क्लीनिक में संदिग्ध और अवैध गतिविधियां संचालित किए जाने के आरोप लगाए गए थे। मामले को गंभीरता से लेते हुए सिहोरा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अर्शिया खान और तहसीलदार अमित गुप्ता ने टीम गठित की और साईं मंगलम कॉलोनी स्थित मकान पर अचानक छापा मारा।

पूछताछ में मेडिकल योग्यता पर उठे सवाल

टीम जब क्लीनिक पहुंची तो वहां प्रीति केवट मरीजों का इलाज करती मिलीं। अधिकारियों ने उनसे चिकित्सा संबंधी डिग्री, डिप्लोमा और क्लीनिक संचालन से जुड़े दस्तावेज मांगे। पूछताछ में प्रीति केवट ने बताया कि उन्होंने अल्टरनेटिव मेडिसिन में डिप्लोमा किया है, लेकिन जांच के दौरान वह संबंधित डिप्लोमा या उसकी पुष्टि करने वाला दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सकीं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, मौके पर उनकी ऐसी कोई वैध चिकित्सकीय योग्यता सामने नहीं आई, जिसके आधार पर नियमित मेडिकल प्रैक्टिस किए जाने की पुष्टि हो सके। अब विभाग इस बात की भी जांच कर रहा है कि वह कितने समय से मरीजों का इलाज कर रही थीं और इस दौरान किन-किन प्रकार की चिकित्सा सेवाएं दी जा रही थीं।

क्लीनिक में मिली अबॉर्शन किट और दवाइयां

छापेमारी के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीम को क्लीनिक से गर्भपात से संबंधित किट और दवाइयां मिलीं। इसके अलावा महिलाओं के इलाज में इस्तेमाल होने वाले कई सर्जिकल आइटम भी बरामद किए गए। टीम को बच्चों के उपचार से जुड़े कुछ मेडिकल उपकरण भी मिले हैं। इतनी अलग-अलग प्रकार की मेडिकल सामग्री एक ऐसे स्थान से मिलने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। अब अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन दवाइयों और उपकरणों का इस्तेमाल किस प्रकार किया जाता था और क्या इनके इस्तेमाल के लिए संबंधित अनुमति या चिकित्सकीय योग्यता मौजूद थी।

दूरदराज इलाकों में झोलाछाप डॉक्टरों पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में संचालित होने वाले ऐसे क्लीनिकों की निगरानी पर सवाल खड़े किए हैं, जहां लोग स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए पहुंचते हैं। कई बार लोग विशेषज्ञ डॉक्टर तक पहुंचने में परेशानी, दूरी या खर्च के कारण स्थानीय स्तर पर उपचार करा लेते हैं। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति के पास पर्याप्त चिकित्सा योग्यता नहीं है और वह मरीजों का इलाज करता है, तो गलत उपचार की स्थिति में गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा हो सकता है। सिहोरा के खितौला में सामने आया मामला भी इसी वजह से स्वास्थ्य विभाग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कई महीनों से इलाज करने की मिली थी शिकायत

प्रशासन को शिकायत मिली थी कि प्रीति केवट पिछले कई महीनों से क्षेत्र के लोगों का इलाज कर रही थीं। शिकायतकर्ताओं ने क्लीनिक में होने वाली कुछ गतिविधियों को लेकर भी संदेह जताया था। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर क्लीनिक की जांच की। अधिकारियों ने वहां मौजूद मेडिकल सामग्री को देखा और संचालक से उसकी योग्यता तथा उपचार से संबंधित जानकारी ली। अब जांच में सामने आए तथ्यों को दस्तावेजों के साथ मिलाया जा रहा है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि क्लीनिक किस तरह संचालित किया जा रहा था।

महिलाओं के इलाज से जुड़े सामान की भी जांच

क्लीनिक से महिलाओं के उपचार में इस्तेमाल होने वाले सर्जिकल सामान और गर्भपात से संबंधित सामग्री मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग इस पहलू की भी जांच कर रहा है। अधिकारियों के सामने अब यह पता लगाना अहम है कि इन सामग्री का उपयोग केवल रखरखाव या किसी वैध उद्देश्य से किया जा रहा था अथवा मरीजों पर उपचार किया जाता था। इसी तरह बच्चों के उपचार से जुड़े उपकरण मिलने के बाद यह भी जांच का विषय है कि संचालक किन-किन बीमारियों के मरीजों का इलाज करती थीं और किस प्रकार की दवाइयां दी जाती थीं।

एफआईआर की तैयारी, सीएमएचओ को जाएगी रिपोर्ट

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्रवाई के दौरान मिली सामग्री और जांच में सामने आए तथ्यों की रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार पूरी रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी यानी सीएमएचओ को भेजी जाएगी। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। प्रशासन की ओर से क्लीनिक संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है। यदि जांच में बिना वैध अनुमति या योग्यता के चिकित्सा गतिविधियां संचालित किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

अब निगरानी व्यवस्था पर भी उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि शिकायत के अनुसार क्लीनिक कई महीनों से संचालित हो रहा था, तो नियमित निरीक्षण के दौरान यह गतिविधि पहले क्यों सामने नहीं आई, यह भी जांच का विषय रहेगा। फिलहाल विभाग की प्राथमिकता बरामद मेडिकल सामग्री, संचालक की वास्तविक योग्यता और क्लीनिक में किए जा रहे उपचार की प्रकृति की जांच करना है। रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में कितनी गंभीर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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