एशियन गेम्स में चीन के 169 गोल्ड, भारत के सिर्फ 21: आबादी करीब बराबर, फिर 8 गुना का अंतर क्यों; खेलों में आखिर कहां पीछे रह जाता है भारत?

एशियन गेम्स में चीन के 169 गोल्ड, भारत के सिर्फ 21: आबादी करीब बराबर, फिर 8 गुना का अंतर क्यों; खेलों में आखिर कहां पीछे रह जाता है भारत?

एशियन गेम्स में चीन के 169 गोल्ड, भारत के सिर्फ 21: आबादी करीब बराबर, फिर 8 गुना का अंतर क्यों; खेलों में आखिर कहां पीछे रह जाता है भारत?

क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में भारत का दबदबा, लेकिन दूसरे खेलों में चीन से बड़ा अंतर; सुविधाओं, ट्रेनिंग और प्रतिभाओं को निखारने की व्यवस्था पर उठते सवाल

क्रिकेट-कबड्डी-हॉकी में भारत का शानदार प्रदर्शन

एशियन गेम्स 2026 में क्रिकेट, कबड्डी और हॉकी में भारत का प्रदर्शन शानदार रहा। महिला और पुरुष दोनों वर्गों में भारत ने इन तीनों खेलों के सभी 6 गोल्ड मेडल अपने नाम किए। इन खेलों में भारत ने अपनी मजबूत स्थिति एक बार फिर साबित की।

मेडल टैली में चीन बहुत आगे

हालांकि पूरे एशियन गेम्स की मेडल टैली देखें तो भारत और चीन के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। चीन ने 169 गोल्ड मेडल जीते, जबकि भारत के खाते में 21 गोल्ड आए। यानी गोल्ड मेडल के मामले में चीन भारत से करीब 8 गुना आगे रहा।

आबादी करीब बराबर, फिर इतना बड़ा अंतर क्यों?

भारत और चीन दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाले देशों में शामिल हैं। इसके बावजूद एशियन गेम्स में दोनों देशों के प्रदर्शन में इतना बड़ा अंतर कई सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि बड़ी आबादी होने के बावजूद भारत अपनी खेल प्रतिभाओं को उतने बड़े स्तर पर मेडल में क्यों नहीं बदल पाता।

ट्रेनिंग और खेल सुविधाएं बड़ी चुनौती

भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन कई खेलों में खिलाड़ियों को बेहतर ट्रेनिंग, आधुनिक खेल सुविधाएं, विशेषज्ञ कोच और अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी की जरूरत होती है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं तक इन सुविधाओं की पहुंच भी एक अहम चुनौती मानी जाती है।

चीन का सिस्टम और लंबे समय की तैयारी

चीन में खिलाड़ियों की पहचान कम उम्र से करने और उन्हें लंबे समय तक विशेष ट्रेनिंग देने पर जोर दिया जाता है। अलग-अलग खेलों के लिए विशेषज्ञ प्रशिक्षण और मजबूत खेल ढांचा तैयार किया गया है। भारत में भी खेलों में निवेश और सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बड़ी संख्या में मेडल जीतने के लिए इस व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है।

भारत के लिए चुनौती सिर्फ मेडल की नहीं

एशियन गेम्स की यह तस्वीर बताती है कि भारत के लिए चुनौती केवल ज्यादा खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भेजने की नहीं, बल्कि प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से तैयार करने और उन्हें विश्वस्तरीय सुविधाएं देने की भी है। अगर खेलों का सिस्टम मजबूत होता है, तो क्रिकेट के अलावा दूसरे खेलों में भी भारत की मेडल संख्या बढ़ सकती है।