ब्राह्मण समाज बोला-रावण दहन शास्त्र सम्मत नहीं, न्याय मिलना चाहिए:चार आयोजकों को कानूनी नोटिस; कहा-प्रथा बंद करें, वरना किसी भी हद तक चले जाएंगे

ब्राह्मण समाज बोला-रावण दहन शास्त्र सम्मत नहीं, न्याय मिलना चाहिए:चार आयोजकों को कानूनी नोटिस; कहा-प्रथा बंद करें, वरना किसी भी हद तक चले जाएंगे

उज्जैन में रावण दहन पर विवाद: ब्राह्मण समाज ने बताया शास्त्र सम्मत नहीं, चार आयोजकों को कानूनी नोटिस

उज्जैन में दशहरा पर्व से पहले रावण दहन को लेकर विवाद शुरू हो गया है। अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने 20 अक्टूबर को होने वाले रावण दहन कार्यक्रमों का विरोध करने का ऐलान किया है। संगठन ने शहर में रावण दहन के चार प्रमुख आयोजकों को वकील के जरिए कानूनी नोटिस भेजकर परंपरा बंद करने की मांग की है।

  • संगठन का कहना है कि रावण दहन शास्त्र सम्मत नहीं है। समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि भगवान राम द्वारा रावण का वध पहले ही किया जा चुका है, इसलिए उसके पुतले का दहन करने की परंपरा का कोई औचित्य नहीं है। संगठन ने इसे मनोरंजन और राजनीति से जोड़कर भी सवाल उठाए हैं।
  • अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज के संरक्षक महेश पुजारी ने कहा कि ब्राह्मण समाज को न्याय मिलना चाहिए। उनके मुताबिक देश और प्रदेश में जिस तरह रावण दहन किया जाता है, वह विधि और शास्त्र के अनुरूप नहीं है। उन्होंने आयोजन संस्थाओं से रावण दहन की परंपरा बंद करने की अपील की है।
  • संगठन की ओर से दशहरा मैदान, शास्त्री नगर, कार्तिक मेला ग्राउंड और नानाखेड़ा में होने वाले रावण दहन आयोजनों के आयोजकों को कानूनी नोटिस भेजे गए हैं। समाज ने चेतावनी दी है कि मांग नहीं मानी गई तो वह कोर्ट का रुख करेगा और आंदोलन को व्यापक स्तर पर ले जाएगा।
  • ब्राह्मण समाज के महेश शर्मा ने कहा कि रावण के पुतले को मनोरंजन के तौर पर पेश करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि रावण ने जो किया, उसकी सजा भगवान राम ने दे दी थी। ऐसे में उसके पुतले का दहन करने की परंपरा को जारी रखने पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।
  • संगठन ने दावा किया कि वह पिछले साल भी रावण दहन के खिलाफ विरोध दर्ज करा चुका है। पिछले वर्ष कार्यकर्ताओं ने मुख्य आयोजन से पहले रावण के पुतले के सामने रावण के जयकारे लगाए थे और काली मटकियां फोड़कर रावण दहन रोकने की मांग की थी।
  • ब्राह्मण समाज पहले भी इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिख चुका है। संगठन ने रावण दहन पर रोक लगाने की मांग की थी। अब चार आयोजकों को कानूनी नोटिस भेजे जाने के बाद उज्जैन में दशहरा आयोजन को लेकर विवाद और तेज हो गया है।