राज्यपाल बोले- वंदे मातरम् गाने पर लोगों को जेल में डाला गया

राज्यपाल बोले- वंदे मातरम् गाने पर लोगों को जेल में डाला गया

राज्यपाल बोले- वंदे मातरम् गाने पर लोगों को जेल में डाला गया

सीकर में शेखावाटी साहित्य संगम का शुभारंभ, बोले- पालने में ही बच्चों को मातृभूमि की रक्षा के संस्कार दिए जाते हैं

राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने शुक्रवार को सीकर में शेखावाटी साहित्य संगम के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रगीत वंदे मातरम्, भारतीय साहित्य, शिक्षा नीति और देश की सुरक्षा जैसे विषयों पर अपनी बात रखी। राज्यपाल ने कहा कि भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने वंदे मातरम् को राष्ट्रगान के समान महत्व देने की घोषणा की थी, लेकिन इसके बावजूद देश में वंदे मातरम् गाने पर लोगों को जेलों में डाला गया।

राज्यपाल ने राजस्थान की वीर परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां बच्चों को पालने में ही मातृभूमि की रक्षा करना सिखाया जाता है। उन्होंने साहित्य को समाज की धड़कन बताते हुए लेखन में संयम और मर्यादा बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

पालने में ही मिलते हैं मातृभूमि की रक्षा के संस्कार

राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े ने राजस्थान की लोक परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां बच्चों को बचपन से ही देश और मातृभूमि की रक्षा के संस्कार दिए जाते हैं। उन्होंने शेखावाटी क्षेत्र की वीरता और देशसेवा की परंपरा की सराहना की।

उन्होंने कहा कि शेखावाटी में वीरता और शिक्षा से जुड़े अनेक उदाहरण मिलते हैं। क्षेत्र में जगह-जगह शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित हैं और कई परिवारों की तीसरी-चौथी पीढ़ी भी देश की सेवा में जुटी हुई है।

भारतीय साहित्य को बताया ज्ञान-विज्ञान का स्रोत

राज्यपाल ने कहा कि साहित्य समाज की धड़कन है। साहित्य का सृजन करते समय लेखक को संयम और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। शेखावाटी साहित्य संगम लोक संस्कृति और साहित्य को एक मंच पर लाने का प्रयास है।

उन्होंने गीताप्रेस गोरखपुर की स्थापना और सांस्कृतिक साहित्य के संरक्षण में हनुमान प्रसाद पोद्दार के योगदान का भी उल्लेख किया। राज्यपाल ने कहा कि रामायण और महाभारत जैसे भारतीय ग्रंथ विदेशों में भी पढ़े जाते हैं। भारतीय उपनिषदों का लंबे समय तक अनुवाद कर अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने भारत की गणितीय और बौद्धिक परंपरा का जिक्र करते हुए शून्य के योगदान को भी रेखांकित किया।

बोले- आजादी के बाद शिक्षा नीति बदलने की जरूरत थी

शिक्षा व्यवस्था पर अपनी बात रखते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत के स्वतंत्र होने के बाद ही शिक्षा नीति में बदलाव की जरूरत थी। उन्होंने स्कूली शिक्षा में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान देना पर्याप्त नहीं है।

उनके मुताबिक, शिक्षा में नैतिकता, बुद्धि, विवेक, समझदारी और संस्कारों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। इससे विद्यार्थियों का समग्र विकास हो सकेगा और वे जिम्मेदार नागरिक बन सकेंगे।

पीओके को बताया बड़ी समस्या

राज्यपाल ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) का मुद्दा उठाते हुए इसे देश के सामने बड़ी समस्या बताया। उन्होंने भारत-पाकिस्तान युद्ध के संदर्भ में तत्कालीन गवर्नर जनरल लॉर्ड माउंटबेटन और भारतीय सैनिकों को रोकने से जुड़ी ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख किया।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता अविनाश सिंह पंवार ने कहा कि देश की बाहरी सुरक्षा के लिए शस्त्र और आंतरिक सुरक्षा के लिए शास्त्रों की जरूरत है।

तीन दिन तक होंगे साहित्य और संस्कृति से जुड़े आयोजन

शेखावाटी साहित्य संगम का आयोजन तीन दिनों तक किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता शेखावाटी यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. युद्धवीर सिंह ने की। उन्होंने विश्वविद्यालय में संचालित पाठ्यक्रमों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में जिला कलेक्टर आशीष मोदी, पुलिस अधीक्षक संजीव नैन सहित अधिकारी, शिक्षाविद्, विद्यार्थी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। सीकर की स्केच आर्टिस्ट अपूर्वा ने राज्यपाल को उनकी तस्वीर का स्केच भेंट किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. रेणु महलावत ने किया।

उद्घाटन सत्र के बाद जनसंख्या परिवर्तन, कश्मीर और वंदे मातरम् जैसे विषयों पर चर्चा सत्र आयोजित किए गए। इसके साथ ही साफा-पगड़ी बांधने और मेहंदी प्रतियोगिताएं भी हुईं।

10 अक्टूबर को जेन-जी, टेक्नोलॉजी और हल्दीघाटी से वैश्विक चुनौतियों तक के विषयों पर चर्चा होगी। राजस्थान की संस्कृति से जुड़े गीत, नृत्य और वेशभूषा प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाएंगी।

11 अक्टूबर को संत रविदास, ज्ञान-विज्ञान, रणभूमि से बोर्डरूम और साहित्य में भारत जैसे विषयों पर सत्र होंगे। अंतिम दिन चित्रकला, सामूहिक लोकगीत और नृत्य प्रतियोगिताओं के बाद पुरस्कार वितरण समारोह के साथ आयोजन का समापन होगा।